Thursday, 4 March, 2021

चतुर्थ नेशनल धनिया सेमिनार 28 फरवरी को कोटा में

धनिया महाकुंभ: विभिन्न राज्यों के कृषि वैज्ञानिक, निर्यातक, व्यवसायी एवं विशेषज्ञ धनिया उत्पादन पर करेंगे पैनल चर्चा
न्यूजवेव @ कोटा

खाद्य पदार्थ कन्वेसिंग एजेन्ट्स एसोसिएशन के तत्वावधान में चतुर्थ नेशनल धनिया सेमिनार 28 फरवरी को कोटा में बूंदी रोड़ पर हरियाली रिसोर्ट परिसर में आयोजित की जायेगी। इस नेशनल सेमिनार का उद्घाटन मुख्य अतिथी लोकसभा अध्यक्ष व कोटा-बूंदी के सांसद ओम बिरला करेंगे। कृषि विश्वविद्यालय कोटा के कुलपति प्रो.वी.सी. जोशी तथा कृषि एवं बागवानी मिशन कोटा के संयुक्त निदेशक रामवतार शर्मा विशिष्ट अतिथी होंगे। राजस्थान, मप्र व गुजरात से प्रमुख कृषि अधिकारी भी सेमिनार में भाग लेंगे।
एसोसिएशन के संरक्षक राधेश्याम विजयवर्गीय, अध्यक्ष कैलाशचंद दलाल एवं सचिव रतनलाल गोचर ने बताया कि विभिन्न राज्यों के धनिया व्यापारी, मसाला उत्पादक एवं निर्यातकों के प्रतिनिधी नेशनल सेमिनार में भाग लेने कोटा आयेंगे। इस महाकुंभ में कृषि वैज्ञानिक, विशेषज्ञ एवं निर्यातक मृदा, मौसम एवं जलवायु के अनुसार धनिये की पैदावार, मांग-आपूर्ति एवं क्वालिटी पर सार्थक चर्चा एवं प्रत्यक्ष संवाद करेंगे। विभिन्न राज्यों के धनिया विशेषज्ञ एवं मसाला उद्योग से जुडे से उद्यमी पैनल चर्चा में फसल का अनुमान, गुणवत्ता, किसानो से सम्पर्क, भविष्य की योजना एवम् परिशोधन की नई तकनीकों की नवीनतम जानकारी देंगे।
नेशनल सेमिनार में एमडीएच मसाला के संस्थापक निदेशक धर्मपाल महाशय एवं एवरेस्ट मसाला कंपनी के निदेशक स्व.वाडीलाल भाई को मरणोपरांत सेवा सम्मान से नवाजा जायेगा। आर्ची मसाला, चेन्नई के निदेशक इसाक पदम सिंह, धनिया निर्यातक पीसी कन्नन, विरूदनगर, जेब्स इंटरनेशनल, मुंबई के निदेशक भास्कर भाई सेमिनार के विभिन्न सत्रों में पैनल अतिथी होंगे।
धनिये की पैदावार 4.5 लाख मेट्रिक टन


कृषि विभाग के अनुसार, भारत में प्रतिवर्ष धनिये का कुल उत्पादन लगभग 4.5 लाख मेट्रिक टन है, जिसमें राजस्थान से 1 लाख, मध्यप्रदेश से 1.50 लाख टन तथा गुजरात से 2 लाख टन धनिये की पैदावार होती है। राजस्थान के हाडौती अंचल में कोटा, बूंदी, बारां व झालावाड जिलों सहित मप्र के सीमावर्ती जिलों में इस वर्ष धनिये की बम्पर फसल होने की उम्मीद है। कोटा में एशिया का सबसे बडी भामाशाह कृषि उपज मंडी होने से यहां हजारों किसान एवं व्यापारी धनिया पैदावार से जुडे हुये हैं। कोटा में धनिये की प्रोसेसिंग एवं ग्रेडिंग के लिये कई इकाइयां संचालित हैं। हाड़ौती एवं मप्र का धनिया कोटा से निर्यात भी किया जा रहा है।
धनिये की फसल का आंकलन इसी माह
राजस्थान एवं मध्यप्रदेश के कृषि क्षेत्र में खडी फसल का प्रत्यक्ष रूप से अवलोकन फरवरी माह में ही किया जाता है। सभी व्यवसायी तैयार फसलों का आंकलन कर डिमांड व सप्लाई के पूर्वानुमान निर्धारित करते हैं। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सभी धनिया व्यापारियों से सेमिनार में शामिल होने की अपील की है।


बेहतर खुशबू, उच्च गुणवत्ता एवम् औषधीय गुणो से भरपूर धनिया के मुख्य उत्पादक कृषि क्षेत्र राजस्थान एवं मध्यप्रदेश में है। भारत का धनिया अपनी खुशबू एवं प्राकृतिक गुणों के कारण ‘मसालों का सरताज’ है। इसीलिये कई देशों में भारतीय धनिया की मांग निरंतर बढ़ती जा रही है। नेशनल धनिया सेमिनार का मुख्य उद्देश्य धनिया की बुवाई, पैदावार, मौसमी प्रभाव एवम् भविष्य के रूझान का आंकलन करने के साथ ही इसके व्यापार से जुडे प्रत्येक वर्ग में संवाद कायम करना है ताकि व्यापार में आ रहे निरन्तर बदलाव के अनुसार व्यवसायी सही योजना बनाकर सार्थक निर्णय ले सकें। विश्लेषक धनिया के निरन्तर बढ़ते व्यापार का बाजार विश्लेषण, उच्च क्वालिटी के लिये नई तकनीक की जानकारी एवं वायदा व्यापार का भौतिक व्यापार पर प्रभाव आदि का विश्लेषण भी करेंगे। नेशनल सेमिनार में दक्षिण भारत, मप्र एवं गुजरात से प्रमुख धनिया व्यवसायी एवं मसाला उत्पादक समूहों के प्रतिनिधी भी सहभागी हैं। यह सेमिनार आने वाले समय में धनिया व्यापार से जुडे हर क्षेत्र में ‘मील का पत्थर’ साबित होगी।

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