Wednesday, 25 September, 2019
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NEET-2019 में 50 फीसदी छात्रों को 19 प्रतिशत अंक भी नहीं मिले

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा नीट-2020 के पेपर पैटर्न में मामूली बदलाव के आसार, विदेशी विद्यार्थियों का रूझान कम
न्यूजवेव कोटा

नीट-2020 के पेपर पैटर्न में बदलाव की संभावना को लेकर कोचिंग विद्यार्थियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। संभावना जताई जा रही है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी जेईई-मेन की तर्ज पर विद्यार्थियों के हित में नीट-2020 के पेपर में भी प्रश्नों में विविधता ला सकती है। नीट पेपर में 180 मिनट में 180 प्रश्न पूछे जाते हैं अर्थात विद्यार्थी को एक मिनट एक प्रश्न हल करना होता है। तो बोर्ड परीक्षा से बिल्कुल भिन्न है। विशेषज्ञों का कहना है कि 12वीं बोर्ड परीक्षा देने वाले विद्यर्थियों को स्कूलों में ऐसे बहुविकल्पीय प्रश्नों का अभ्यास नहीं कराया जाता हैं। जिससे 50 प्रतिशत विद्यार्थी पेपर में 19 प्रतिशत अंक भी प्राप्त नहीं पाते हैं। लगातार 2-3 वर्ष असफल रहने से उनका मानसिक तनाव बढ जाता है।
सिर्फ 7.04 लाख को मिले 19 फीसदी अंक


एक्सपर्ट देव शर्मा ने बताया कि नीट- 2019 में 15,19,375 विद्यार्थियों ने नीट-2019 के लिए पंजीयन किया, जिसमें से 14,10,755 ने यह परीक्षा दी थी। चौंकाने वाली बात यह कि इनमें से 7,04,335 विद्यार्थी ही क्वालिफाई हुये। उन्होने 720 अंकों के पेपर में 134 (19 प्रतिशत) से अधिक अंक प्राप्त किये। इस वर्ष एमबीबीएस तथा बीडीएस की कुल सीटें 98 हजार ही थीं, जबकि दावेदार 7.04 लाख विद्यार्थी काउंसलिंग के लिये क्वालिफाई घोषित कर दिये गये। लेकिन 6 लाख विद्यार्थी सीट नहीं मिलने से पुनः कोचिंग लेने पर बाध्य हुये। जिससे उन पर दोहरा आर्थिक व मानसिक तनाव बढ़ गया।
मेडिकल विद्यार्थियों ने बताया कि परीक्षा से पहले मानसिक तनाव होने से वे गलती कर जाते है। नेगेटिव मार्किंग होने से भी उनकेे अंक कम हो जाते हैं। प्रश्नों की एकरूपता तथा उनका बार-बार दोहराव के कारण रिपीटर्स विद्यार्थी फ्रेेशर्स से बेहतर प्रदर्शन करतेे हैं। नीट में अवसरों की संख्या अधिक मिलने से इसमें विद्यार्थियों की संख्या प्रतिवर्ष बढती जा रही है। लगभग 60 प्रतिशत परीक्षार्थी रिपीटर्स तथा 40 प्रतिशत फ्रेेशर्स होते हैं।
नीट-2019 में मात्र 687 विदेशी स्टूडेंट्स बैठे


नीट-2019 के 3 घंटे के पेपर में 180 प्रश्न होने से यह परीक्षा विदेशी विद्यार्थियों को आकर्षित नहीं कर सकी। इसके पेपर पैटर्न के अनुसार, विदेशी स्कूलों में पढाई नहीं होती है। यह प्रवेश परीक्षा उनके लिये तनावपूर्ण रही। उनकी रूचि व संख्या कम होने के कारण नीट-2019 में 14.10 लाख में से मात्र 687 विद्यार्थी ही विदेशी थे। इनमें से चयन का प्रतिशत नगण्य रहा।
पेपर पैटर्न को लेकर अटकलें तेज
शिक्षा नगरी में हजारों मेडिकल विद्यार्थी इस बात से चिंतित हैं कि जेईई-मेन की तरह नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा नीट-2020 के पेपर पैटर्न में भी बदलाव करके प्रश्नों की संख्या कम करने की कोई योजना तो नहीं है। 3 मई 2020 को ऑफलाइन मोड में होने वाली नीट परीक्षा के लिये 2 दिसंबर से पंजीयन
प्रक्रिया प्रारंभ हो जायेेगी।
उससे पहले संभवतः एनटीए पेपर पैटर्न में मामूली बदलाव कर सकती है। यह भी संभावना है कि विदेशी विद्यार्थियों का रूझान कम होने से नीट के पेपर में प्रश्नों की संख्या 180 से कुछ घटा दी जाये।

 

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