Sunday, 27 September, 2020

कोरोना से कोटा में 4500 करोड़ का कारोबार प्रभावित

कोरोना इम्पेक्ट:

  • कोचिंग संस्थानों व हॉस्टलों में छाई वीरानी, 2 लाख परिवार आर्थिक संकट में
  • 10 बडे़ कोचिंग संस्थान, 2500 हॉस्टल व 5000 पीजी रूम तथा 4 हजार मैस पिछले 6 माह से खाली

अरविंद
न्यूजवेव @ कोटा
कोचिंग की राजधानी कोटा शहर में कोरोना महामारी का संक्रमण इन दिनों चरम पर है। इसके भय से बाजारों में मंदी व सन्नाटा है। देश के सभी राज्यों से जेईई-मेन, एडवांस्ड तथा नीट की क्लासरूम कोचिंग ले रहे 1.50 लाख से अधिक विद्यार्थियों के घर लौट जाने से हर क्षेत्र में वीरानी छा गई है। कोचिंग व हॉस्टल एसोसिएशन के सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष शहर में करीब 4500 करोड़ का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। करीब 50 हजार रिपीटर्स विद्यार्थी जो शिक्षा के साथ रोजगार भी कर रहे थे, वे भी अपने घरों को पलायन कर गये हैं।
कोटा में कोचिंग उद्योग शहर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। कोरोना महामरी के चलते कोचिंग संस्थानों, हॉस्टल व मैस से जुडे़ करीब 2 लाख निम्न व मध्यम आय वालों लोगों के लिये आजीविका का संकट पैदा हो गया है। पिछले 5 माह में अन्य राज्यों से यहां आकर फुटपाथों पर छोटे-छोटे काम-धंधे करने वाले निम्न वर्ग के लोग थक-हारकर घरों को लौट चुके हैं।
कोचिंग से जुड़े हर कारोबार में सन्नाटा


कोटा में चारों ओर रेजीडेंशियल ब्वायज व गर्ल्स हॉस्टल, होटल, अपार्टमेंट, मैस व टिफिन सेंटर, रेस्तरां, मोबाइल, स्टेशनरी, ऑटोरिक्शा, वैन व टैक्सी, रेडीमेड शॉप, सब्जी, फल व जूस सेंटर, पोहे, जलेबी के ठेले, कचोरी व चाय-कॉफी सेंटर, साइबर कैफे, प्रोविजन स्टोर, क्रॉकरी, बर्तन, शॉपिंग मॉल, इलेिक्ट्रकल व इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम, फर्नीचर, टू-व्हीलर व फोर व्हीलर शोरूम, साइकिल, प्रापर्टी व रियल एस्टेट आदि व्यवसाय पूरी तरह कोचिंग से जुडे़ हुये हैं। इतना ही नंहीं, कई बैंकों के टर्नओवर भी कोचिंग इंडस्ट्री से जुडे हुये थे। पिछले 5 माह में कोचिंग विद्यार्थियों के पलायन से 90 फीसदी करोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
ऐसे समझें कोटा की इकोनॉमी


कोटा के विभिन्न कोचिंग संस्थानों में 1.50 लाख से अधिक कक्षा-6 से 12वीं तक के विद्यार्थी क्लासरूम कोचिंग ले रहे थे। विद्यार्थियों की संख्या की तुलना में इनके लिये 2500 से अधिक रेजीडेंशियल हॉस्टल तथा विभिन्न कॉलोनियों में 5000 से अधिक मकानों में पेइंग गेस्ट रूम सुविधा होने से लगभग 3.50 लाख कमरे किराये पर उपलब्ध रहे। एक कोचिंग विद्यार्थी का प्रतिवर्ष 1.30 लाख रू कोचिंग फीस, 1.50 लाख रू. हॉस्टल व मैस खर्च, 20 हजार रू. स्टेशनरी व अन्य मदों पर खर्च होता है। अर्थात् 3 लाख रू से अधिक सालाना खर्च करने वाले 1.50 लाख विद्यार्थियों से कोटा के मार्केट में प्रतिवर्ष 4500 करोड़ रू. से अधिक राशि का मनी फ्लो बना रहता था। कोरोना महामारी के चलते मार्च से ही इसके ठप हो जाने से सभी क्षेत्रों में स्वतः तालाबंदी के दृश्य दिखाई दे रहे हैं।
हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक लोढ़ा ने बताया कि कोचिंग संस्थान के आसपास एक किमी की दूरी तक नये हॉस्टल के निर्माण कार्य निरंतर जारी थे। जिसमें बारां रोड पर प्रस्तावित प्रमुख कोचिंग संस्थान में इस सत्र से क्लासरूम कोचिंग प्रारंभ होनी थी लेकिन मार्च मंे कोरोना महामारी के कारण यह कार्य ठप हो गया, जिससे आसपास नवनिर्मित व निर्माणाधीन हॉस्टल्स भी शून्य पर आ गये। इस क्षेत्र में बाहरी राज्यो के निवेशकों ने बडी संख्या में हॉस्टल इंडस्ट्री में बडी राशि का निवेश किया था। आर्थिक विशेषज्ञों का आकलन है कि इस मंदी से उबरने में कोटा को 2-3 वर्ष लग सकते हैं।
एक हॉस्टल की लागत 2 करोड़ रू.


