Tuesday, 16 July, 2019
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Master Ved with Parents

बेटे वेद का पहला जन्मदिन थेलिसिमिया बच्चों के नाम

कोटा। मर्चेंट नेवी में सेवारत श्वेतांक दीक्षित ने बेटे वेद का पहला जन्मदिन थैलीसीमिया बच्चों के लिए रक्तदान शिविर आयोजित कर मनाया। बसन्त विहार निवासी श्वेतांक ने बताया कि वे स्वैच्छिक रक्तदान करते हुए थेलिसिमिक बच्चों का दर्द देख उनको बेटे जैसी खुशियां देने का संकल्प किया।

उन्होंने सहयोगी नीरज सिंह के साथ मिलकर 13 फरवरी को रक्तदान शिविर लगाया, जिसमे कुछ ही समय में 36 यूनिट रक्तदान कर साथियों ने बेटे वेद को जन्मदिन का अनमोल तोहफा दिया। पत्नी व परिजनों ने कहा कि बर्थडे पार्टी से अच्छा है कि अपने बच्चों का जन्मदिन जरूरतमंद बच्चों के बीच मनाया जाए।

शिविर में समाजसेवी हिम्मतसिंह हाड़ा ने कहा कि इस अनूठी पहल से बच्चों को प्रेरणा मिलेगी। जन्मदिन मनाने का यह तरीका प्रशंसनीय है। शिविर में रक्तदान मदद ग्रुप, आरजे ब्लड हेल्प लाइन व नीरज सिंह टीम ने सहयोग किया।

रक्तदाता समूह के कॉर्डिनेटर जय गुप्ता ने बताया कि जनवरी में झालावाड़ जिले के खानपुर से एमबीएस ब्लड बैंक, कोटा में थैलीसीमिया बच्चों की मदद के लिए 95 यूनिट रक्त भेजा गया था। सभी रक्तवीर सोशल मीडिया के माध्यम से इस मिशन से जुड़े हुए हैं। हाड़ौती अंचल में किसी गरीब रोगी को रक्त की कमी से नही जुझना पड़ता है। मोबाइल एवम वाट्सअप ग्रुप से स्वेच्छिक़ रक्तसेवा 24 घन्टे अनवरत चालू रहती है।

550 थैलीसीमिया बच्चों को मिलता है रक्त

एमबीएस ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ एच एल मीणा ने बताया कि सरकारी ब्लड बैंक में सर्वाधिक 600 थेलिसिमिया बच्चों का रजिस्ट्रेशन है, जिसमे से प्रतिमाह 550 से अधिक थेलेसिमिया बच्चोँ को रक्त चढ़ाया जा रहा है। सरकारी ब्लड बैंक में 1 से 18 वर्ष उम्र के बच्चे अभिभावकों के साथ जयपुर, सवाईमाधोपुर, निवाई सहित दूरदराज से यह आस लेकर आते हैं कि वे रक्त चढ़ाकर शाम को घर लौट जाएंगे। कुछ वर्ष पहले यहां सप्ताह में 2 दिन थेलिसिमिया बच्चों को रक्त दिया जाता था, लेकिन पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ने से अब रोज रक्त चढ़ाया जाता है।

एमबीएस ब्लड बैंक में स्टोरेज क्षमता 2500 यूनिट की है लेकिन 35 दिन तक ही रक्त शुद्ध रहने से 1000 यूनिट रक्त संग्रह किया जाता है। इसमे थैलेसीमिया बच्चों को रक्त मुहैया कराने में सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। कोटा में स्वेच्छिक़ रक्तदान के लिए जन-जागरूकता होने से किसी जरूरतमंद को खाली हाथ नही लौटना पड़ता है।

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