Friday, 24 May, 2019
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बाघिन टी-106 बनेगी मुकंदरा हिल्स की शान

  • नया बसेरा: वन्यजीव विभाग ने रणथम्भौर में बाघिन टी-106 को किया टैंक्यूलाइज
  • 18 दिसम्बर को रात 12:30 बजे मुकुन्दरा टाइगर रिजर्व में छोड़ा।

न्यूजवेव @ कोटा

कोटा से 40 किमी दूर मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में इकलौते टाइगर एमटी-1 का साथ निभाने के लिए रणथम्भौर अभयारण्य से टाइगर-39 की बेटी टी-106 ने 18 दिसम्बर रात 12:30 बजे मुकंदरा की धरा पर दस्तक दे दी। 25 माह की बाघिन का वजन 130 किग्रा है।

Tiger T-106

मुकुन्दरा हिल्स की हरियाली से आच्छादित वादियां, घने पहाड़, घाटियां, प्राकृतिक झरने, पोखर, तालाब एमटी-1 को बसेरा बसाने के लिए मानो आमंत्रण दे रहे हैं।

याद दिला दें कि वर्ष की शुरूआत में कालंदा वनक्षेत्र में बाघ टी-91 ने पदचाप से अपनी दस्तक दी थी। जिसे 3 अप्रेल,2018 को एमटी-1 नाम देकर मुकंदरा हिल्स के संरक्षित क्षेत्र में खुले विचरण के लिए छोडा गया। इस टेरिटेरी में 8 माह तक वह निरंतर घूमता रहा लेकिन रिजर्व में एक भी बाघिन नहीं मिलने से परिवार अधूरा रहा।

इस बीच कानूनी बाधाएं हट जाने के बाद दिसंबर माह में दो बाघिनों को इस क्षेत्र में लाने की मुहित तेज हो गई। चंबल किनारे कोटा थर्मल पॉवर स्टेशन के परिसर में नर व मादा पैंथर व 3 बच्चे देखे जाने के बाद उनकी निरंतर निगरानी की जा रही हैं।

375 से अधिक चीतल आए
वनविभाग ने संजय वन शाहपुरा से 22 चीतल लाकर मुकंदरा हिल्स के घने जंगल में छोड़ दिए। पिछले एक वर्ष से विभिन्न स्थानों से चीतल लाकर मुकंदरा क्षेत्र में छोडे़ जा रहे हैं। इनकी सख्या बढ़कर 375 से अधिक हो गई है। टाइगर के लिए शिकार हेतु प्री-बैस तैयार किया जा रहा है।

2018 में बसा बाघों का नया बसेरा


मुकंदरा हिल्स को 9 अप्रैल,2011 में मुकंदरा टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। कोटा एयरपोर्ट से महज 40 किमी दूर यह नया अभयारण्य राज्य के चार जिलों कोटा, बूंदी, झालावाड़ व चित्तौड़गढ़ में लगभग 760 वर्ग किलोमीटर मेें फैला हुआ है। इसमें लगभग 417 वर्गकिमी में कोर एरिया तथा 343 वर्गकिमी में बफर जोन होगा, जिसमें मुकुंदरा नेशनल पार्क, दरा अभयारण्य, जवाहर सागर सेंचुरी तथा चंबल घडियाल सेंचुरी का कुछ भाग भी शामिल रहेगा।

जानकारों ने बताया कि 1962 तक इस क्षेत्र में शेर दिखाई देते थे। 1980 के दशक में यहां बाघों की दहाड़ सुनाई देती थी। 2003 में भी एक बाघ ने यहां विचरण किया। 2018 में एक बाघ व एक बाघिन के आगमन से अब बाघों की गूंज सुनाई देगी।