हॉस्टल एसोसिएशन के सुनील गोडवानी ने बताया कि शिक्षानगरी कोटा में कोचिंग संस्थानों के नजदीक खाली भूखंडों की लागत 8000 से 12000 वर्गफीट तक चल रही थी, जो नईदिल्ली, नोएडा, बैंगलूरू की कीमतों से भी अधिक थी। एक हॉस्टल के लिये एक करोड़ रूपये में भूमि खरीदने के बाद 1.50 करोड़ रू. में जी प्लस पांच से छह मंजिल हॉस्टल के निर्माण होने लगे थे। जबकि जयपुर में हॉस्टल के लिये जी प्लस थ्री की अनुमति दी जाती है। कोटा में 80 प्रतिशत हॉस्टल नगर निगम से निर्माण अनुमति लिये बगैर बना दिये गये। जिसमें व्यापक भ्रष्टाचार हुआ।
बढ़ती ईएमआई की चुनौती
पिछले 4-5 वर्षों से कोटा में नये हॉस्टल के निर्माण पर ऋ़ण देने के लिये एलआईसी हाउसिंग फायनेंस, एसबीआई, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी आदि बैंकों में होड मची रही। प्रायःसभी हॉस्टल्स पर 15से 20 वर्ष के लिये 1 से 2 करोड़ रूपये के लोन लिये गये। इनकी मासिक किश्तें (ईएमआई) लाखों रूपये में देय हैं। बैंकों ने दिसंबर,2020 तक किश्तें चुकाने पर छूट दी है लेकिन इसके बाद बडी हुई ईएमआई की राशि चुकाना अधिक चुनौतीपूर्ण होगा। दूसरी ओर, अगले वर्ष में एक कोचिंग छात्र के लिये तीन खाली कमरे की सुविधा मिलने से प्रतिस्पर्धा बढेगी। जिससे मासिक किराये में काफी गिरावट देखने को मिलेगी। मार्केट में आर्थिक मंदी से प्रमुख बैंकों में एनपीए के मामले तेजी से बढंेगे।
हॉस्टल लीज पर लेने से पीछे हटे
हॉस्टल संचालक उमेश मगलानी ने बताया कि कोटा में प्रतिवर्ष 25 फीसदी ग्रोथ होने से नये हॉस्टल्स के निर्माण जारी रहे। लेकिन 2020 में कोचिंग विद्यार्थियों की संख्या अचानक घट जाने से कई हॉस्टलों को लीज पर लेने वालों ने हाथ खींच लिये। इस वर्ष मार्च में ही हॉस्टल लीज पर देने से पूर्व ही कोरोना वायरस का प्रकोप आ जाने से सभी हॉस्टल खाली हो गये, जिससे इन्हें लीज पर लेने वाले भी पीछे हट गये, नतीजन संचालकों को अपने हॉस्टलों पर ताले लगाने पडे़। इनमें काम करने वाले कर्मचारियों को भी बेरोजगारी झेलनी पड रही है। हम बच्चों के कमरों में रखे सामान पार्सल से भेज रहे हैं।
100 फीसदी टू-लेट के बोर्ड लगे


नये कोटा व नदी पार क्षेत्र की 25 से अधिक आवासीय कॉलोनियों में कोचिंग विद्यार्थियों को पेइंग गेस्ट रूम किराये पर देने से हर घर की आय दोगुना हो़ गई थी। कई पीजी मकानों में मैस व टिफिन सेंटर्स भी चल रहे थे। पिछले 5 वर्षों में प्रतिवर्ष कोचिंग विद्यार्थियों की संख्या बढने से सभी मकान हॉस्टल के रूप में मल्टीस्टोरी होने लगे थे। लेकिन बडी संख्या में कोचिंग विद्यार्थियों के चले जाने से सभी मकानों में एक से दो फ्लोर सूने हो गये। हर तरफ टू-लेट की तख्तियां दिखाई देती हैं। कुछ संस्थानों के कोचिंग फैकल्टी भी पीजी व हॉस्टल व्यवसाय से दोहरी आय कर रहे थे, उनको कोचिंग संस्थान व हॉस्टल दोंनो जगहों से खाली हाथ रहना पड़ रहा है।
खाली होने लगे दुकानें व शोरूम
कोटा में प्रमुख कोचिंग संस्थान एलन, रेजोनेंस, वाइब्रेंट एकेडमी, कॅरिअर पॉइंट, न्यूक्लियस एजुकेशन, सर्वोत्तम, मोशन आईआईटी, बंसल क्लासेस, राव आईआईटी आदि के कैंपस से जुडे़ इंद्रविहार, राजीव नगर, रोड नंबर-1, इलेक्ट्रानिक कॉम्पलेक्स, विज्ञाननगर, महावीर नगर, जवाहर नगर, शक्तिनगर, दादाबाडी, लैंडमार्क सिटी, कुन्हाडी, रिद्धि-सिद्धि नगर व बारां रोड आदि क्षेत्रों में आवासीय कॉलोनियों व मार्केट में सन्नाटा छाया हुआ है। तलवंडी मुख्य मार्ग पर दुकानदारों ने 25 से 40 हजार रू प्रतिमाह किराये पर चल रही कई दुकानें व शोरूम खाली कर दिये हैं। ग्राहक नहीं होने से बिजली के बिल चुकाना भी मुश्किल हो रहा है। तेजी से विकास कर रहे कोटा शहर की इकोनॉमी पर कोरोना का कहर भारी पड रहा है, इससे उबरने में शहर को एक-दो वर्ष लग सकते हैं। 2 लाख कोचिंग विद्यार्थियों के साथ ही कोरोना संक्रमण के भय से बेरोजगार हुये निर्माण व अन्य क्षेत्रों में काम कर रहे 50 हजार से अधिक दिहाडी मजदूर अपने गांवों की ओर पलायन कर चुके हैं। इससे शहर में चारों ओर सन्नाटा दिखाई देता है।

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