Monday, 20 January, 2020
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परिवार ,पद और पैसे से बड़ी है- सहनशक्ति – संत कमल किशोर नागरजी

खेल संकुल परिसर में श्रीमद भागवत ज्ञान महोत्सव के तृतीय सोपान में पूज्य नागरजी के ओजस्वी प्रवचन सुनने उमड़े श्रद्धालु।

न्यूजवेव @ झालावाड़/ कोटा

मालवा के गौ सेवक संत पूज्य पं. कमल किशोर नागरजी ने कहा कि आज समाज में गृह क्लेश तेजी से बढ़ रहे हैं। आंकड़ों को देखें तो रोज 60 मिनट में 55 लोग केवल गृह क्लेश से मर रहे हैं। सहन करने की शक्ति नही होने से परिवार टूटने लगे हैं। हमारी संस्कृति में परिवार, पद और पैसे से बड़ी है- सहनशक्ति। सांसारिक जीवन में ईश्वर का नाम लेकर हर बात को सहन कर लो क्योंकि भक्ति से ही सहन शक्ति मिलती है।

शुक्रवार को खेल संकुल परिसर में श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ महोत्सव के तृतीय सोपान में उन्होंने ध्रुव प्रसंग सुनाते हुए कहा कि ध्रुव ने भूख, भय, जंगल जैसी सभी विपत्तियों के बावजूद सब कुछ सहा। वह शेषनाग से भी आगे निकला तो अंत में उसे भगवान मिल गए।

*मीरा ने सहने का तप किया था*

संत नागर भजन ‘मेने लाखों के बोल सहे, साँवरिया तेरे लिए..’ सुनाते हुए कहा कि राजस्थान की धरा पर मीरा ने भक्ति के आगे सभी बाधाएं सहने का इतिहास रचा है। जब वो विष का प्याला पी उठी तो महाकाल की माया भी नाच उठी थी।

*पात्रता से धन्ना ने राज्य को अकाल से बचाया था*

उन्होंने कहा कि बरसों पहले जब राजस्थान में घोर अकाल पड़ा था, तब पानी और भोजन के लिए हाहाकार मची तो टोंक के धन्ना जाट ने कहा कि भक्ति करते रहो, एक दिन संकट दूर होगा।  उसने रोज भक्ति करते हुए तुम्बी की खेती की। द्वारिकाधीश ने उसे बहुत कुछ दिया। एक तुम्बी पकने पर उसे फोड़ा तो उसमे से हीरा-जवाहरात निकले। आज सभी साधु तुम्बी से ही जल पीते हैं। उस पात्र से धन्ना में इतनी पात्रता आ गई कि उसने राज्य में सभी मन्दिर, किले ठीक करवाये और तालाब खुदवाए। राज्य में सालासर बालाजी व साँवलिया सेठ का मंदिर भी तालाब में ही बने। यही भक्ति का चमत्कार ही था कि भक्त धन्ना सेठ के नाम से मशहूर हुआ।

*पात्र से ही पात्रता आती है*

संत नागरजी ने कहा कि कहीं भी जाओ, अपने साथ लौटा, गिलास जैसा एक पात्र अवश्य ले जाएं। आजकल हम दिखावे के लिए डिस्पोजल होते जा रहे हैं। याद रखें, पात्र से ही पात्रता आती है। पानी की बोतलों को पात्र मत बनाओ।  जब आप अपात्र नही होंगे तो पानी भी गिरेगा और खेती भी अच्छी होगी। भक्ति में जो पात्र होता है, वह अपनी पीढ़ियों को भी बाधाओं से तार देता है।

*महादेव ने शब्द रचना की है*

‘प्रभू तेरा द्वार न छूटे रे..छूट जाए संसार..” भजन सुनाते हुए उन्होंने कहा कि किसी के भाग्य पर हस्तक्षेप करने का अधिकार सिर्फ महादेव को है। क्योंकि उन्होंने शब्द की श्रंखला रची थी। हर शब्द के पर्याय होते हैं। संगत से उनके अर्थ भी बदल जाते हैं। जीवन मे जब शब्द स्तुति बन जाये तो नर से नारायण हो सकते हैं और इससे उल्टा होने पर नारायण से नर भी हो जाते हैं।

*धर्म, राम और दलित में सामंजस्य रखें*

देश के धार्मिक विवादों पर वेदना प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि आज धर्म, राम और दलित शब्द के बीच सामंजस्य बिठाने की जरूरत है। राजनीति में इन तीन शब्दों पर घमासान चलते हैं । लोग जिंदाबाद-मुर्दाबाद तो खूब करते हैं, लेकिन उतना जोश ईश्वर की भक्ति में नही दिखाते हैं। भजन में ज्यादा वजन होता है। हम टार्च तो बदल सकते है लेकिन सूर्य तो एक ही रहेगा। सामने काल खड़ा है, हंगामे छोड़कर अब भक्ति-भजन शुरू करें, उससे देश व समाज में शांति आएगी। उन्होंने कहा कि हम चाहे देह बदल लें आदतों की सिम तो वही रहेगी। हमारा स्वभाव जैसा है, उसकी सिम में बुराइयां जमा हो रही है। इसलिये स्वभाव की भक्ति से तारो से जोड़ने का प्रयास करें। अंत मे मानव सेवा समिति के अध्यक्ष शेलेन्द्र यादव एवं पत्नी अन्नू यादव ने श्रीमद भागवत ग्रंथ की महाआरती की।

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