Sunday, 7 June, 2020

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कोविड-19 डायग्नोसिस टूल जल्द

  • एकेटीयू, लखनऊ और केजीएमयू के संयुक्त अनुसंधान से जल्द विकसित होगा कारोना का जांच उपकरण
  • मेडिकल कॉलेज कोटा के कोरोना मरीजों का डेटाबेस 

न्यूजवेव @लखनऊ

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम टेक्नीकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ एवं किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित ऐसा मॉडल विकसित किया जा रहा है, जिससे कोविड-19 रोगियों की पहचान आसानी से की जा सकेगी। इस अत्याधुनिक मॉडल में जांच के लिए एक्स-रे इमेज का प्रयोग किया जाएगा। शनिवार को एकेटीयू लखनऊ के कुलपति प्रो.विनय कुमार पाठक एवं केजी मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो.एम.एल.बी.भटट् ने वीडियो कान्फ्रेसिंग से पत्रकारों को यह जानकारी दी।

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम टेक्नीकल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो.विनय कुमार पाठक ने बताया कि कम्प्यूटर विजन की मदद से एआई आधारित इस मॉडल में कोविड-19 रोगियों की पहचान करने के लिए प्रारंभिक कार्य अमेरिका, ब्रिटेन, चीन व कुछ अन्य देशों के शोधकर्ताओं द्वारा किये जा रहे है। इसे प्रभावी बनाने के लिये डेटासेट महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि रिसर्च में कोरोना रोगियों की चेस्ट एक्स-रे इमेज का संग्रह तथा लेबल किए गए डेटासेट का उपयोग किया जाएगा। डेटासेट को कोविड-19, निमोनिया, सॉर्स, फ्लू और सामान्य लोगों के चेस्ट एक्स-रे इमेज या सीटी स्केन की जरूरत होती है, जिससे यह सिस्टम कोविड-19 को अन्य बीमारी से अलग कर सके। आर्टिफिशियल इंटेलीजेन्स आधारित मॉडल इस मॉडल मंे डीप लर्निंग सीएनएन नेटवर्क का भी उपयोग किया जायेगा।
किंग जार्ज मेेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो.एम.एल.बी. भटट् ने बताया कि इस शोध प्रक्रिया में केजीएमयू द्वारा कोविड-19 और गैर कोरोना रोगियों का डेटा दिया जायेगा, जिसके बाद एकेटीयू के वैज्ञानिक मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से अत्याधुनिक डायग्नोसिस मॉडल विकसित करेंगे। इस मॉडल से कोविड-19 मरीजो की पहचान बहुत सरल हो जायेगी। इस संयुक्त रिसर्च का मुख्य उद्देश्य देश में ऐसी सरल एकल जांच प्रणाली विकसित करना है, जो रियल टाइम सिचुएशन में एक्सरे की मदद से कोविड-19 रोगी की पहचान कर सके।
उन्होंने बताया कि इस रिसर्च में कुछ अन्य संस्थान व वैज्ञानिक भी मदद कर रहे हैं। इनमें उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई, इटावा के कुलपति प्रो.राज कुमार, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, कोटा के प्रिंसिपल डॉ. विजय सरदाना, सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज,आगरा के प्रिंसिपल डॉ जीके अनेजा, आरएमएल आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के डॉ एके त्रिपाठी, सीएमएस, बलरामपुर हॉस्पिटल, लखनऊ के डॉ राजीव लोचन आदि सहयोग कर रहे हैं। इन सभी चिकित्सा संस्थानों से मेडिकल इनपुट लेकर इंटरनेशनल लैब के सहयोग से इस संयुक्त अनुसंधान को सफल बनाया जायेगा।

मेडिकल कॉलेज, कोटा  के  कोविड-19  रोगियों का डेटा भी शामिल
मेडिकल कॉलेज, कोटा के प्रिंसिपल डॉ. विजय सरदाना ने बताया कि इस मॉडल को विकसित करने के लिए कोविड-19 रोगियों की एक्स-रे इमेज दी जा रही है। अत्याधुनिक मॉडल विकसित हो जाने पर इसे कोटा मेडिकल कॉलेज में उपयोग कर परीक्षण किया जाएगा।
रिसर्च प्रोजेक्ट में शामिल पोस्ट ग्रेजुएट स्टडीज एंड रिसर्च, एकेटीयू के प्रोफेसर प्रो.एम.के.दत्ता ने बताया कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उपकरण हृ्रदय और फेफड़ो के साउंड से कार्डियक और प्लेमनरी बीमारियों की जांच करने में सक्षम है। प्रो दत्ता इससे पहले फंडस इमेज से डायबिटिक रेटिनोपैथी, ग्लूकोमा और मैक्यूलर एडमा जैसी गंभीर बीमारियों का पता लगाने के लिए एआई आधारित रेटिना इमेज विश्लेषण में सफल रिसर्च कर चुके हैं। उनके शोध में अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, चेक गणराज्य, स्पेन, जर्मनी, ताइवान, चीन, ऑस्ट्रेलिया, कोरिया आदि देशों के वैज्ञानिकों का सहयोग भी शामिल है।
केजीएमयू के रेडियो डायग्नोसिस विभाग में एचओडी डॉ.नीरा मलिक ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग कॉर्डियोलाजी एवं रेडियोलॉजी के क्षेत्र में भी किया गया है। एआई आधारित मॉडल के माध्यम से एल्गोरिद्म जेनेरेट किया जा सकेगा। जिससे कोविड-19 मरीजों की जांच आसान हो जायेगी। रेडियो डायग्नोसिस विभाग के डॉ.अनीत परिहार ने बताया कि इस ऑटोमेटेड टूल से कम समय में ज्यादा मरीजों की जांच हो सकेगी, जिससे इसकी एक्यूरेसी बढ़ती जाएगी। इससे स्क्रीनिंग टेस्ट में भी बढ़ौतरी होगी।

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