Wednesday, 28 October, 2020

स्मार्टफोन से पता चलेगा- ‘कौन है कोरोना संक्रमित’

बेंगलुरु के स्टार्टअप एक्यूली लैब्स ने तैयार किया मोबाइल एप ‘Lyfas’ कोविड स्कोर,  DST की पहल पर होगी क्लिनिकल ट्रायल
न्यूजवेव@ बैंगलुरू
बेंगलुरु के स्टार्टअप एक्युली लैब्स (Acculi Labs) ने एक कोविड रिस्क मैनेजमेंट एप ‘लाइफास (Lyfas) कोविड स्कोर विकसित किया है। डीएसटी के सहयोग से तैयार यह एप बिना लक्षणों वाले लोगों का कोविड-19 टेस्ट और बीमारी से जुड़े जोखिम का मूल्यांकन कर सकेगा। कोविड-19 महामारी से निबटने के लिए केंद्र सरकार के डीएसटी विभाग ने मार्च 2020 में शोध कर रही संस्थाओं को तकनीकी सहयोग देने का फैसला किया था। कई राउंड की स्क्रीनिंग के बाद एक्युली लैब्स को बड़े पैमाने पर जांच के लिए चुना गया।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) व कोविड-19 हेल्थ क्राइसिस (CWACH) के साथ द सेंटर फॉर आगमेंटिंग (WAR) ने ऐसे एप को चयनित किया, जिसके जरिये स्मार्टफोन से बीमारी का विश्लेषण, जोखिम और उसके सॉल्यूशन का पहले से पता लगाया जा सकेगा। एक्युली लैब्स का एप स्क्रीनिंग, ’क्लिनिकल-ग्रेड, नॉन-इन्वेसिव, डिजिटल फंक्शनल बायोमार्कर स्मार्टफोन टूल से लैस है। लाइफास एप को डीएसटी ने 30 लाख रुपये का अनुदान दिया है। इसे IIT मद्रास, हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी इनोवेशन सेंटर (HTIC), मेडटेक इनक्यूबेटर से समर्थन हासिल है।
याद दिला दें कि CWACH राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी उद्यमिता विकास बोर्ड (NSTEDB), डीएसटी, भारत सरकार की एक पहल है जो कोविड-19 की रोकथाम के लिये नवाचारों और स्टार्टअप को बढ़ावा देता है।
स्मार्टफोन पर ऐसे होगी जांच
लाइफास एंड्रायड अधारित एप्लिकेशन है। इसमें जब यूजर 5 मिनट मोबाइल के रियर फोन कैमरे पर तर्जनी उंगली रखता है, तो नाड़ी और रक्त की मात्रा में परिवर्तन होता है और 95 बायोमार्कर एल्गोरिदम और सिग्नल प्रोसेसिंग तकनीकों के साथ इसका विश्लेषण प्राप्त होता है। इसमें स्मार्टफोन सेंसर सिग्नल्स को कैप्चर करेंगे। बाद में सिग्नल्स को फोटोप्लेथीस्मोग्राफी (PPG), फोटो क्रोमैटोग्राफी (PCG), धमनी फोटोप्लेथीस्मोग्राफी (APPG), मोबाइल स्पिरोमेट्री और पल्स वैरिएबिलिटी (PRV) के सिद्धांत पर परखा जाता है। इसके बाद लाइफास एप कार्डियो-श्वसन, कार्डियो-संवहनी, हेमटोलॉजी, हेमोरोलॉजी, न्यूरोलॉजी आधारित पैरामीटर एनालिसिस के बारे में बताता है जिससे शरीर में पैथो फिजियोलॉजिकल परिवर्तनों की जांच करने में मदद मिलती है। शरीर के इन परिवर्तनों को आगे और विश्लेषित किया जाता है।
मेदांता मेडिसिटी में हुई स्टडी

यह टेक्नोलॉजी बडी संख्याा में जनसंख्या की स्क्रीनिंग, क्वारन्टीन लोगों की निगरानी और सामुदायिक प्रसार को लेकर निगरानी पर फोकस है। इससे बिना कोरोना लक्षण वाले लोगों के बारे में पता लगाया जा सकता है। मेदांता मेडिसिटी अस्पताल के साथ की गई एक स्टडी में 92% Accuracy, 90% Specificity और 92% Sensitivity के साथ सम्पर्क में आने वाले व्यक्तियों का पता लगाने में यह कारगर साबित हुआ है।
मेदांता एथिक्स कमेटी ने बड़ी संख्या में आबादी का अध्ययन करने के लिए इस एप का अनुमोदन किया है। इस अध्ययन को क्लीनिकल ट्रायल्स रजिस्ट्री-इंडिया (CTRI) के लिए पंजीकृत किया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे स्वीकार किया है। आरोग्य सेतु को आपके स्मार्टफोन में इंस्टाल करने के बाद जैसे वह आपके कॉन्ट्रैक ट्रेसिंग का पता लगता है, वैसे ही यह लाइफास आपकी सटीक मेडिकल जांच करने में मदद करेगा।
सितंबर अंत तक क्लिनिकल ट्रायल

Founder Rupam Das

DST सचिव प्रो.आशुतोष शर्मा ने कहा कि “सस्ता, सुलभ, पॉइंट-ऑफ-केयर स्मार्टफोन आधारित डायग्नॉस्टिक टूल एक शक्तिशाली उपकरण है जो ज्यादा जोखिम वाले मामलों की स्क्रीनिंग में मदद करेगा। इससे मामलों की निगरानी सुनिश्चित होगी। लाइफास स्पीड के साथ प्रभावी जांच मे सक्षम है। इसका क्लिनिकल ट्रायल और नियमन सितंबर अंत तक पूरा होने की उम्मीद है, उसके बाद मोबाइल पर यह जांच सुविधा नागरिकों को उपलब्ध कराई जाएगी।

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