Monday, 22 April, 2024
New Steel Bridge built on chambal River in kota city Photo : Rafiq Pathan Photo : Rafiq Pathan

पथरीली धरती पर ठंडी छांव की तलाश

पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल पर विशेष
न्यूजवेव @ कोटा
चंबल किनारे बसे कोटा का भूगोल सबसे अलग हैं। यहां आधी धरती अप्रैल माह से ही आग उगलने लगती है, वहीं आधी ठंडक देती है। मौसम विभाग यहां एयरपोर्ट तथा स्टेशन क्षेत्र में अलग-अलग तापमान दर्ज करता है। दोंनों क्षेत्रों में एक ही समय 2 से 3 डिग्री सेल्सियस का अंतर शहर के जलवायु परिवर्तन को दर्शाता है।
नए कोटा में अनंतपुरा एवं विवेकानंद नगर से कोटडी चैराहे तक पथरीली एवं चट्टानी जमीन पर हरे-भरे पेड़ कम होने तथा प्रदूषण स्तर मानक दरों से प्रायः अधिक रहने से दिन एवं रात का पारा ज्यादा रहता है, जिससे भीषण तपन महसूस होती है। जबकि सीवी गार्डन, आकाशवाणी कॉलोनी, बोरखेड़ा, बजरंगनगर, नयापुरा, खेडलीफाटक, व भीमगंजमंडी-स्टेशन क्षेत्र में 200 फीट नीचे तक मिट्टी होने और पेड़-पौधे ज्यादा होने से गर्मी में ठंडक महसूस होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हाडौती में पहाडियों और जंगलों में चट्टानों पर भी कई प्रजातियों के हरे-भरे पेड़ लगे हुए हैं। इनका व्यापक सर्वे कर शहर के भीतर भी छायादार पेड़ विकसित किए जा सकते हैं। इसमें अर्जुन, धोक,पलाश, अमलतास, बबूल, बरगद, पीपल, नीम व कचनार आदि के पेड़ यहां के तीक्ष्ण जलवायु के अनुकूल हैं।
पेड़ जहां-सुकून वहां
– एक व्यक्ति को प्रतिदिन 0.617 किग्रा ऑक्सीजन की जरूरत होती है।
– 22 पेड़ों से एक व्यक्ति को वर्षपर्यंत ऑक्सीजन मिल सकती है।
– शहर में 10 लाख आबादी को पर्याप्त ऑक्सीजन लेने के लिए 2 करोड़  पेड़ों की जरूरत है। जबकि एक सर्वे के अनुसार, शहर के 60 वार्डों में केवल साढे 64 हजार पेड़ ही हैं।
– प्रत्येक परिवार अपने सदस्यों के जन्मदिन या पुण्यतिथी पर आसपास एक वृक्ष लगाने का संकल्प ले।
– नासा के एक अध्ययन के अनुसार, एक व्यक्ति रोजाना करीब 8 हजार लीटर हवा लेता है और छोडता है, जिसमें केवल 20 प्रतिशत ऑक्सीजन होती है।
घटती पेड़ों की छाया, बढ़ता वाहनों का साया
घटते पेड़ और बढ़ते वाहनों के कारण हमें शहर में पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल रही। विकास के नाम पर शहर में इन दिनों चारों ओर हरे पेड़ों की बलि दी जा रही है। जेडीबी कॉलेज कैंपस में नए कॉलेज के लिए 300 पेड़ काटने की योजना बनी। इसी तरह झालवाड़ रोड़ एनएच-12 पर फोरलेन के निर्माण में 50 किमी दूरी में सैकडों पेड़ धराशाही कर दिए गए। यूआईटी ने सौंदर्यीकरण के नाम पर वृक्षारोपण के जितने दावे किए, उनमें से 20 प्रतिशत भी विकसित नहीं हो रहे। घटोतकच्छ सर्किल से गोबरिया बावड़ी तक विकसित की गई सघन हरितिमा पट्टी पर अतिक्रमण हो जाने से पेड़ काटे जा रहे हैं। इनमें पॉलीथीन व गंदगी के ढेर लगे हैं। क्लीन सिटी-ग्रीन सिटी के अभियान कई बार चलाए गए लेकिन शहर को हरा-भरा नहीं बनाया जा सका।
इसलिए सूख रहे हैं पेड़
– पेड़ की जडें भी सांस लेती है। सड़कों को चैड़ा करने या नई सड़को के निर्माण के समय पेड़ों की जड़ों को डामर या सीमेंट से पैक कर दिया जाता है।
– पेड़ों को जिंदा रखने के लिए सड़क व किनारों पर खाली भूमि पर पेड़ों की जड़ों के आसपास कच्ची जमीन छोडना जरूरी है। शहर में सड़क निर्माण के समय पर्यावरण विशेषज्ञों से सलाह ली जाए।
– सड़क किनारे थड़ी या दुकान लगाने वाले लोग पेड़ों में कीलें ठोककर अपनी प्रचार सामग्री लटका देते हैं, जिससे धीरे-घीरे पेड़ सूखने लगते हैं।
– नए शहर के सैकड़ों हॉस्टल में प्रत्येक में 50 से अधिक एयरकंडीशनर लगे हैं लेकिन बदले में एक भी पेड़ नहीं लगाया गया।
डिवाइडरों पर इन पौधों से हो हरियाली
शहर के डिवाइडरों को पहले की तुलना में काफी हरा-भरा किया गया। इन्हें हरा-भरा बनाए रखने के लिए क्रोटन,, कोलियस, एकेलाइफा, थिविसिया, बोहिनिया, निरीयम, केसिया, अशोक, थूजा आदि किस्मों के पौधे लगाने से इन्हें मवेशी नहीं खा सकते। स्मार्ट सिटी के पहले चरण में नए कोटा में सघन वृक्षारोपण अभियान चलाया जाए। हाल ही में गणेश उद्यान विकसित होने तथा श्रीनाथपुरम, आरकेपुरम, विवेकानंद नगर आदि में पार्को में हरियाली पर विशेष ध्यान देने से नागरिकों को पैदल सैर करने के लिए राहत मिलती है।
चंडीगढ़ या बैंगलुरू से लें सीख
शहर के मास्टर प्लान में ग्रीन बेल्ट व पार्कों की सही प्लानिंग करके उस पर अमल किया जाए तो खूबसूरती कई गुना बढ़ सकती है। ग्रीन सिटी में अव्वल रहने वाले चंडीगढ़ शहर में एक सडक मार्ग का नाम ही अमलतास रोड़ है। वहां सडक के दोनों किनारे पर अमलतास के घने पेड़ लगाए गए। जब ये पेड़ पीले फूलों से आच्छादित होते हैं तो नजारा बेहद खूबसूरत हो जाता है। बैंगलुरू में जगह-जगह विकसित ग्रीन पार्क देश में सबसे अलग हैं। हरियाणा में मुख्य मार्गों के डिवाइडर पर पौधों के लिए ज्यादा जगह छोडने से वहां की सड़कें हरियाली से आच्छादित हैं।
– एसएन गुप्ता, रिटा. सीनियर टाउन प्लानर
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