Wednesday, 27 March, 2019
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पहले सूचना आयुक्त जिन्होंने 5 साल का रिपोर्ट कार्ड जारी किया

न्यूजवेव @ भोपाल
मप्र के राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप ने अपना कार्यकाल पूर्ण होने पर अपने 5 वर्ष के कार्यकाल में किए गए न्यायिक निर्णयों का ब्यौरा जनता के लिये सार्वजनिक किया। सभी राज्य सूचना आयोगों में यह पहला मौका है किसी सूचना आयुक्त ने अपना रिपोर्ट कार्ड सार्वजनिक किया है। आयुक्त ने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से सार्वजनिक दायित्व निर्वहन करने वाले सभी अधिकारी जनता के प्रति उत्तरदायी हों। इसी सोच के साथ उन्होंने पहल करते हुए इस न्यायिक पद पर किए गए कार्यों व निर्णयों का ब्यौरा जनता के सामने प्रस्तुत किया है।

सूचना आयुक्त आत्मदीप द्वारा जारी रिपोर्ट कार्ड के अनुसार, लोक अदालत, वीडियो कांफ्रेसिंग व कैंप कोर्ट की पहल करते हुए सूचना के अधिकार में नवाचार करने वाला मध्यप्रदेश पहला राज्य बना। उन्होंने 11 फरवरी 2014 से 5 वर्ष के कार्यकाल में राज्य के विभिन्न जिलों खासकर ग्वालियर, चंबल व रीवा संभागों की 5000 से अधिक अपीलों व शिकायतों का समाधान किया। इसमें सूचना के अधिकार की अवज्ञा करने वाले 21 लोक सेवकों को 3,13,500 रू. के जुर्माने से दंडित किया गया। कई ऐसे फैसले किए जो नजीर बने है।
वीडियो कांफ्रेसिंग से सुनवाई शुरू की
उन्होने पुनर्गठित आयोग की पहली बैठक में ही प्रस्ताव पारित करा कर प्रदेश में वीडियो कांफ्रेसिंग से अपीलों की सुनवाई शुरू कराई। देश में पहली बार आरटीआई एक्ट के तहत सभी संभागों में लोक अदालतें लगाने की परंपरा शुरू की। जिससे सैकड़ों अपीलों का निपटारा हुआ। आयुक्त ने जानने के हक का फायदा अधिकाधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए अपने प्रभार के सभी जिलों के दौरे करने की पहल की। उन्होने विभिन्न जिलों से आयोग की भोपाल कोर्ट में आने-जाने वाले पक्षकारों को राहत देने के लिए खुद जिला मुख्यालयों पर पहुंचकर केम्प कोर्ट लगाई और जिलों की अपीलों की सुनवाई संबंधित जिले में ही करने की कवायद की। कैम्प कोर्ट व वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए 600 अपीलों का निराकरण किया ।
जिला स्तर पर आरटीआई वर्कशॉप

