Sunday, 1 September, 2019
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विरह गीत ‘कब आएगा मेरा सांवरिया…’ पर झूमे श्रद्धालु

श्रीमद भागवत कथा की दिव्य महारास लीला में विरह गीतों से सराबोर रहा भक्ति सागर
न्यूजवेव@ कोटा
तलवंडी सेक्टर-3 स्थित सेठ सांवलिया पावन धाम में चल रही श्रीमद भागवत कथा के छठे सोपान में रविवार को दिव्य महारास लीला का भव्य आयोजन हुआ। कथा पांडाल में बनाये रास मंडल में भक्तों ने गोपी गीत ‘कब आएगा मेरा सांवरिया…’का गुणगान करते हुये मनोहारी नृत्य किया।


आचार्य कैलाश चन्द तेहरिया ने कहा कि ब्रज की रज में बांसुरी की धुन गोपियों को ब्रजवासी के दर्शन के लिये लालायित कर देती थी। 19 श्लोकों के साथ गोपियों ने एक सुर में विरह गीत का गुणगान किया था, जिससे श्रीकृष्ण प्रकट हुये थे। जब प्रेम अनंत हो जाता है तो रोम-रोम संत हो जाता है। जहां समर्पण भाव से भक्ति की जाती है वहां रासेश्वर प्रकट होते हैं।

उन्होने कहा कि गोपियों ने जिज्ञासा में थी कि जो प्रेम करते हैं, उन्हें ठाकुरजी दर्शन क्यों नहीं दे रहे। इस पर श्रीकृष्ण ने कहा कि मैं वैसा ही हूं जैसा तुम्हारे मन में भाव हैं। प्रेम की पूर्णता वियोग में ही है। वियोग बिना संयोग की पुष्टि नहीं होती है। महारास में गोपियों ने 5 ज्ञानेंद्रियों व 5 कर्मेंद्रियों सहित 10 इंद्रियों से कृष्ण रस का पान किया था। अर्थात् जीव व ब्रह्म का मिलन ही महारास है।
मथुरा में 10 रसों में दिखाई दिये मथुराधीश

आचार्य तेहरिया ने ‘मथुरा के बीच बाजार सांवरियों जादू कर ग्यो..’ भजन सुनाते हुये कहा कि श्रीकृष्ण ने कहा था ब्रजवासी मेरे प्राण हैं और वृंदावन मेरा धाम है। वे मथुरा में 14 वर्ष तक रौद्र रस, अद्भुत रस, हास्य रस, श्रंगार रस, वीर रस, वात्सल्य रस, भयानक रस, वीभत्स रस, शांत रस तथा भक्ति रस सहित 10 रसों में दिखाई दिये। जब भी मथुराधीश के दर्शन करें तो उनकी छवि मानस पटल पर अंकित हो जानी चाहिये। अनासक्त भाव से भक्ति हो तो ब्रह्म की प्राप्ति अवश्य होती है।
कथा में उद्धव चरित्र, कंस वध एवं श्रीकृष्ण-रूक्मणी विवाह के प्रसंगों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर संकीर्तन करते रहे। उन्होंने कहा कि यशोदा माता की तरह हर मां कार्बन कॉपी की तरह होती है। अपने बच्चों को शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार, आध्यात्म व सुविचारों से भी जोडें। भगवत कथाओं में श्याम रस का सम्मोहन नशे की तरह चढ़ता है जो कभी उतरता नहीं है। आयोजक रमेश मधु गुप्ता ने बताया कि रविवार को कथा का समापन व महाआरती होगी।

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