Tuesday, 23 April, 2024

नीति आयोग ने दिया ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ से रिसर्च को बढ़ावा

. AI for All थीम से नीति निर्माताओं, प्रमुख कंपनियों, स्टार्टअप, यूनिवर्सिटी आदि को जोडने पर फोकस 
. स्मार्ट सिटी, निर्माण, उर्जा, एग्रीकल्चर, एजुकेशन, स्किल डेवलपमेंट व हैल्थ सहित कई क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लाभ

नवनीत कुमार गुप्ता
न्यूजवेव @ नईदिल्ली

आने वाला समय कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का रहेगा। वर्ष 2030 तक चीन जीडीपी का 26 प्रतिशत और ब्रिटेन 10 प्रतिशत निवेश कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संबंधित गतिविधियों और बिजेनस पर करेंगे।

तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था एवं आबादी में दूसरा सबसे बड़ा देश होने के कारण भारत के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का खास महत्व है। इसे देखते हुए सरकार द्वारा नीति आयोग को इस विषय पर डिटेल रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।

दुनिया भर में जब सामाजिक-आर्थिक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के फायदों पर विचार हो रहा है तो भारत में भी रिसर्च एंड डवलपमेंट को बढ़ावा देने की पहल की जा रही है। नीति आयोग ने इस नए एवं उभरते हुए क्षेत्र में शोध एवं विकास को बढ़ावा के लिए नेशनल प्रोग्राम की रूपरेखा पेश की है।

नीति आयोग द्वारा हाल में प्रस्तुत किए ।प् वित ।सस एआईफॉरआल नामक रिपोर्ट में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को ऐसे माध्यम से रूप में देखा जा रहा है, जो मस्तिष्क की क्षमता बढ़ाने में सहायक होगा। इस रिपोर्ट में में देश में शोध के लिए सेंटर ऑफ रिसर्च एक्सीलेंस और इंटरनेशनल सेंटर फॉर ट्रांसफॉरमेशनल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समेत दो स्तरीय संरचना पर जोर दिया गया है।

स्मार्ट सिटी, हैल्थ, एजुकेशन व स्किल डेवलपमेंट में भी


नीति आयोग ने पॉवर, स्मार्ट सिटी, निर्माण, एग्रीकल्चर, एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट और हैल्थ सहित कई क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लाभ लेने के लिए सटीक नीति की जरूररत महसूस की गई है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में विकास के लिए मुख्यतः पांच स्तंभों नीति निर्माताओं, बड़ी कंपनियों, स्टार्टअप, यूनिवर्सिटी और अन्य भागीदारों को आपस में मिलकर कार्य करना होगा।

पहले कम्प्यूटर की प्रोसेसिंग क्षमता बहुत अधिक नहीं थी, लेकिन आज सुपर कम्प्यूटरों का प्रयोग उच्च-गणना आधारित कार्यों में किया जा रहा है। मौसम की भविष्यवाणी, जलवायु शोध, अणु मॉडलिंग आदि अनेक क्षेत्रों में सुपर कम्प्यूटरों का उपयोग किया जा रहा है। कुछ महीनों पहले ही पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान, पुणे में मौसम के पूर्वानुमान के लिए प्रत्युष नामक सुपर कम्पयूटर स्थापित किया गया है।

भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा ड्राइवर रहित वाहनों के संचालन सहित अनेक ऐसे कार्य देखने के मिल सकते हैं, जो फिलहाल असंभव लगते हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा अनेक रोगों का ईलाज भी किया जा सकेगा।

रोगियों के मस्तिष्क को स्केन पर रिसर्च
हरियाणा के मानेसर में स्थित राष्ट्रीय मस्तिष्क अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिक मस्तिष्क के अलग-अलग हिस्सों की विभिन्न प्रवृत्तियों का पता लगाने के लिए रोगियों के मस्तिष्क को स्कैन करने की परियोजना पर कार्य कर रहे हैं। भविष्य में वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की जा रही कृत्रिम बुद्धिमत्ता में सभी प्रकार के मस्तिष्क की तस्वीरों का डाटाबेस होगा, ताकि उनमें होने वाले किसी भी परिवर्तन की जानकारी मिल सके। इससे शरीर में होने वाले रासायनिक परिवर्तनों के विषय में जानकारी प्राप्त हो सकेगी। इस प्रकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानवीय मस्तिष्क की जटिलताओं को समझने में सहायक साबित होगी।

अमेरिका, फ्रांस, जापान, चीन और ब्रिटेन के बाद भारत ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में जो दस्तावेज प्रस्तुत किया है, वह देश के विकास के लिए मार्गदर्शक साबित होगा। (इंडिया साइंस वायर)

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