आयुक्त ने सूचना के अधिकार के क्रियान्वयन की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए जिला मुख्यालयों पर जाकर लोक सूचना अधिकारियों, अपीलीय अधिकारियों व सूचना का अधिकार प्रकोष्ठ से जुड़े लोक सेवकों की कार्यशालाएं आयोजित की। इन कार्यषालाओं में संबंधित अधिकारियों -कर्मचारियों को प्रषिक्षण देते हुए आरटीआई एक्ट तथा म.प्र. सूचना का अधिकार (फीस व अपील) नियम 2005 के उद्देष्यों व मुख्य प्रावधानों से अवगत कराया और उन्हे ऐसी स्थिति निर्मित करने के लिए प्रेरित किया कि नागरिकों के सूचना के आवेदनों का नियत अवधि में यथोचित निराकरण लोक सूचना अधिकारी प्रथम स्तर पर ही हो जाए ताकि लोगों को अपील में न जाना पड़े ।
आरटीआई को सोशल मीडिया से जोड़ा
उन्होने सूचना के अधिकार में जागरूकता बढ़ाने के लिए पहली बार सोशल मीडिया को भी शामिल किया। आत्मदीप ने फेसबुक पर ‘राईट टू इंफोर्मेशन (जर्नलिस्ट)’ नाम से पेज बनाकर उसके माध्यम से अपने महत्वपूर्ण फैसलों व संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी सबको दी। यह पेज देश-विदेश में देखा जा रहा है। उन्होने निःशुुल्क हेल्प लाईन शुरू की जिससे कोई भी नागरिक लोकसेवक आयुक्त से मिलकर या उनसे फेसबुक पेज, व्हाट्सएप, इंस्ट्राग्राम, फोन, मोबाईल, ई-मेल आदि के जरिए संपर्क कर आरटीआई से संबंधित कोई भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इस सुविधा का लाभ म.प्र. के अलावा अन्य राज्यों के नगारिक भी उठा रहे हैं ।
आयुक्त ने म.प्र. के साथ राजस्थान में भी 50 से अधिक विभिन्न गैर सरकारी कार्यक्रमों में पहुंचकर सूचना के अधिकार के बारे में लोगों को इस अधिकार का अधिक उपयोग करने के लिये प्रेरित किया। उन्होंने दुबई-आबूधाबी में संगोष्ठी कर प्रवासी भारतीयों को जानकारी दी कि वे भारत आए बिना विदेश में रहते हुए ही सूचना के अधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं।
फोन व मोबाइल पर सुनवाई का नवाचार

म.प्र.के विभिन्न क्षेत्रों से सुनवाई के लिए बार-बार भोपाल आने-जाने मे समय, धन व श्रम के खर्च से बचाने के लिए आयुक्त ने नवाचार करते हुये फोन या मोबाईल पर जनसुनवाई कर अपीलों का निराकरण किया। उन्होने ज्यादातर अपीलों में सिर्फ एक पेशी लेकर निर्णय पारित किए, ताकि पक्षकारों को बार बार सुनवाई में न आना पड़े। अंतराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च पर केवल महिलाओं की अपीलों या शिकायतों की सुनवाई करने का नया अध्याय शुरू किया। सुनवाई में निःशक्तजनों, बुजुर्गों व महिलाओं को प्राथमिकता दी। आयुक्त ने ऐसे नवाचार पर जोर दिया जिससे न्याय आसानी से मिल सके। पक्षकारों को सुनवाई के लिए बार बार चक्कर न काटने पड़े। संबंधित पक्षों के धन, समय व श्रम की बचत हो और सार्वजनिक संसाधन का अपव्यय न हो। इतना ही नहीं, उन्होने आरटीआई को रोजगार बनाने वाले दुरूपयोगकर्ताओं को हतोत्साहित करने के लिए भी निर्भयता से कड़े कदम उठाए।
ऐसे अहम फैसले मिसाल बने
आयुक्त ने अपने कार्यकाल में फैसलों के जरिए सहकारी समितियों द्वारा संचालित राशन की दुकानों व भारतीय रेडक्रास सोसायटी जैसी संस्थाओं को लोकहित में आरटीआई एक्ट के दायरे में लाकर जनता के प्रति उत्तरदायी बनाया। उन्होनेे जनता के लिए उन विभागो या संस्थाओं से वांछित जानकारी लेने का कानूनी रास्ता खोला जिन्हें केन्द्र या राज्य सरकार ने आरटीआई एक्ट के प्रावधानों से छूट दे रखी है। उनमें लोकायुक्त की विशेष पुलिस स्थापना, आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो, विशेेष सशस्त्र बल आदि शामिल हैं।
आम आदमी को मौलिक अधिकारों के प्रति सशक्त बनाने, शासन व उसके तंत्र को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाने तथा सार्वजनिक व्यवस्था में शुचिता व पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिये सूचना के अधिकार के क्षेत्र में आत्मदीप की निःशुल्क सेवाएं सबके लिए सदैव उपलब्ध रहेंगी। इसके लिए वे सोशल मीडिया पर सहयोग करेंगे और जल्द ही एक मार्गदर्शिका भी तैयार करेंगे।

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