Tuesday, 20 October, 2020

मौसी ने हॉस्टल में कामकर अनिल को पढ़ाया, नीट में सलेक्ट

माता-पिता दूसरों का खेत जोतकर घर चलाते हैं,अनिल ने प्राप्त की नीट में आल इंडिया 77 रैंक

न्यूजवेव @कोटा

राजस्थान के झुंझनु जिले के बिसाउ कस्बे में रहने वाले छात्र अनिल के पिता रामस्वरूप दूसरे के खेतों में जुताई करते हैं, मां कमला देवी उनका हाथ बंटाती है और घर का काम करती है। कोटा में रहकर एलन से पढ़ने वाले अनिल ने नीट-2020 के परिणामों में 700 अंक प्राप्त कर आल इंडिया 77 रैंक प्राप्त की है।

मौसी ने निभाया मां का फर्ज


अनिल संयुक्त परिवार में रहता है। मौसी मीरा देवी का अनिल का अच्छा लगाव रहा। संयुक्त परिवार एवं दो बेटियों की जिम्मेदारी होने की अनिल की मां कोटा उसके साथ नहीं आ सकी। ऐसे में अनिल की मौसी मीरा ने मां का फर्ज निभाया। वे कोटा आई और यहां एक गर्ल्स हॉस्टल में वार्डन की नौकरी की। जिससे मिलने वाली पगार से महीने का खर्च निकलता था। यह सिलसिला करीब चार साल तक चला। इसी हॉस्टल के छोटे से कमरे में अपने साथ अनिल को भी रखा। चार साल तक कोटा में रहकर पढ़ाई करने के बाद अनिल ने खुद को साबित किया और माता-पिता का सपना पूरा किया।

भाई अशोक से मिली अनिल को प्रेरणा
परिवार की तकदीर बदलने में एलन और कोटा का बड़ा योगदान है। इससे पहले मीरा के पुत्र अशोक ने भी कोटा में रहकर एलन से तैयारी की और सफलता पाई। अशोक वर्तमान में एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर में एमबीबीएस फाइनल ईयर का स्टूडेंट है। जब अशोक का चयन हुआ तब अनिल कक्षा 9 में था लेकिन पिता चाहते थे कि अनिल भी कोटा जाए और पढ़कर डॉक्टर बने, जब कोटा में रहने-खाने और अन्य खर्चों की बात हुई तो पिता रामस्वरूप को कुछ समझ नहीं आया कैसे संभव होगा, इस दौरान पहले से अपने बेटे अशोक के लिए कोटा में रह चुकी मीरा आगे आईं और उन्होंने अनिल के साथ कोटा में रहकर पढ़ाई करवाने के लिए कहा। उन्होंने यहां हॉस्टल में नौकरी की और अपने साथ अशोक को रखा।

दो साल से था 17 की उम्र का इंतजार

अनिल ने कक्षा 10 में 93 प्रतिशत और कक्षा 12 में 87 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। 2018 में मैंने 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की, लेकिन इसके बाद भी मैं नीट की परीक्षा में शामिल नहीं हो सकता था, क्योंकि नीट में शामिल होने के लिए 17 वर्ष की उम्र होना जरुरी है। इसलिए दो साल इंतजार करना पड़ा। इन दो सालों में मैंने जी तोड़ मेहनत की। अब मेरे माता-पिता का सपना साकार हो सका।

फीस में 90% छूट मिली
एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट ने उसकी कमजोर आर्थिक स्थिति देखते हुए शुल्क में बड़ी रियायत। अनिल से सिर्फ रजिस्ट्रेशन शुल्क लिया गया। 90 प्रतिशत तक शुल्क में रियायत के चलते परिवार पर आर्थिक भार भी कम रहा और अनिल बेहतर पढ़ाई कर सका।

ऐसी सफलता से मिलती है सच्ची खुशी

गांव-ढाणियों के अभावग्रस्त परिवारों के ऐसे बच्चे जब कोटा आते हैं और उनके परिवारों के सपन पूरे होते हैं तो हमें बहुत खुशी मिलती है। एलन ऐसी प्रतिभाओं की मदद के लिए सदैव तैयार है और आगे भी इनकी मदद की जाती रहेगी। – नवीन माहेश्वरी, निदेशक, एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट

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