Tuesday, 12 May, 2026

नीट गैस पेपर स्केम- मेहनत, मेरिट और भविष्य के साथ क्रूर खिलवाड़

वीपी पारीक

न्यूजवेव @ नईदिल्ली
त्वरित- पूरे परीक्षा प्रबंधन तंत्र की कमजोरी 

भारत में चिकित्सा शिक्षा केवल एक करियर नहीं बल्कि करोड़ों परिवारों का सपना होती है। एक मध्यमवर्गीय परिवार का बच्चा जब NEET जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी करता है तो उसके पीछे केवल किताबें नहीं होतीं,  माता.पिता के त्याग, वर्षों की मेहनत, सामाजिक उम्मीदें और भविष्य की आशाएँ जुड़ी होती हैं। ऐसे में जब ‘गैस पेपर’ और ‘पेपर लीक’ जैसे घोटाले सामने आते हैं तो केवल परीक्षा प्रणाली नहीं टूटती बल्कि लाखों विद्यार्थियों का विश्वास भी बिखर जाता है।
हाल ही में सामने आए नीट गैस पेपर स्केम ने फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारत की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाएँ अब ईमानदार छात्रों के लिए निष्पक्ष रह गई हैं. खबरों के अनुसारए लाखों रुपये लेकर ऐसे ‘गैस पेपर’ बेचे गए जिनमें 720 में से लगभग 600 अंकों तक के प्रश्न मिलते.जुलते पाए गए। यदि यह सत्य है तो यह केवल एक शैक्षणिक अपराध नहीं बल्कि राष्ट्र के भविष्य पर हमला है।
हर वर्ष यही कहानी दोहराई जाती है। कभी पेपर लीक, कभी सॉल्वर गैंग, कभी डिजिटल फ्रॉड कभी फर्जीवाड़ा। और हर बार सबसे बड़ा नुकसान उस विद्यार्थी का होता है जिसने दिन.रात एक कर ईमानदारी से पढ़ाई की होती है। जो बच्चा सुबह 5 बजे उठकर कोचिंग जाता हैए सोशल मीडिया और मनोरंजन से दूरी बनाता है परिवार की आर्थिक सीमाओं के बावजूद संघर्ष करता है , जब वह ऐसे घोटालों की खबर सुनता है तो उसके भीतर केवल निराशा नहीं, बल्कि व्यवस्था के प्रति अविश्वास जन्म लेता है।
यह केवल एक परीक्षा का मामला नहीं है। यह उस मानसिक दबाव का प्रश्न है जिसमें आज का युवा जी रहा है। NEET की तैयारी करने वाले लाखों छात्र पहले ही अत्यधिक तनाव, अवसाद और प्रतिस्पर्धा के दबाव से गुजरते हैं। ऐसे में यदि उन्हें यह महसूस होने लगे कि मेहनत से अधिक जुगाड और पैसा प्रभावी हो गया है तो यह समाज के नैतिक ढांचे के लिए भी गंभीर खतरा है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन घटनाओं पर अक्सर कार्रवाई तो होती है परंतु सुधार स्थायी नहीं होते। हर साल जांच समितियाँ बनती हैं, बयान दिए जाते हैंए कुछ गिरफ्तारियाँ होती हैं और फिर अगले वर्ष कोई नया घोटाला सामने आ जाता है। यह दर्शाता है कि समस्या केवल कुछ अपराधियों की नहीं बल्कि पूरे परीक्षा प्रबंधन तंत्र की कमजोरियों की है।

परीक्षा प्रक्रिया को डिजिटल ट्रैकिंग और एन्क्रिप्टेड सुरक्षा से जोडें 

अब समय केवल खेद व्यक्त करने का नहीं बल्कि कठोर और संरचनात्मक सुधारों का है। परीक्षा प्रक्रिया को पूर्णतः डिजिटल ट्रैकिंग और एन्क्रिप्टेड सुरक्षा से जोड़ना होगा। पेपर सेटिंग से लेकर वितरण तक हर स्तर पर जवाबदेही तय करनी होगी। शिक्षा माफियाओं और फ्रॉड नेटवर्क पर राष्ट्रीय स्तर पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण विद्यार्थियों का भरोसा लौटाना होगा। एक राष्ट्र तभी आगे बढ़ता है जब उसकी प्रतिभा को न्याय मिलता है। यदि ईमानदार छात्र स्वयं को असुरक्षित और ठगा हुआ महसूस करने लगें तो यह केवल व्यक्तिगत असफलता नहीं बल्कि राष्ट्रीय विफलता बन जाती है।
आज देश के करोड़ों विद्यार्थी केवल एक सवाल पूछ रहे हैं. क्या मेहनत अब भी मायने रखती है. यदि इस प्रश्न का उत्तर व्यवस्था ईमानदारी से नहीं दे पाई तो आने वाले वर्षों में केवल परीक्षाएँ ही नहीं बल्कि युवाओं का विश्वास भी टूटता जाएगा। और किसी भी राष्ट्र के लिए अपने युवाओं का टूटा हुआ विश्वास सबसे बड़ा संकट होता है।

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