Monday, 16 September, 2019
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80 वर्ष तक कर सकते है नेत्रदान

आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान कोटा चेप्टर के जागरूकता कार्यक्रम में वीएमओयू के 100 स्टाफ सदस्यों नेत्रदान संकल्प लिया

न्यूजवेव @ कोटा

आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान के कोटा चेप्टर द्वारा सोमवार को वर्धमान महावीर ओपन यूनिवर्सिटी नेत्रदान जागरूकता कार्यक्रम के तहत 100 स्टाफ सदस्यों ने नेत्रदान का संकल्प लिया।


आई बैंक सोसायटी कोटा के अध्यक्ष डॉ.के.के.कंजोलिया ने बताया कि कॉर्निया आंख की पारदर्शी आवरण है, जिसके धुंधलापन होने के कारण रोशनी प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि भारत में करीब 1.25 करोड़ लोग दृष्टिहीन है, जिसमेें से करीब 30 लाख व्यक्ति नेत्ररोपण द्वारा दृष्टि पा सकते है। उन्होंने बताया कि दो वर्ष से लेकर 80 वर्ष तक के व्यक्ति नेत्रदान कर सकते है।
वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. महेश पंजाबी ने बताया कि नेत्रदान केवल मृत्यु के बाद 6 घंटे के भीतर किया जा सकता है। कॉर्नियल अल्सर आदि बीमारियों का समय रहते उचित इलाज कराकर कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से बचा जा सके। नेत्रदान के द्वारा आँख का कॉर्निया ट्रांसप्लांट किया जाता है। कोटा डिवीजन नेत्र सोसायटी के अध्यक्ष एवं ईबीएसआर कोटा के कॉर्डिनेटर एवं वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. सुरेश पाण्डेय ने कहा कि नेत्रदान धर्म विरूद्ध नहीं है। उन्होंने आंखों के कॉर्निया प्रत्यारोपण केरोटोप्लास्टी की तकनीक बताई।

कॉर्नियल ट्रांसप्लांट द्वारा रोशनी


उन्होंने बताया कि देश में प्रतिवर्ष 25-30 हजार लोग कॉर्निया खराब होने के कारण अंधता की चपेट में आ रहे है। इनमें से लगभग 50 प्रतिशत को कॉर्नियल ट्रांसप्लांट द्वारा रोशनी लौटाई जा सकती है। लेकिन देश में 1,50 लाख कॉर्निया की आवश्यकता होने के बावजूद 40-45 हजार ही नेत्रदान हो पाते है। कार्यक्रम में नेत्र सर्जन डॉ. के के कंजोलिया, डॉ महेश पंजाबी, डॉ. सुरेश पाण्डेय, वीएमओयू के प्रो.पी. के. शर्मा, डॉ. आर.एल.गोदारा, गजेन्द्र कुमार गौड़, विजेन्द्र गौड़, चन्द्रसिंह आमेरा एवं नीरजा श्रीवास्तव ने भाग लिया। संचालन रेनू श्रीवास्तव ने किया।

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