Monday, 24 June, 2019
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शहीद मुकुट की मासूम बेटी को जिला कलक्टर ने लिखा मार्मिक पत्र

आरू बिटिया, बडी होकर तुम खूब पढ़ना, बढ़ना और पिता की शहादत को अपना नूर और गुरूर बनाना

न्यूजवेव @ झालावाड

जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों से मुठभेड़ में राष्ट्र के लिए बलिदान हुए शहीद मुकुट बिहारी मीणा का 14 जुलाई को खानपुर तहसील के लडानिया गांव में अंतिम संस्कार राष्ट्रभक्ति का अटूट संदेश दे गया। अंतिम संस्कार में पत्नी अनिता के साथ 5 माह की मासूम बेटी को देख हजारों लोगों की आंखों से आंसू बह निकले।

झालावाड़ जिला कलक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने अपनी भावनाओं को शब्दों में पिरोकर शहीद की बेटी ‘आरू’ के नाम यह मार्मिक पत्र लिखा-

प्यारी बिटिया आरू,
तुम्हें गोद में उठाए तुम्हारे मामा और परिवार के लोग जब आर्मी के एएसएल में बैठे और थोड़ी देर बाद तुम्हें तुम्हारे शहीद पिता की पार्थिव देहपेटी कॉफिन पर बिठाया तोपहले तुमने तिरंगे को छुआ और फिर बिना रोए कॉफिन पर ही लेट गई.तब मैं नहीं जान पाया कि तुम्हारा अबोध मन-मस्तिष्क तुम्हें क्या बोल रहा था।
हो सकता है कि थोड़ी देर पहले जब तुमने पिता के देह-दर्शन के दौरान चेहरा देखा होगा तो अपरिभाषित जुड़ाव के साथ कॉफिन पर लेट गई होंगी। वो जो कुछ भी था, बहुत ही मार्मिक था। मैं और आर्मी के सारे अफसर तुम्हें अपलक देख रहे थे…मुझे पता है कि सभी अलग-अलग तरीके से सोच रहे होंगे लेकिन सोच का केंद्र तुम्हारी मासूमियत और तुम्हारे शहीद पिता ही थ।
प्रिय आरू, जब तुम थोड़ी बड़ी हो जाओगी, समझोगी और खुुद को अभिव्यक्त कर पाओगी तो जानोगी कि तुम्हारे जन्मदाता झालावाड़ जिले में 100 घरों की आबादी वाले एक छोटे-से गाँव लड़ानिया के सपूत पैराट्रूपर शहीद मुकुट बिहारी मीना थे, जिन्होंने जम्मू कश्मीर में एक सर्च ऑपरेशन में देश के लिए अपनी जान न्यौछावर की थी।
शहीद मुकुट बिहारी मीना जो पिता जगन्नाथ, बड़े भाई शंभुदयाल, तीन बहनों कमलेश, सुगना और कालीबाई की आँखों के तारे, उम्मीद और हौसला थे और तुम्हारी माँ के लिए पूरा जीवन थे, केवल 25 साल के थे और अपनी शहादत से दो माह पहले तुम सबसे मिलकर रक्षाबंधन पर आने का वायदा करके गए थे मगर इस वायदे से कहीं गहरे में और मजबूत दृढ़ता के साथ जो उन्होंने देश के लिए कसम खाई थी, वो उसके लिए कुुर्बान हो गए और तिरंगे में लिपटकर घर आए थे।

आरू बिटिया, तुम बड़ी होकर जब उनके अंतिम संस्कार के फोटो और वीडियो देखोगी तो पता लगेगा कि वो अब पूरे देश के लिए किसी ना किसी संबोधन से जुड़ गए हैं। 14 जुलाई को हजारों लोग उनकी अंतिम यात्रा में थे। लोग तिरंगा उठाए, तिरंगे में लिपटे शहीद के पीछे ‘भारत माता की जय’ के नारों के साथ चल रहे थे।
मंत्री, सांसद, विधायक सहित अनेक जनप्रतिनिधि, पुलिस-प्रशासन, आर्मी, मीडिया और पूरे हाड़ौती से आए हुए नागरिक शहीद पिता को श्रद्धापुष्प अर्पित करने आए थे। जब पुष्पचक्र से शहीद वंदन हो रहा था, बिगुल बज रहे थे या सलामी फायर हो रहा था तब पूरा आसमान आपके पिता की शहादत के जिंदाबाद के नारों से गूँज रहा था। तुम्हारे पिता अनेक युवाओं के लिए सेना में जाने के लिए प्रेरणा बनेंगे।

बिटिया, ऐसा गौरव सबको नसीब नहीं होता
बिटिया आरू, जब बड़ी होकर तुम देश के शहीदों के बारे में पढ़ोगी, किसी सभा या कार्यक्रम में बोलोगी या शहीदों पर सुनोगी तो यकीन करना कि तुम्हारे चेहरे पर एक फख्र होगा और आँखों में एक गर्वित चमक। तुम अपने शहीद पिता की अंगुली पकड़कर तो बड़ी नहीं हा सकोगी मगर उनकी शहादत के किस्से तुम्हें रोज सुनने को मिला करेंगे। जब भी उनकी याद आए तो ध्यान रखना कि कुछ अभाव चुभते हैं मगर तुम्हारे पिता की तरह देश के लिए कुर्बान होने का गौरव सबका नसीब नहीं होता।

शहीद अमर होते हैं। तुम्हारे पिता के कॉफिन को कंधा देते हुए जब मैं चल रहा था और ‘वन्देमातरम’ तथा ‘भारत माता की जय’ के नारे लग रहे थे तो रोंगटे खड़े गए थे। तुम्हारे दादा ने मुखाग्नि देने से पहले अग्निदंडिका को जब तुम्हारे हाथों से छुआकर मुखाग्नि दी थी तो सारी आँखें नम थी।

आरू, तुम्हारे साथ पूरे क्षेत्र ही नहीं देश के हर जिम्मेदार संवेदनशील नागरिक की दुआएं और आशीर्वाद है। तुम खूब पढ़ना, बढ़ना और अपने पिता की गौरवमयी शहादत को अपना नूर और गुरूर बनाना।

आशीर्वाद और अशेष शुभकामनाएं!

जितेंद्र
जिला कलक्टर, झालावाड़

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