Wednesday, 27 March, 2019
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जैन समाज में नया तीर्थस्थल होगा सिलोर का ‘शिलोदय’

शिलान्यास: जैन मुनि पूज्य पुंगव सुधासागर महाराज के सान्निध्य में 16 मार्च से मंदिर का नवनिर्माण शुरू, हाड़ौती सहित देशभर के धर्मावलम्बी करेंगे सहयोग

न्यूजवेव @ कोटा/बूंदी

कोटा से 41 किमी व बूंदी नेशनल हाईवे से 5 किमी दूर सिलोर गांव का प्राचीन जैन मंदिर ‘शिलोदय’ जल्द ही जैन समाज के नये तीर्थस्थल के रूप में आस्था का केंद्र बनेगा। मंदिर में पदमासन भगवान आदिनाथ की करीब 15.25 फीट लंबी मूर्ति विराजित की जाएगी। मंदिर निर्माण के साथ नए मंदिर में त्रिकाल चौबीसी का निर्माण होगा, जिसमें वर्तमान, भूतकाल व भविष्य की प्रतिमाएं स्थापित की जाएगी। सिलोर में ससंघ विराजमान मुनि पुंगव सुधासागरजी महाराज के सान्निध्य में 16 मार्च को इसका शिलान्यास होगा।

सिलोर अतिशय क्षेत्र कमेटी के निदेशक हुकम जैन काका ने बताया कि सिलोर का प्राचीन अतिशय क्षेत्र आदिश्वर गिरी जैन मंदिर अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन ‘शिलोदय’ तीर्थक्षेत्र के नाम से जाना जाएगा, जिसका नामकरण पूज्य मुनि पुंगव सुधासागरजी महाराज ने धर्मसभा में किया। उन्होंने बताया कि 16 मार्च को शिलान्यास के बाद मंदिर के जीर्णोद्वार सहित नवीन मंदिर का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा, जिसमें हाडौती अंचल समेत देशभर के धर्मावलम्बियों की भागीदारी रहेगी।

2024 में बनेगा भव्य एतिहासिक मंदिर
काका ने बताया कि 8 बीघा भूमि पर दो मंजिला नये मंदिर का निर्माण कार्य वर्ष 2024 में पूरा होने पर प्राण प्रतिष्ठा कर दी जाएगी। प्रथम तल पर पदमासन भगवान आदिनाथ की 15.25 फीट लंबी मूर्ति के साथ त्रिकाल चौबीसी व वेदी की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी।यहां श्रद्धालुओं के लिए धर्मशाला, रसोई घर व अन्य सुविधाएं विकसित की जाएगी। मूर्तियों का निर्माण जयपुर में बिजौलिया के लाल पत्थर से होगा।

खुदाई में निकली प्राचीन प्रतिमाएं


अतिशय क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष टीकम जैन ने बताया कि सिलोर के आदिनाथ आदिश्वर गिरी जैन मंदिर के पास खुदाई में 8 से 10 खंडित प्राचीन प्रतिमाएं निकली है। सिलोर गांव प्राचीन बावड़ी व मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। वर्तमान में यहां जैन समाज के 6 परिवार रहते हैं। आदिश्वर गिरी जैन मंदिर 1000 वर्ष पुराना है। यहां स्थापित प्रतिमाएं 700-800 वर्ष पुरानी है। मंदिर में आदिनाथ व पार्श्वनाथ, शांतिनाथ, चंद्रप्रभु, मुनि सुव्रतनाथ समेत अन्य प्रतिमाएं विराजमान है।

कभी यहां लगती थी हीरे जवाहरात की मंडी
पूर्व सरपंच शांतिलाल व प्रकाश चंद ने बताया कि सिलोर गांव में 500 साल पूर्व हीरे जवाहरात की मंडी लगा करती थी, जिसमें प्रदेश समेत पूरे देशभर के हीरे जवाहरात व्यापारी यहां आते थे और हीरे जवाहरात की खरीद फरोख्त संबंधी कामकाज करते थे, लेकिन प्राकृतिक आपदा व मुगल आक्रमण के चलते यहां के लोग दूसरे शहरों में पलायन कर गए।

ऐसे पहुंचे सिलोर तीर्थस्थल
सिलोर अतिशय क्षेत्र के कोषाध्यक्ष नरेंद्र जैन ने बताया कि मंदिर के साथ यहां स्कूल, कॉलेज व गौशाला सहित विभिन्न निर्माण कार्य कराए जाएंगे। सिलोर अतिशय क्षेत्र कमेटी के महामंत्री सुनील जैन सेठिया ने बताया कि सिलोर जैन मंदिर जाने के लिए जयपुर, बूंदी, कोटा से सीधे सडक मार्ग द्वारा पहुंच सकते है। यह मंदिर जयपुर-बूंदी नेशनल हाईवे से बूंदी-डाबी रोड पर स्थित है।यहां कार, बस, बाइक व टैक्सी द्वारा पहुंच सकते हैं। विरासतकालीन मंदिर होने से यहां हैरिटेज टूरिज्म भी विकसित होगा, बूंदी आने वाले विदेशी पर्यटक अवश्य पहुंचेंगे। बूंदी के पर्यटन स्थलों की सूची में सिलोर तीर्थ स्थल आकर्षण का केंद्र रहेगा।

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