Sunday, 27 September, 2020

कानपुर के शुभम को कोटा आकर मिली रोशनी

चोटिल आंख में पेनऑप्टिक्स ट्राईफोकल टोरिक लैंस का सफल प्रत्यारोपण
न्यूजवेव @ कोटा
कानपुर के 22 वर्षीय शुभम अग्रहरी को एक वर्ष पहले बायीं आंख में चोट लगने से धीरे-धीरे उसे दिखना बंद हो गया था। उसने दिसम्बर 2019 में चोटिल पारदर्शी पुतली (कोर्निया) का ऑपरेशन करवाया था। लेकिन बाद में उसकी बायीं आंख में मोतियाबिन्द बढ़ने से नेत्रज्योति कमजोर हो गई थी।
रोगी के के परिजनों ने चोटिल आंख में मोतियाबिन्द ऑपरेशन एवं लैंस प्रत्यारोपण के बारे में यूट्यूब पर सर्च किया। इसके बाद वे बेटे की चोटग्रस्त आंख का इलाज करवाने के लिये कानुपर से प्रशासनिक स्वीकृति लेकर सड़क मार्ग से कोटा के सुवि नेत्र चिकित्सालय एवं लेसिक लेजर सेन्टर पहुंचे। यहां वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. विदुषी पाण्डेय ने रोगी की आंखों की विस्तार से जाँच (बी-स्केन अल्ट्रासाउंड, स्पेकुलर माइक्रोस्कोपी, लैन्स पावर केलकुलेशन) करते हुए चोटिल बायीं आंख का मोतियाबिन्द ऑपरेशन करवाने की सलाह दी।
बेटे की उम्र कम होने से उसके परिजनों ने विशेष लैन्स प्रत्यारोपित करवाने का निर्णय लिया, जिससे वह चश्में पर निर्भर नही रहे। उसकी पारदर्शी पुतली में पेरासेन्ट्रल टीयर के कारण 1.5 नम्बर का कॉर्नियल एस्टीगमेटिज्म था। ऐसी स्थिति में अल्कोन निर्मित अमेरिकन पेनऑपटिक्स ट्राईफोकल टोरिक आई.ओ.एल. लैन्स प्रत्यारोपित करना उपयोगी रहा। मंगलवार को सुवि नेत्र संस्थान में को शुभम की बायीं आंख में 16.50 डायोप्टर का पेनऑपटिक्स ट्राईफोकल टोरिक लैन्स का सफल प्रत्यारोपण डॉ. सुरेश पाण्डेय द्वारा किया गया।
मोतियाबिन्द को पोस्टीरियर केप्सुल पॉलिशिंग नामक तकनीक से बड़ी सजगता से हटाया गया। इस ऑपरेशन के पश्चात् शुभम के आंखों की पास व दूर की रोशनी पूरी तरह से लौट आयी है। चोटिल आंख में इंफेक्शन एवं सूजन रोकने के लिए इन्ट्राकेमरल मोक्सीफ्लोक्सासिन एवं इन्ट्राकेमरल ट्राईएमसिनोलोन नामक इंजेक्शन का उपयोग किया गया। शुभम व उसके परिजनों ने कानपुर लोटने से पहले डॉ. सुरेश पाण्डेय एव टीम का आभार जताया। डॉ. सुरेश पाण्डेय ने इस दुर्लभ एवं चुनौतीपूर्ण मोतियाबिन्द ऑपरेशन को यूट्यूब के माध्यम से भी देशभर के चिकित्सकों से साझा किया गया, जिसको कई प्रमुख नेत्र चिकित्सकों ने सराहा।
कारगर है पेनऑप्टिक्स ट्राईफोकल टोरिक लैंस

पेनऑप्टिक्स ट्राईफोकल टोरिक लैंस एक विशेष लैन्स है जिसके प्रत्यारोपण के बाद पास, दूर एवं इन्टमीडिएट तीनों दूरियों पर साफ दिखाई देता है। ऐसे रोगियों के लिए यह लैंस बहुत उपयोगी है जिन्हें मोतियाबिन्द के साथ-साथ कॉर्नियल एस्टीगमेटिज्म (पारदर्शी पुतली का तिरछा नम्बर) होता है। इस लैंस प्रत्यारोपण के बाद 98 प्रतिशत रोगियों में चश्में की आवश्यकता नही रही। लैन्स प्रत्यारोपण से पहले लैंस का पावर आईओएल मास्टर अथवा इमल्सर्न बायोमेटी द्वारा निकालना आवश्यक होता है। इस लैंस में 3 फोकल प्वाइंट होते है, नियर फोकल प्वाइंट 40 सेमी, इंटरमीडिएट फोकल प्वाइंट 60 सेमी एवं डिस्टेंस फोकल प्वाइंट इनफीनाईट डिस्टेंस का होता है। पेनऑपटिक्स ट्राइफोकल लैंन्स के सेन्टर में 4.5 मिमी का डिफ्रेक्टिव जोन होता है, जो लाईटिंग कण्डीशन पर निर्भरता कम करता है। अतएव कम लाईट की कण्डीशन में भी स्पष्ट दिखाई देने में भी मदद मिलती है। यह लैंस हाइड्रोफोबिक एक्रीलिक नामक पदार्थ से बना होता है, जिससे दोबारा झिल्ली मोटी होने की संभावना नगण्य होती है। पेनऑप्टिक्स ट्राईफोकल लैंस प्रत्यारोपण से पहलें आंखों की विस्तार से जांच की जाती है जिसमें से कॉर्नियल टोपोग्राफी, आई.ओ.एल. मास्टर, लैंस के सटीक नम्बर निकालने के लिए एवं पर्दे के जांच ऑप्टीकल कोहरेन्स टोमोग्राफी एवं बी-स्केन अल्ट्रासोनोग्राफी मुख्य मुख्य कोर्निया की एण्डोथीलियम सेल काउन्ट स्पेकुलर माइक्रोस्कोप द्वारा की जाती है।

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