Friday, 17 April, 2026

मेटल किंग अनिल अग्रवाल द्वारा भारत में निःशुल्क शिक्षा के लिये ₹21000 करोड़ दान की घोषणा

अनिल अग्रवाल भारत में ऑक्सफोर्ड से भी बड़ी यूनिवर्सिटी बनाना चाहते हैं

न्यूजवेव @ मुंबई
दुनिया में मेटल किंग के नाम से मशहूर वेदांता ग्रुप के मालिक अनिल अग्रवाल ने अपने जीवन की सारी कमाई का 75 प्रतिशत शैक्षणिक कार्यों के लिए दान करने की घोषणा की है। लन्दन में बसे अग्रवाल का ये दान भारतीय मुद्रा के अनुसार 21000 करोड़ रूपए है। यह अब तक किसी भी भारतीय द्वारा दान की जाने वाली सबसे बड़ी रकम है।
बिहार के पटना में 24 जनवरी 1954 को जन्मे और स्थानीय सर जीडी पाटलिपुत्र हाई स्कूल के छात्र रहे अनिल अग्रवाल ने लन्दन में अपने परिवार की सहमति के बाद घोषणा की कि वे यह रकम भारत में निःशुल्क शिक्षा के बड़े प्रोजेक्टों में दान करना चाहते हैं। वे भारत में ऑक्सफोर्ड से भी बड़ी यूनिवर्सिटी बनाना चाहते हैं जो नो लॉस नो प्रॉफिट (No loss-No profit) आधार पर चलेगी।


70 वर्षीय अनिल अग्रवाल वेदांता रिसोर्सेज पीएलसी (Vedanta Resources PLC) के फाउंडर व प्रेसीडेंट हैं। यह भारत की सबसे बडी खनिज व अलौह धातु कंपनी है। उनकी कंपनी वेदांता भारत, अफ्रीका, आयरलैंड व आस्टेªलिया में मेटल कारोबार कर रही है। जो 65 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार दे रही है। वेदांता समूह जस्ता का सबसे बडा उत्पादक व तांबे का दूसरा सबसे बडा उत्पादक है। वे वोल्केन इन्वेस्टमेंट के माध्यम से वेदांत रिसोर्सेज पीएलसी को नियंत्रित करते हैं।
2024 में राजस्थान राइजिंग समिट में अनिल अग्रवाल ने कहा था, हम राजस्थान की प्राकृतिक संपदा जैसे जिंक व तेल उत्पाद आदि को आगे बढाने के लिये 1 लाख करोड रू का निवेश करना चाहते हैं जिससे हजारों लोगों के लिये रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
मां से मिली प्रेरणा, शिखर पर पहुंचाया


अनिल अग्रवाल का बचपन बहुत संघर्ष भरा रहा। उनकी पढाई 15 साल की उम्र में ही छूट गई थी। उनकी मां को उस समय 4 बच्चों का पेट भरने के लिये मात्र 400 रू मिलते थे। मां ने कभी अपनी भूख की चिंता नहीं की, वे चाहती थी बस रोज उनके बच्चों का पेट भर जाये। वे अपनी मां के साथ रहकर उनसे प्रेरणा लेते रहे।
19 साल की उम्र में जब पटना से मुंबई कुछ काम करने के लिये रवाना हुये तो उनके पास एक टिफिन बॉक्स, बिस्तर और आंखों में कुछ कर गुजरने का सपना था। मुंबई की चकाचौंध देख वे घबरा गये थे। उन्होंने छोटी सी दुकान से अपने सफर की शुरूआत की। भोईवाड़ा के मेटल बाजार में छोटा सा ऑफिस किराये पर लिया और मेटल का कबाड़ बेचना शुरू कर दिया। देखते ही देखते इस कारोबार की पूंजी आज 1.41 लाख करोड़ तक पहुंच गई। कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने जरूरतमंद लोगों के लिये 150 करोड रू की मदद की थी।

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