Thursday, 13 August, 2020

प्रो.एस.सी.मेहता ने देहदान के साथ कुरीतियां रोकने का संकल्प भी लिया

शरीर के अंग किसी जरूरतमंद को काम आयें, मृत्युभोज, तीये व बारहवें की रस्में नहीं की जाये
न्यूजवेव@ कोटा

गवर्नमेंट कॉलेज, कोटा के पूर्व प्राचार्य प्रो.एस.सी.मेहता ने देहदान की घोषणा करते हुये कहा कि मेरी मृत्यु के पश्चात् शरीर के अंग किसी जरूरतमंद को लगाये जायें तथा शेष अंग मेडिकल कॉलेज में अध्ययन हेतु काम में लिये जायें।
उन्होंने एक शपथपत्र में कहा कि मृत्युपरांत शवयात्रा में भीड़ न हो, साथ ही परिजनों द्वारा तीये की बैठक, शोकसभा, बारहवें की रस्म व मृत्युभोज आदि नहीं किया जाये। उनका कहना है कि इन रस्मों में फिजूलखर्ची के साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान पहंुचाया जा रहा है। जलवायु परिवर्तन को देखते हुये सरकार ऐसा वातावरण पैदा करे कि प्रत्येक व्यक्ति जागरूक होकर स्वयं बुराइयां खत्म करने का संकल्प लें। प्रो.मेहता के सुपुत्र रमन मेहता यूएसए में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में सीओओ के पद पर कार्यरत हैं।
मृत्युभोज पर रोक व सीमित संख्या में विवाह परंपरा बने
प्रो. मेहता ने कहा कि हाल ही में राजस्थान सरकार ने राज्य में मृत्युभोज को प्रतिबंधित कर अच्छा कदम उठाया है। इससे गरीब व मध्यमवर्ग को बहुत राहत मिलेगी। आजकल मृत्युभोज के नाम पर हजारों सक्षम लोगों को भोजन करने की गलत परंपरा विकसित हो रही थी। इसी तरह, कोरोना एडवाइजरी में विवाह समारोह में भाग लेने वालों की संख्या 50 तक सीमित करने का प्रत्येक वर्ग ने स्वागत किया है। इसे प्रत्येक समाज द्वारा हमेशा के लिये स्वस्थ परंपरा के रूप में लागू कर देना चाहिये, जिससे निम्न व मध्यमवर्ग के परिवारों को बहुत सुकून मिलेगा। हम सभी ने देखा है कि कोरोना महामारी व लॉकडाउन के दौरान पिछले 5 माह से गरीब व मजदूर वर्ग को दो वक्त की रोटी के लिये जूझना पड़ रहा है।
सम्पत्ति का कुछ हिस्सा जरूरतमंदों को
बजरंग नगर के त्रिवेणी आवास में रहने वाले प्रो.मेहता ने कहा कि हमने आजीविका में जो कुछ अर्जित किया, उसका कुछ अंश परोपकार में लगाने से मन को स्थायी शांति मिलती है। वे अपनी सम्पत्ति का कुछ हिस्सा जरूरतमंदों को दान करने का संकल्प वसीयत में लिखकर अवश्य पूरा करेंगे। उन्होंने अपील की कि कोरोना महामारी के बहाने प्रत्येक समाज इसे जनआंदोलन बनाकर कुरीतियां खत्म करने की पहल करें।

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