Wednesday, 28 October, 2020

कोरोना काल : भविष्य का रोडमैप कैसा हो?

उम्मीदें: जनसंख्या, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संतुलन के साथ नई टेक्नोलॉजी भारत के नवनिर्माण को तेजी से आगे बढा सकती है।

डॉ.कुमार गौतम, फाउंडर प्रेसीडेंट व सीईओ,
क्वांटम रिसर्च एंड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, नईदिल्ली

कोरोना वैश्विक महामारी ने पिछले छह माह में दुनिया को हिलाकर रख दिया। अब तक लगभग 6.4 मिलियन लोग इससे प्रभावित हुये हैं। स्पिल ओवर के रूप में इसने बहुआयामी प्रभाव दिखाया। खाद्य आपूर्ति संकट, गरीबी, वैश्विक आर्थिक मंदी और आपूर्ति में असमानता आदि से जनजीवन प्रभावित हुआ। दिल झकझोरने वाली बात यह कि यह वायरस कई देशों की अर्थव्यवस्था को नाजुक बनाकर वैश्विक अराजकता पैदा कर रहा है।

WHO और दुनिया के सभी देशों ने इस जंग सेे लड़ने के लिए हाथ मिलाया है। दुनिया के शोधकर्ता इस बीमारी के खिलाफ वैक्सीन की खोज में व्यस्त हैं। चिकित्सा विभाग में डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ, पैरा मेडिकल स्टाफ, आशा सहयोगिनी आदि कोरोना पॉजिटिव का इलाज करने में दिन-रात सेवायें दे रहे हैं। इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिये कई वैज्ञानिक दवाओं पर रिसर्च कर रहे हैं।
प्रायः सभी देशों ने लॉकडाउन लागू कर सोशल डिस्टेसिंग, सेनेटाइजेशन व मास्क पहनने की शुरूआत कर इस महामारी को तेजी से फैलने से रोका है। भारत मंे 135 करोड की आबादी के बावजूद कोरोना पॉजिटिव की रिकवरी रेट सर्वाधिक रही। जबकि इससे मत्युदर काफी कम रही।

जागरूकता एक ‘सोशल वेक्सीन’ है

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि कोविड-19 से जूझने के लिए जागरूकता, सोशल डिस्टेंसिंग, शारीरिक व मानसिक संतुलन और व्यवहार-शिष्टाचार भी ’सामाजिक टीका’ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनता से अपील कर चुके हैं कि देश के उज्ज्वल भविष्य, समृद्ध और स्वस्थ भारत के लिए ‘जान भी जहाँ भी’ दोनों पहलुओं पर एक समान ध्यान देना होगा। स्पष्ट है कि लॉकडाउन एकमात्र विकल्प था, इसके कुछ नुकसान भी थे, जिससे उद्योगों और आर्थिक क्षेत्रों को बंद करने से आर्थिक संकट पैदा हुआ। भारत में सरकार ने विभिन्न योजनाओं की घोषणाओं कर हालात को काबू में रखने के प्रयास किये हैं।

दुनिया में अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी सार्वजनिक और प्राइवेट सेक्टर दोनों में अहम भूमिका निभाती है। स्वास्थ्य, शहरी सुधार, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन आदि विभिन्न क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी बेस्ड सॉल्यूशन कारगर साबित हुये हैं। कोरोनावायरस महामारी को ही लें, तो वर्चुअल तकनीक, एआई और क्लाउड आधारित टेक्नोलॉजी, ई-लर्निंग, टेलीमेडिसिन आदि के उपयोग से हम बडी संख्या में स्वस्थ व जागरूक बनाने में सफल रहे। कोविड-19 महामारी के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के अनुप्रयोगों पर तेजी से काम हो रहा है। इसके जरिये पॉजिटिव रोगियों की देखभाल के साथ ही संदिग्ध का पड़ताल करने में भी मदद मिल रही है।

एआई, मशीन लर्निंग व क्लाउड कम्प्यूटिंग जैसी तकनीक मेडिकल साइंस और वेक्सीन की खोज में शोधकर्ताओं की सहायता कर रही है। लोगों को संक्रामक वायरस से से दूर रखना और हॉटस्पॉट्स को चिन्हित करना प्राथमिकता रही है। ब्रांटलैंड रिपोर्ट,1987 और पहली पृथ्वी शिखर बैठक,1992 के बाद से हम रिसर्च में निरंतरता बनाये रखने की बात कर रहे वैश्विक पर्यावरण के निरंतर दूषित होने से संक्रामक वायरस तेजी से फैलने में मदद मिली। कोविड-19 से पहले तक दुनिया के अधिकांश देश बढ़ती पर्यावरणीय समस्याओं और बदलती वैश्विक आर्थिक नीतियों पर केंद्रित थे। लेकिन कोरोना वैश्विक महामारी ने स्वास्थ्य में बढती जोखिमों की ओर ध्यान आकर्षित किया है।

आर्थिक तंत्र चरमराया

कोविड-19 के कारण दुनिया की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। आंकडों पर गौर करें तो इस वर्ष औद्योगिक क्षेत्र में 4 से 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। जो 2021 में 1 फीसदी और गिर सकती है। अर्थात् 2019 के मुकाबले औद्योगिक गिरावट में 9 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। एक स्टडी के अनुसार, यदि कोविड-19 महामारी की रिकवरी के लिये आर्थिक पैकेज ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि 2030 को ध्यान में रखते हुये औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने के लिये कार्बन उत्सर्जन पर प्रभावी योजनायें लागू करनी होगी। जीरो उत्सर्जन तकनीक में प्रत्यक्ष निवेश की राह खोली जाये। रिन्यूएबल एनर्जी के साथ उर्जा उत्पादन व बिजली आपूर्ति बढ़ाने के लिये सशक्त कदम उठाने होंगे।

उर्जा क्षेत्र में बडे़ स्तर के आधारभूत प्रोजेक्ट जैसे- स्मार्ट ग्रिड, इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग, डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे प्रयोग भविष्य के उर्जा तंत्र को मजबूत बना सकते हैं। सरकारों को इकोनॉमी रिकवरी पैकेज घोषित कर तेल कुओं, खनिज तेल संयंत्रों सहित संकट से जूझ रहे छोटे व मध्यम उद्योगों को आर्थिक सहायता करनी होगी, जिससे रोजगार का संकट और अधिक गहरा न हो। भारत प्राकृतिक संसाधन व स्त्रोतों में समृद्ध है, प्रकृति हर आपदा की भरपाई स्वयं करती है, इसलिये हमें संयम, संकल्प और सावधानियों के साथ एकजुट होकर इस महामारी का सामना करना होगा।

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