Friday, 24 May, 2019
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बृहस्पति पर मिला एक अनूठा चंद्रमा ‘वैलेटुडो’

डॉ.शुभ्रता मिश्रा

न्यूजवेव गोवा

अमेरिका के कार्नेगी इंस्टीट्यूशन फॉर साइंस के खगोलविदों ने बृहस्पति ग्रह के चारों ओर 12 और चंद्रमा खोज निकाले हैं। इसके साथ ही अब बृहस्पति के कुल ज्ञात उपग्रहों की संख्या 79 हो गई है।

वैज्ञानिकों के अनुसार  12 नए खोज किए गए चंद्रमाओं में से 11 सामान्य हैं, जो अपने निकटतम पड़ोसी चंद्रमाओं की भांति समान दिशा में परिक्रमा कर रहे हैं, परंतु वास्तव में बेहद अजीब किस्म का एक चंद्रमा भी मिला है जो ऐसा नहीं कर रहा है।

यह शायद बृहस्पति का सबसे छोटा ज्ञात चंद्रमा है, जिसका व्यास लगभग 1 किलोमीटर (0.6 मील) से भी कम है। वैज्ञानिकों ने स्वास्थ्य और स्वच्छता की रोमन देवी के नाम पर बृहस्पति के मिले इस नए अनूठे चंद्रमा का नाम वैलेटुडो रखा है। यह बृहस्पति की घूर्णन दिशा में ही परिक्रमा कर रहा है।

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अन्य चंद्रमाओं के विपरीत अपने उल्टे घूमने के कारण किसी दिन वैलेटुडो बृहस्पति के अन्य चंद्रमाओं से टकरा सकता है। हालाकि ऐसा करोड़ों वर्षों बाद ही होगा। वास्तव में वैलेटुडो एक चट्टान का टुकड़ा है, जो एक गैर-अनुरूपवादी उपग्रह है, जो कोई दुर्लभ बात नहीं है। लेकिन फिर भी वैलेटुडो जैसी अंतरिक्षीय विषमताएं खगोलवैज्ञानिकों को संबंधित अन्य खोजों के लिए सहायक साबित होती हैं।

सन् 1610 में गैलीलियो गैलिली ने बृहस्पति के चार चन्द्रमाओं गैनिमीड, कलिस्टो, आयो और यूरोपा की खोज की थी, तब से वैज्ञानिक इस ग्रह और उसके उपग्रहों से संबंधित कई रहस्यों के उजागर करते आ रहे हैं। चार दिन पहले ही इटली के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एस्ट्रोफिजिक्स के वैज्ञानिकों ने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के जूनो यान की सहायता से आयो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास एक ज्वालामुखी के होने की पुष्टि की है। हांलाकि इसके पहले के अभियानों में नासा आयो पर 150 से अधिक सक्रिय ज्वालामुखी खोज चुका है।

प्लाज्मा वर्षा के साथ प्रभावी तूफान भी

इसी साल मई 2018 में भी नासा के गैलीलियो अंतरिक्ष यान से गैनिमीड चंद्रमा पर प्लाज्मा वर्षा और अद्भुत चुम्बकीय वातावरण के साथ एक प्रभावी तूफानी वातावरण की जानकारी मिली थी। नवम्बर 2017 में भी बृहस्पति अपने उत्तरी गोलार्ध में आए उग्र तूफान के कारण सुर्खियों में रहा था। इसकी जानकारी नासा के जूनो अंतरिक्ष यान से ही मिली थी।

इसके पहले 2015 में भी हबल स्पेस टेलीस्कोप से गैनिमीड चंद्रमा पर जमी लगभग 150 किलोमीटर मोटी बर्फीली विशाल परत के नीचे भूमिगत समुद्र होने के पुख्ता सबूत मिल चुके हैं।

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