Saturday, 7 December, 2019
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भक्ति से दूर होना विपत्ति को बुलावा है -आचार्य तेहरिया

द्वितीय सोपान : संगीतमय श्रीमद भागवत कथा

न्यूजवेव कोटा
आचार्य श्री कैलाश चन्द तेहरिया ने कहा कि श्रीकृष्ण हमेशा भक्तों के दुख में साथ देते हैं लेकिन सुख में साथ छोड़ देते हैं। इसीलिए महाभारत में कुंती ने दुख में ठाकुरजी का साथ मांगा था। श्रीकृष्ण भक्ति से जुडे़ रहने पर सुख-सम्पत्ति व शांति पास रहती है वहीं इससे दूर होतेे ही विपत्तियां पास आने लगती है।


तलवंडी सेक्टर-3 के श्रीसांवलिया सेठ पावन धाम में चल रही संगीतमय श्रीमद भागवत कथा में बुधवार को आचार्य तेहरिया ने कहा कि आज उल्टी रीत चल रही है। हम संसार से प्रीति कर बैठे लेकिन श्रीकृष्ण से जुडने के लिये हमारे पास समय नहीं है। याद रखें, जीवन में कोई बाजी जीतना है तो भक्ति से तार जोड़ लें। हम प्रत्येक कार्य में स्वयं को कर्ता मान बैठे हैं जबकि धन-सम्पत्ति व शरीर सब चलायमान हैं। असली कर्ता तो परमात्मा है, अमंगल को वही दूर करता है।
महाभारत प्रसंग सुनाते हुये उन्होंने कहा कि द्रोपदी चीर हरण के समय भीम को रोकने के लिये श्रीकृष्ण ने स्वयं चतुर्भुज यानी चारभुजा नाथ बनकर रक्षा की थी। हरि नाम जीवन में दैहिक अवरोधों को दूर करता है। ग्रहस्थ जीवन भी बंधन है, उसमें भक्ति साधना करते रहें तो ग्रहस्थाश्रम तपोवन बन जाता है। हमारा भक्ति भाव पवित्र हो तो ईश्वरीय हाथों से ही मुक्ति होती है।
जिस घर में बुजुर्ग वहां तीर्थ


आचार्य तेहरिया ने कहा कि जिन घरों में माता-पिता व बुजुर्गों का सान्निध्य है उनकी सच्चे मन से सेवा करें तो किसी तीर्थस्थल पर जाने की आवश्यकता नहीं रहेगी। क्योंकि शास्त्रों में पिता आकाश समान व माता पृथ्वी समान मानी गई है। माता-पिता रूपी नाव से ही आप भवसागर पार कर सकते हैं। उन्होंने भजन ‘गोेविंद के गुण गाइये, गोपाल के गुण गाइये..’ सुनाया तो पांडाल में श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे।

भाई व मित्र से करें प्रीत

श्री तेहरिया ने कहा कि श्रीकृष्ण ने भाई व सखा को अपने पास रखा था। उन्होंने वृंदावन में प्रीत की गंगा बहाई थी। लेकिन आज हम भाई व मित्र से भी वैर भाव रखने लगे हैं। इसलिये चाहे योग-रोग-भोग मंे रहो, भक्ति से निरंतर जुडे़ रहो। केवल बाहरी दिखावे से सुख-शांति नहीं मिल सकती, आध्यात्मिक ज्ञान व भक्ति भाव सेे आंतरिक सौंदर्य प्रकट होता है। याद रखें, हरि के श्रीचरणों में अर्पण हो जाना ही समर्पण भक्ति है। आयोजक रमेशचंद गुप्ता ने बताया कि गुरूवार को कथा में ध्रुव, प्रहलाद जैसे भक्तों के चरित्र वर्णन पर ओजस्वी प्रवचन होेंगे।

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