Thursday, 30 January, 2020
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चंद्रयान-2 : स्वदेशी तकनीक से चंद्रमा की सतह पर पहला भारतीय अभियान

भारत बनेगा चंद्रमा की सतह पर रॉकेट उतारने वाला चौथा देश
नवनीत कुमार गुप्ता
न्यूजवेव @ नईदिल्ली
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) का चंद्रयान-2 मिशन अंतरिक्ष अभियान में देश की प्रतिष्ठा को बढाएगा। इसरो द्वारा चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण सोमवार 22 जुलाई, 2019 को दोपहर 2ः43 बजे किया जाएगा।


खास बात यह कि चंद्रयान-2 चांद के दक्षिण ध्रुव क्षेत्र में उतरेगा जहां अभी तक कोई देश नहीं पहुंच सका है। चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव दिलचस्प है क्योंकि इसकी सतह का बड़ा हिस्सा उत्तरी धु्रव की तुलना में अधिक छाया में रहता है। इसके चारों ओर स्थायी रूप से छाया में रहने वाले इन क्षेत्रों में पानी होने की संभावना है। संभावना है कि चांद के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के ठंडे क्रेटर्स (गड्डों) में प्रारंभिक सौर प्रणाली के लुप्त जीवाश्म रिकॉर्ड मौजूद हैं।

अभियान का दूरगामी मकसद

इस अभियान का मकसद चंद्रमा के प्रति जानकारी जुटाना और ऐसी खोज करना है जिनसे भारत के साथ ही पूरी मानवता को फायदा होगा। इन परीक्षणों और अनुभवों के आधार पर ही भावी चंद्र अभियानों की तैयारी में जरूरी बड़े बदलाव लाए जाएंगे जिससे आने वाले समय में चंद्र अभियानों में अपनाई जाने वाली नई तकनीकों को तय करने में मदद मिले।
चंद्रयान-2 द्वारा हमें पृथ्वी के क्रमिक विकास और सौर मंडल के पर्यावरण की अविश्वसनीय जानकारियां मिलने की संभावना है। चंद्रमा की उत्पत्ति और विकास के बारे में कई महत्वपूर्ण सूचनाएं इससे प्राप्त हो सकेंगी। हालांकि चंद्रयान-1 ने चंद्रमा पर पानी होने के सबूत खोज लिए थे। लेकिन यह अभियान इस बात का भी पता लगाएगा कि चांद की सतह और उपसतह के कितने भाग में पानी है।
हम चाँद पर क्यों जा रहे हैं?


चंद्रमा पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है जिसके माध्यम से अंतरिक्ष में खोज के प्रयास किए जा सकते हैं और इससे संबंधित आंकड़े भी एकत्र किए जा सकते हैं। भविष्य में चंद्रमा गहन अंतरिक्ष मिशन के लिए जरूरी टेक्नोलॉजी आजमाने का परीक्षण केन्द्र भी होगा। चंद्रयान-2 खोज के एक नए युग को बढ़ावा देना वाला अभियान साबित होगा जिसके माध्यम से अंतरिक्ष के प्रति हमारी समझ बढ़ेगी और प्रौद्योगिकी की प्रगति को बढ़ावा मिलेगा। ऐसे अभियान वैश्विक तालमेल को आगे बढ़ाने और खोजकर्ताओं तथा वैज्ञानिकों की भावी पीढ़ी को प्रेरित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
चंद्रयान-2 की अहम बातें
* चंद्रमा के दक्षिण धु्रवीय क्षेत्र पर सफल लैंडिंग का संचालन करने वाला पहला अंतरिक्ष मिशन
* स्वदेशी तकनीक से चंद्रमा की सतह पर उतरा जाने वाला पहला भारतीय अभियान
* देश में विकसित टेक्नोलॉजी के साथ चाँद की सतह के आंकडे जुटाने वाला पहला अभियान

प्रक्षेपण यान (लांचर)


भारत का अब तक का सबसे शक्तिशाली और पूरी तरह से देश में ही निर्मित लॉन्चर GSLV Mk&III द्वारा चंद्रयान-2 को प्रक्षेपित किया जाएगा।
ऑर्बिटर
ऑर्बिटर, चंद्रमा की सतह का निरीक्षण करेगा और पृथ्वी तथा चंद्रयान-2 के लैंडर-विक्रम के बीच संकेत रिले करेगा।
विक्रम लैंडर
चंद्रमा की सतह पर भारत की पहली सफल लैंडिंग के लिए लैंडर विक्रम को डिजाइन किया गया है।
प्रज्ञान रोवर
रोवर ए आई-संचालित 6-पहिया वाहन है, इसका नाम ‘‘प्रज्ञान‘‘ है। इसका नाम संस्कृत के ज्ञान शब्द से लिया गया है।

चंद्रयान 2 के मुख्य-पेलोड
*चंद्रयान 2 विस्तृत क्षेत्र सॉफ्ट एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर चंद्रमा की मौलिक रचना के बारे में जानकारियां जुटाएगा।
*इमेजिंग आई आर स्पेक्ट्रोमीटर द्वारा मिनरेलॉजी मैपिंग और जल तथा बर्फ होने की पुष्टि की जाएगी।
*सिंथेटिक एपर्चर रडार एल एंड एस बैंड द्वारा ध्रुवीय क्षेत्र मानचित्रण और उप-सतही जल और बर्फ की पुष्टि की जाएगी।
*ऑर्बिटर हाई रेजोल्यूशन कैमरा द्वारा हाई-रेज टोपोग्राफी मैपिंग की जाएगी।
*चंद्रमा की सतह पर थर्मो-फिजिकल तापभौतिकी प्रयोग भी किए जाएंगे जिससे
*तापीय चालकता और तापमान का उतार-चढ़ाव को मापा जाएगा।
*अल्फा कण एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर और लेजर चालित ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप के माध्यम से लैंडिंग साइट के आसपास मौजूद तत्वों और खनिजों की मात्रा का विश्लेषण किया जाएगा।

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