Wednesday, 25 November, 2020

अब बिजली कम्पनियों के निजीकरण का रास्ता खोला

सरकार ने सब्सिडी खत्म करने के लिये निजीकरण किया तो बिजली होगी और महंगी
न्यूजवेव@ नईदिल्ली/जयपुर

केंद्र सरकार ने 20 सितंबर को सभी राज्यों को ‘स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट’ भेजकर सबकों चकित कर दिया ह। दरअसल यह दस्तावेज बिजली वितरण कंपनियों के संपूर्ण निजीकरण करने की योजना का हिस्सा है। इस महत्वपूर्ण दस्तावेज में बताया गया कि बिजली डिस्ट्रीब्यूशन का निजीकरण किस प्रकार किया जाए। केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने वेंडर दस्तावेजों पर 5 अक्तूबर तक स्टेकहोल्डरों से आपत्तियां मांगी हैं।
केंद्र सरकार द्वारा सभी राज्यों को यह पत्र जारी करने के बाद अब बिजली कंपनियों के निजीकरण का भी रास्ता साफ हो गया है। दस्तावेज को इस प्रकार तैयार किया गया है कि किसी प्रदेश को घाटे में चल रहे बिजली डिस्ट्रीब्यूशन का निजीकरण करने में ज्यादा देर नहीं लगेगी।
इससे और महंगी होगी बिजली
बिजली कंपनियों के निजीकरण का सबसे अधिक असर आम उपभोक्ताआंे पर पड़ेगा। घरेलू बिजली दरें महंगी होनी तय हैं, साथ ही इसका असर किसानों पर भी पड़ने जा रहा है। नई नीति और निजीकरण के बाद सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी समाप्त हो जाने से स्वाभाविक रूप से सभी उपभोक्ताओं के लिए बिजली महंगी होगी।
नए कानून के अनुसार बिजली दरों में मिलने वाली सब्सिडी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और किसानों सहित सभी घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली की पूरी लागत देनी होगी।
क्या कहता है बिजली संशोधन कानून
इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल,2020 में कहा गया है कि नई टैरिफ नीति में आने वाले तीन वर्षों में सब्सिडी और क्रास सब्सिडी समाप्त कर दी जाएगी और किसी को भी लागत से कम मूल्य पर बिजली नहीं दी जाएगी। विशेषज्ञों ने बताया कि अभी किसानों, गरीबी रेखा के नीचे और 500 यूनिट प्रतिमाह बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को सब्सिडी मिलती है जिसके चलते इन उपभोक्ताओं को लागत से कम मूल्य पर रियायती बिजली मिल रही है।
बिजली कर्मचारियों का भविष्य संकट में
निजीकरण का नया कानून पारित होने के बाद लाखों बिजली कर्मचारी प्रभावित होंगे। उनकी सबसे बड़ी चिंता ट्रांसफर स्कीम है जिसमें स्पष्ट लिखा है कि निजीकरण के बाद कर्मचारी निजी कंपनी के कर्मचारी हो जाएँगे और सरकारी डिस्कॉम कर्मचारियों की सेवान्त सुविधाएँ जैसे ग्रेच्युटी, पेशन का उत्तरदायित्व केवल उसी दिन तक लेगी जिस दिन तक वे सरकारी डिस्कॉम के कर्मचारी हैं।

उड़ीसा इसका उदाहरण है। टाटा पॉवर ने उड़ीसा के विद्युत नियामक आयोग को लिखित तौर पर बता दिया है कि टाटा पॉवर कर्मचारियों के मामले में उनकी पूर्व शर्तों को स्वीकार नहीं करता और टाटा पॉवर की शर्तों पर कर्मचारियों को काम करना होगा अन्यथा उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। साथ ही निजी कंपनिया संविदाकर्मियों को भी बाहर कर देगी जिससे हजारों कर्मियों की नौकरी जाने वाली है।

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