टाइगर की क्रॉसबीड के लिए अनुकूल


वन्यजीव पर्ययावरण समिति के अध्यक्ष तपेश्वर सिंह के अनुसार, मुकंदरा रिजर्व का क्षेत्रफल सरिस्का सेंचुरी से ज्यादा है। रणथम्भौर सेंचुरी में इस समय 62 से अधिक टाइगर होने से वहां के नर बाघ समीपवर्ती मुंकदरा रिजर्व में आकर अन्य मादा बाघ से क्रॉसबीड कर सकेंगे, जिससे निकट भविष्य में यहां टाइगर की हाईब्रिड देखी जा सकती है। जलवायु की बात करें तो मुकंदरा टाइगर रिजर्व एवं नेशनल पार्क का नजारा बरसात में देखने लायक होता है। यहां 885.6 मिमी औसत वर्षा होती है।

जल बिरादरी के प्रदेश उपाध्यक्ष बृजेश विजयवर्गीय ने बताया कि उंची पहाड़ियों के बीच खूबसूरत घना वन क्षेत्र, नदी व घाटियां है। इस हरे-भरे क्षेत्र में पलाश,अमलताश, नीम, जामुन, इमली, अर्जुन, तेंदू, बरगद, पीपल, महुआ, बेल, कदम, सेतल व आंवले के वृक्षों के साथ सघन जंगल है।

यही वजह है कि चंबल किनारे बाघ, पैंथर, भालू, सांभर, चीतल, जरख (हाइना), भेड़िया, लोमड़ी, नीलगाय, काले हिरण, वनविलाव, खरगोश,दुर्लभ स्याहगोह, निशाचर सिविट केट और रेटल जैसे दुर्लभ वन्यजीव यहां देखने को मिलते हैं।

वन्य अधिकारियों के अनुसार, मुकंदरा क्षेत्र में लगभग 1000 चीतल, 60 भालू, 60 से 70 पैंथर, 60 नील गायों सहित बाघ प्रजाति के 6 बघेरा (लेपर्ड) भी हैं। बडी संख्या में छोटे वन्यजीव विचरण करते हैं।

225 पक्षियों की दुर्लभ प्रजातियां
पक्षी विशेषज्ञों ने बताया कि इस प्रकृति की गोद में बसे इस क्षेत्र में लगभग 225 तरह के पक्षियों की दुर्लभ प्रजातियां पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण हैं। इनमें दुर्लभ सफेद पीठ व लम्बी चोंच वाले गिद्ध, केस्टेड सस्पेंट, ईमल, शॉट टोड ईगल, सारस क्रेेन, पैराडाइज प्लाई केचर, स्टोक बिल किंगफिशर, कर्ड स्कोप्स उल्लू सहित बड़ी संख्या में राष्ट्रीय पक्षी मोर, कोयलों की गूंज पर्यटकों का मन मोह लेती है।

चार जिलों में फैला है टाइगर रिजर्व

760 वर्गकिमी में फैला
342.82 वर्गकिमी बफर एरिया
417.17 किमी कोर एरिया
नेशनल कोरिडोर – 1305 वर्गकिमी (वनभूमि- 958 वर्गकिमी, राजस्व भूमि-347 किमी)
नेशनल पार्क- 205 वर्गकिमी
कोरिडोर रेेंज- सवाईमानसिंह सेंचुरी, रणथम्भौर-आमली-इंद्रगढ़-लाखेरी-तलवास-रामगढ़ सेंचुरी से जवाहर सागर सेंचुरी तक
पार्ट-1: सवाईमाधोपुर से रामगढ़ सेंचुरी (बूंदी) व आमली तक
पार्ट-2: रामगढ़ सेंचुरी से जवाहर सागर सेंचुरी तक।
कुल फॉरेस्ट ब्लॉक- 51 (बूंदी-36, सवाईमाधोपुर-8, भीलवाड़ा- 6, टोंक-1)
जुडे़गा पर्यटन- रामगढ़ विषधारी, बूंदी, शेरगढ़ सेंचुरी, बारां, मुकंदरा नेशनल पार्क, दरा, राष्ट्रीय घडियाल सेंचुरी, कोटा व जवाहर सागर सेंचुरी, चित्तौडगढ़।
बढे़गी इकोनॉमी- होटल, रेस्तरां, ट्रांसपोर्ट, एयर सर्विस, आर्ट, हस्तशिल्प व अन्य परिवहन सेवाएं।

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