Sunday, 7 July, 2019
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सीए फाइनल में मॉक टेस्ट से खुद को अपडेट किया

सीए फाइनल परीक्षा में ऑल इडिया टॉपर शादाब हुसैन से खास बातचीत

अरविंद 
द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स इंडिया (आईसीएआई) की नवंबर,2018 में हुई सीए फाइनल परीक्षा (ओल्ड सिलेबस स्कीम) में कोटा के शादाब हुसैन ऑल इंडिया टॉपर बने। उन्होंने 800 में से सर्वाधिक 597 मार्क्स (74.63 प्रतिशत) प्राप्त किये। शादाब ने रेजोनेंस से क्लासरूम कोचिंग ली। इस परीक्षा में देशभर के 1.09 लाख स्टूडेंट्स शामिल हुए। कोटा के शैक्षणिक इतिहास में यह पहला अवसर है जब सीए फाइनल परीक्षा में एआईआर-1 का ताज कोटा शहर को मिला है। ऑल इंडिया टॉपर शादाब से विशेष बातचीत के अंश-

  •  स्कूली पढाई किस माध्यम से हुई 

पिता मोहम्मद रफीक विज्ञाननगर में सिलाई का काम करते हैं। मां सलीमा अंसारी गृहिणी है। परिवार में कोई उच्च शिक्षित नहीं है। पांच बहिनों में मैं इकलौता भाई हूं। मध्यमर्गीय परिवार होने से मैंने कक्षा-1 से 11वीं तक हिंदी मीडियम के स्कूल में पढाई की। कक्षा-10 में राज.बोर्ड में मुझे 88 प्रतिशत अंक मिले। कक्षा-12वीं में 86 प्रतिशत अंकों से जिले की मेरिट में चौथा स्थान मिला।

  • कॉमर्स सब्जेक्ट क्यों और किसलिये चुना 

कोटा शहर में केवल सांइस की पढाई का माहौल रहता है। स्कूल में सभी स्टूडेंट भीड़ की तरह साइंस ले लेते हैं। खुद की रूचि और क्षमता नहीं देखते हैं। मैने भीड़ से अलग पढने का मन बना लिया। कक्षा-11वीं में कॉमर्स लेकर उतनी ही मेहनत करने लगा। मैं सीए को नोबल प्रोफेशन मानता हूं। इसमें कोई रिजर्वेशन नहीं होता केवल टेलेंट को ही प्रोत्साहन मिलता हैं।

  • शुरूआती अचीवमेंट

2014 में सीपीटी प्रवेश परीक्षा में मुझे 87 प्रतिशत अंक मिले। 2015 में सीए इंटरमीडिएट परीक्षा आईपीसीसी में मुझे ऑल इंडिया रैंक-24 मिली तो मेरा आत्मविश्वास उंचा हो गया। मुंबई का खर्च उठाने में परिवार सक्षम नहीं था, इसलिए कोटा शहर से 3 वर्ष सीए आर्टिकलशिप करते हुए इन्कम टैक्स, ऑडिटिंग, जीएसटी आदि में प्रेक्टिकल लर्निंग हुई। मैने फाइनल एग्जाम के लिए पूरे तीन साल नियमित कंसेप्चुअल तैयारी की।

  • सीए स्टूडेंट पढ़ने की रणनीति कैसे बनाएं 

सीए फाइनल की पढ़ाई और चुनौतियां प्रवेश परीक्षाओं से बिल्कुल अलग होती है। फाइनल परीक्षा में दोनों ग्रुप के 8 पेपर होते हैं। जिसमें सब्जेक्ट में 7 में से 6 प्रश्न हल करने होते हैं, उनके कई सब-सेक्शन होते हैं। मैने रेगुलर 12 से 14 घंटे स्टडी की। यह परीक्षा पूरी तरह कंसेप्चुअल होती है। केवल रटने से आप पास नहीं हो सकते। परीक्षा में 40 से 50 प्रतिशत प्रश्न सिलेबस से पूछे जाते हैं, उन पर 100 प्रतिशत फोकस किया। 10 से 20 प्रतिशत प्रश्न हर स्टूडेंट के लिए नए होते हैं। उसमें चेक किया जाता है कि आप आंसर कैसे देते हैं।

  • टाइम मैनेजमेंट कैसे सीखा

इस परीक्षा में टाइम मैनेजमेंट सबसे अहम है। मैने 3 घंटे के पेपर को हल करने का टाइम मैनेजमेंट मॉक टेस्ट देकर सीखा। आईसीएआई की वेबसाइट से मॉक टेस्ट के पेपर डाउनलोड करके मैं घर पर प्रैक्टिस करता था। कई मॉक टेस्ट देने से वीक पॉइंट का पता चलता रहा, मैमोरी बहुत इम्प्रूव हुई।
मैने फाइनल परीक्षा में हर पेपर को फ्री हैंड होकर लिखा जिससे स्पीड बहुत बढ़ गई। अंत में 3 घंटे के पेपर को 15 मिनट पहले सॉल्व करने में सफल रहा।

  • टॉपर बनने में सबसे मजबूत पक्ष 

तीन साल मोबाइल व सोशल मीडिया से दूर रहा, जिससे बहुत समय बचा। उससे मॉक टेस्ट की तैयारी की। अन्य स्टूडेंट से अलग इनीशिएटिव लेकर खुद को अपडेट करता रहा। सीए के न्यूजलेटर पढकर नोट्स बनाए। सीए फाइनल परीक्षा में 6 माह पूर्व के अपडेट से जुडे़ प्रश्न भी पूछे जाते हैं, इसलिसे मैने 30 अप्रैल तक के नये बदलावों को वेबसाइट से अपलोड किया। अन्य स्टूडेंट्स से हर सब्जेक्ट में मैैं 2-3 माह एडवांस तैयारी करता रहा।

  • रिलेक्स होने का फार्मूला 

रोज 14 घंटे पढाई करके थकान होती थी, मैं रोज शाम को पार्क में 30 से 40 मिनट घूमने जाता रहा। उससे ब्रेन को एनर्जी मिली और तरोताजा होकर रात में पढाई करता था। बाहरी दुनिया से अलग केवल खुद के टारगेट पर फोकस किया। रेजोनेंस के टीचर्स ने हर तरह की प्रॉब्लम को सॉल्व करना सिखाया। इंटरनेट का उपयोग केवल पढाई के लिए किया।

  • आगे की योजना 

अगले दो माह में सीए आर्टिकलशिप पूरी करना है। मुंबई की बिग-4 कंपनियों से जॉब ऑफर मिल रहे हैं। पिता ने बहुत मेहनत से पढाया है, इसलिए परिवार को उंचा उठाने के लिये किसी बड़ी कंपनी में जॉब करूंगा। रेजोनेंस के एमडी आरके वर्मा ने मुझे बहुत मोटिवेट किया, इस रैंक का श्रेय परिवार एवं वर्मा सर को देता हूं।

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