Sunday, 8 December, 2019
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तंगहाली में पढ़कर निकला विकास बनेगा गांव का पहला डॉक्टर

रेजोनेंस से कोचिंग लेकर पहुंचा एम.जी.एम. मेडिकल कॉलेज

न्यूजवेव @ कोटा

झारखंड के पलामू जिले की पाटन तहसील में एक छोटा सा गांव है- निमिया। इस गांव से गरीब परिवार के छात्र विकास कुमार ने नीट-2019 में ऑल इंडिया रैंक-13498 प्राप्त कर जमशेदपुर (झारखंड) के एम.जी.एम. मेडिकल कॉलेज में MBBS में प्रवेश पक्का कर लिया है।
छात्र विकास के पिता जगदीश साहो सूरत में एक साड़ी उद्योग में मजदूरी करते हैं। उनका वेतन इतना नहीं था कि बेटे की पढ़ाई का खर्च खुद उठा सके। गांव में कुछ राशि उधार लेकर विकास को रेजोनेंस कोटा में भेजा, जहां उसे फीस में छूट दी गई। मां यशोदा देवी गांव में ही छोटे से खेत को संभालती है। उन्होंने बताया कि बेटे ने गरीबी एवं असफलता दोनों से संघर्ष करते हुये डॉक्टर बनने का सपना पूरा किया है, पूरे गांव को विकास पर गर्व है।

कक्षा-12वीं में मात्र 51 प्रतिशत अंक
झारखंड शिक्षा बोर्ड से कक्षा-12वीं में उसे मात्र 51 प्रतिशत अंक मिले। लेकिन आगे पढने की हिम्मत नहीं छोड़ी। वह बचपन से डॉक्टर बनने का सपना देखता था। गांव से पटना आकर उसने मेहनत की लेकिन पांच बार नीट में सफल नहीं हो सका। उसने कोटा आकर रेजोनेंस के प्री-मेडिकल डिवीजन से कोचिंग लेने का निश्चय किया, जहां औसत विद्यार्थियों का चयन सर्वाधिक होता है। संस्थान ने गरीबी के कारण उसे स्कॉलरशिप दी। नीट-2018 में भी वह क्वालिफाई नहीं कर सका। एक वर्ष और मेहनत करने की ठानी। इस वर्ष नीट में 579 अंकों से उसे AIR-13498 मिली। जिससे झारखंड के मेडिकल कॉलेज में MBBS की सीट मिल गई।
विकास ने बताया कि उसने गांव और गरीबी को बहुत करीब से देखा है इसलिए डॉक्टर बनकर वह गांवों के गरीबों को कम कीमत पर अच्छा इलाज दिलाने का प्रयास करेगा। झारखंड के ग्रामीण बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिये भी कदम उठाएगा।

निरंतर मेहनत से सपना सच हुआ

मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में 15 लाख परीक्षार्थियों में गरीब विद्यार्थियों का चयनित होना गर्व की बात है। गरीब छात्र विकास ने धैर्य रखते हुये निरंतर मेहनत की, जिससे उसका सपना सच हो सका।
– आर.के.वर्मा, प्रबंध निदेशक, रेजोनेंस

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