Wednesday, 11 September, 2019
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मच्छरों के लार्वा खत्म करेगी थर्मल की फ्लाई एश

न्यूजवेव कोटा

पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बरसात के कारण कई आवासीय कॉलोनियों व बस्तियों के गढ्डों में पानी जमा होने से मौसमी बीमारियां बढ़ गई है। खाली भूखंडों में पानी भर जाने से मच्छरों का लार्वा पैदा हो रहा है, जिससे नागरिक वायरल, मलेरिया, डेंगू व स्क्रब टाइफस जैसी मौसमी बीमारियां की शिकायतें लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। हाल ही में वैज्ञानिकों ने रिसर्च में बताया कि थर्मल बिजलीघरों से निकलने वाली राख (फ्लाई एश) को स्थानीय निकायों द्वारा इन गड्डों में भर दिया जाये तो समूचे क्षेत्र को मच्छरों से बचाया जा सकता है।
अधीक्षण अभियंता आर.एन.गुप्ता ने यह जानकारी देते हुये बताया कि इंडियन काउंसलिंग ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के वेक्टर कंट्रोल रिसर्च सेंटर (VCRC) में कार्यरत वैज्ञानिकों ने फ्लाई एश पर नया रिसर्च किया है। उनका कहना है कि फ्लाई एश में सिलिका, एलुमिना व आयरन तत्व होने से यह पानी में क्षारीयता बढाती है, जिससे लार्वा पैदा होने की संभावना नगण्य हो जाती है। जबकि वर्षा जल में अशुद्धियां मिलने के बाद अम्लीयता बढ़ने से भूजल दूषित हो जाता है। जिसके कारण ठहरे हुये पानी में मच्छरों के लार्वा तेजी से पनपने लगते हैं। इन मच्छरों के काटने से मलेरिया, डेंगू, पीलिया जैसी बीमारियां तेजी से फैलती है। राख के उपयोग से इस स्थिति पर नियंत्रण किया जा सकता है।
बायो-पेस्टिसाइड के रूप में फ्लाई एश
शोधकर्ताओं ने बताया कि फ्लाई एश का उपयोग बीटीआई बायो पेस्टिसाइड के रूप में किया जा सकता है। इससे मच्छरों व कीटाणुओं के लार्वा को खत्म कर सकते हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि इस समय देशभर में 63 प्रतिशत फ्लाई एश सीमेंट उद्योगों व कांक्रीट बनाने में निःशुल्क काम में ली जा रही है, इसके अन्य क्षेत्रों में भी उपयोग होने लगे हैं।
जलमग्न क्षेत्रों में उपयोगी
विशेषज्ञों का कहना है कि चंूकि कोटा थर्मल के नांता स्थित राख संग्रहण क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में फ्लाई एश उपलब्ध है। जिला प्रशासन तथा नगर निगम द्वारा कार्ययोजना बनाकर कैथून, अनंतपुरा तालाब की बस्तियों व कोटा बैराज की निचली जलमग्न बस्तियों के गड्डों तथा खाली भूखंडों में फ्लाई एश भर दी जाये तो आवासीय बस्तियों को मच्छरों के लार्वा से बचा सकते हैं। पानी के साथ मिलते ही फ्लाई एश गढ्डों में जमा हो जाती है, जिससे लोगों को कीचड़ या दूषित पानी से निजात मिल सकेगा तथा महामारी फैलने जैसी स्थितियां पैदा नहीं होगी।

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