Sunday, 8 December, 2019
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देश में प्रतिवर्ष 1.50 लाख कॉर्निया की जरूरत

नेत्रदान जागरूकता पखवाड़ा – 100 से अधिक लॉ स्टूडेंट्स व टीचर्स ने किया नेत्रदान संकल्प

न्यूजवेव @कोटा

आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान कोटा चेप्टर द्वारा नेत्रदान जागरूकता कार्यक्रम एक्सीलेन्ट लॉ कॉलेज परिसर,, कोटा में आयोजित किया गया। जिसमें 100 से अधिक एलएलबी स्टूडेंट्स एवं स्टाफ सदस्यों ने स्वैच्छिक नेत्रदान करने का संकल्प लिया। आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान कोटा चेप्टर के अध्यक्ष डॉ. के.के. कंजोलिया ने कहा कि कि कॉर्निया आंख की पारदर्शी आवरण है, जिसके धुंधलापन होने के कारण रोशनी प्रभावित होती है। आज भारत में करीब 1.25 करोड़ लोग दृष्टिहीन है, जिसमेें से करीब 30 लाख व्यक्ति नेत्ररोपण द्वारा दृष्टि पा सकते है। दो वर्ष से लेकर 80 वर्ष तक के व्यक्ति नेत्रदान कर सकते है। एड्स, रेबीज, हेपेटाईटिस-बी व सी, सेपटेसिमिया, एनकीफेलाईटिस, टिटनेस, ब्ल्यूकेमिया आदि रोगों से पीड़ित व्यक्तियों की आंखें नेत्रदान के लिए उपयुक्त नहीं होती हैं। कार्यक्रम में एक्सीलेन्ट कॉलेज के हनुमान सिंह तँवर, प्रिंसिपल प्रियंका सैनी, ओम कोठारी इंस्टीट्यूट के डॉ. अमित राठौड मौजूद रहे।

वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. महेश पंजाबी ने कहा कि नेत्रदान केवल मृत्यु के बाद 6 घंटे के भीतर किया जा सकता है। कॉर्नियल अल्सर आदि बीमारियों का समय रहते उचित इलाज कराकर कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से बचा जा सके। नेत्रदान के द्वारा आँख का कॉर्निया ट्रांसप्लांट किया जाता है।

कोटा डिवीजन नेत्र सोसायटी के अध्यक्ष एवं ईबीएसआर कोटा के कॉर्डिनेटर एवं वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. सुरेश पाण्डेय ने कहा कि नेत्रदान की परंपरा धर्म के विरूद्ध नहीं है। उन्होंने प्रेजेन्टेशन द्वारा आंखों के कॉर्निया प्रत्यारोपण केरोटोप्लास्टी की तकनीक समझायी।

नेत्र विशेषज्ञों ने बताया कि देश में कुल अंधता का लगभग 1 प्रतिशत कॉर्नियल ब्लाइंडनेस के कारण है। लगभग 1,20 लाख लोगों के दोनों आँखों का कॉर्निया अंधता की स्थिति तक खराब है और लगभग 10 लाख लोगों के दोनों आँखों का कॉर्निया प्रभावित है, जिसके कारण उन्हें कम दिखता है। लगभग 68 लाख लोगों का एक कॉर्निया प्रभावित है। हर साल लगभग 25-30 हजार लोग कॉर्निया खराब होने के कारण अंधता से ग्रसित हो रहे है। इन सब में से लगभग 50 प्रतिशत लोग कॉर्नियल ट्रांसप्लांट द्वारा रोशनी वापस प्राप्त कर सकते है।

प्रतिवर्ष कम से कम 1,50 लाख कॉर्निया की आवश्यकता है, परन्तु प्रतिवर्ष 40-45 हजार के लगभग ही नेत्रदान हो पाते है। उन्होंने बताया कि सारे दृष्टिहीन नेत्ररोपण द्वारा दृष्टि नहीं पा सकते है, क्योंकि इसके लिए पुतलियों के अलावा नेत्र संबंधित तंतुओं का स्वस्थ होना जरूरी है। आंख की कॉर्निया नामक पारदर्शी पुतली तभी किसी दृष्टिहीन को लगायी जा सकती है जबकि कोई इन्हें दान में दें।

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