Thursday, 13 August, 2020

स्कूलों में कक्षा-6 से ही बच्चे सीखेंगे कोडिंग

नई शिक्षा नीति का आगाज- स्कूल से कॉलेज स्तर तक दिखेंगे बडे़ बदलाव, किताबी ज्ञान से अधिक एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग पर रहेगा जोर
न्यूजवेव @ नईदिल्ली
नरेंद्र मोदी सरकार ने भारत के नवनिर्माण को फोकस करते हुये देश में नई शिक्षा नीति (NEP) लागू करने की घोषणा की दी। एमएचआरडी मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने केबिनेट की मंजूरी के बाद बुधवार को इसे जारी करते हुये बताया कि स्कूल व उच्च शिक्षा स्तर पर नई शिक्षा प्रणाली स्कूली व कॉलेज विद्यार्थियों में क्रांतिकारी बदलाव लायेगी।

नई शिक्षा नीति के तहत स्कूल स्तर पर एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग को बढावा दिया जायेगा। कक्षा-6 से ही स्टूडेंट्स को कम्यूटर कोडिंग सिखाई जायेगी, जिससे उनमें गणितीय दक्षता बढ सके। कक्षा-6 से ही स्टूडेंट्स को स्कूलों में वोकेशनल ट्रेनिंग भी दी जायेगी, जिसमें वे किसी दक्ष ट्रेनर से स्किल सीखेंगे।
स्कूल शिक्षा सचिव अनिता कारवाल ने बताया कि स्कूली बच्चों को कक्षा-6 से कोडिंग एक सब्जेक्ट के रूप में पढाई जायेगी, जिससे वे 21वीं सदी के स्किल को सीख सकें। कोडिंग जैसे सब्जेक्ट में बच्चे गेम्स तैयार करना तथा एंड्रायड, विंडोज या आईओएस जैसे डिजीटल प्लेटफॉर्म पर एप्लीकेशन तैयार करना सीखेगें। कम्प्यूटर व मोबाइल फ्रेंडली होने से छोटी उम्र के बच्चों मे कोडिंग के प्रति रूचि जागृत होगी। अभी कोडिंग इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढाई जाती है। क्लास-6 से ही उन्हें इसे सीखने का मौका मिलेगा तो वे स्किल के अनुसार कॅरिअर तेजी से आगे बढेंगे।

स्कूलों में कक्षा-5 तक स्थानीय मातृभाषा को भी शामिल किया जायेगा। बच्चों के प्रोग्रेस कार्ड 360 डिग्री हॉलिस्टिक एप्रोच से तैयार होंगे। उनमें अंकों के स्थान पर क्रेेडिट सिस्टम को महत्व दिया जायेगा।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति तैयार करने के लिये गत वर्ष इसरो के पूर्व चेयरमैन डॉ.के.कस्तूरीरंजन की अध्यक्षता में एक ड्रॉफ्ट कमेटी गठित की थी। कमेटी की सिफारिशों के आधार पर शिक्षा प्रणाली में बडे़ बदलाव किये गये हैं। 1986 में बनाई गई शिक्षा नीति में 34 वर्षों से कोई बडे़ बदलाव नहीं किये गये थे। नई नीति के अनुसार, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया जायेगा।
वर्ष में दो बार होंगी बोर्ड परीक्षायें

स्कूलों में बोर्ड परीक्षाओं का तनाव करने के लिये ये परीक्षायें वर्ष में दो बार आयोजित की जायंेगी। स्टूडेंट्स के रिपोर्ट कार्ड व्यक्तिगत परफॉर्मेंंस, पीयर ग्रुप व शिक्षक के रिव्यू के आधार पर तैयार किया जायेगा। स्कूल व कॉलेजों में डिजिटल लाइब्रेरी भी शुरू की जायेंगी।
कॉलेज में ड्रॉपआउट को फिर से मौका

नई एजुकेशन पॉलिसी में किसी भी डिग्री कोर्स में अध्ययनरत स्टूडेंट सेकंड ईयर या फाइनल ईयर में ड्रॉपआउट करता है तो उसे फिर से नया एडमिशन नहीं लेना होगा। डिग्री कोर्स में क्रेेडिट सिस्टम लागू किया जायेगा। जिसमें एक स्टूडेंट निश्चित अंतराल में क्रेेडिट बैंक में स्कोर अर्जित करेगा। 

अब फॉरेन यूनिवर्सिटी भी खुलेंगी
फॉरेन यूनिवर्सिटी को भारत में विभिन्न डिग्री कोर्सेस के कॉलेज खोलने की अनुमति दी जायेगी। राज्यों में प्रत्येक जिला स्तर पर एक उच्च शिक्षा संस्थान खोला जायेगा। यूनिवर्सिटी के विभिन्न कोर्सेस में एडमिशन के लिये नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा कॉमन एंटेªंस एग्जाम आयोजित किये जायेंगे।

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