Sunday, 7 March, 2021

राज्य के किसानों को दिन में भी थ्री-फेज बिजली मिलेगी

राज्य के 15 जिलों में सुविधा शुरू, बाकी जिलों में इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य जारी, 2023 तक लक्ष्य पूरा
न्यूजवेव @ जयपुर
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राजस्थान के किसानों को कडाके की सर्दी में रात्रि में खेतों पर सिंचाई करने में तकलीफ होती है। इसलिए राज्य सरकार ने फैसला किया है कि किसानों को सिंचाई के लिये दिन में भी थ्री फेज बिजली उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए बजट में घोषणा कर दी गई है कि 1 अप्रैल 2023 तक तीन चरणों में राज्य के सभी जिलों में दिन में थ्री फेज बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए सरकार ने आधारभूत ढांचे को विकसित करने का काम भी शुरू किया है। जिसके तहत अगले तीन वर्षों में 220 केवी के 6 नए जीएसएस, 132 केवी के 30 नए जीएसएस, 33 केवी के 287 नए सब स्टेशन स्थापित किया जाना प्रक्रियाधीन है। साथ ही 1,500 सब स्टेशनों की क्षमता में वृद्धि की जा रही है।


गहलोत ने कहा कि पहले चरण में 16 जिलों में 1 अप्रैल 2021 तक दिन में थ्री फेज बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य था। किसान हित में 15 जिलों में इसे समय से छह माह पूर्व अक्टूबर 2020 में ही पूर्ण कर लिया गया है। फिलहाल अजमेर, प्रतापगढ़, उदयपुर, भीलवाड़ा, राजसमन्द, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, चित्तौड़गढ़, पाली, सिरोही, जालोर, कोटा, बूंदी, झालावाड़ एवं धौलपुर में दिन में बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। जैसलमेर में मार्च 2021 तक दिन में थ्री फेज कृषि बिजली उपलब्ध होगी।
दूसरे चरण में दिनांक 1 अप्रैल, 2022 तक सीकर, झुंझुनूं, जयपुर, जोधपुर एवं भरतपुर और तीसरे चरण में दिनांक 1 अप्रैल, 2023 तक शेष जिलों बाड़मेर, अलवर, दौसा, नागौर, टोंक, करौली, सवाई माधोपुर, बारां, बीकानेर, चुरू, श्रीगंगानगर एवं हुनमानगढ़ के सभी ग्रामीण फीडरों पर दिन के ही ब्लॉक में विद्युत आपूर्ति के लिए आधारभूत तंत्र को सुदृढ़ किया जा रहा है।

पिछले दिनों कई जगहों पर भाजपा नेताओं ने राजनीतिक हित साधने के लिए किसानों को भड़काया और सब-स्टेशनों पर किसानों से धरने दिलवाए। ऐसा उन जिलों में किया गया जहां दूसरे और तीसरे चरण में दिन में थ्री-फेज बिजली देना प्रस्तावित है और इसके लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। भाजपा नेताओं ने बिजली कर्मचारियों को भयभीत कर उन पर दबाव बनाया। दबाव के कारण कुछ जिलों के अधीक्षण अभियंताओं ने अपने स्तर पर फैसला कर बिना पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर के दिन में बिजली उपलब्ध कराने की कोशिश की। इससे पूरे बिजली सिस्टम में गड़बड़ी आ गई और विद्युत आपूर्ति में समस्या आ गई। इसके कारण राज्य के कई हिस्सों में थ्री फेज के साथ-साथ सिंगल फेज बिजली देने में भी परेशानियां सामने आई हैं। किसानों से अपील है कि वो ऐसे बहकावे में ना आएं। बिना जरूरी सिस्टम विकसित किए दिन में बिजली उपलब्ध करवाना संभव नहीं है। दबाव में ऐसी कोशिश करने से समूची बिजली व्यवस्था ठप हो सकती है जिससे सभी किसानों और पूरे प्रदेश की जनता को परेशानी होगी।
कांग्रेस सरकार द्वारा दिन में बिजली देने के फैसले का स्वागत करने की बजाय भाजपा ने राजनीतिक स्वार्थ साधने के लिए किसानों को भड़काया। अगर प्रदेश भाजपा नेता किसानों को लेकर इतने ही चिंतित हैं तो वे अपने केंद्रीय नेताओं को सलाह दें कि वे दिल्ली में धरना दे रहे किसानों की मांगों को मानें। सर्दी में एक महीने से धरना देने के कारण 40 किसान भाइयों की मौत दिल्ली में हो चुकी है।
सीएम ने खबर को गलत बताया
एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र में 31 दिसंबर को प्रकाशित तीन किसानों की मृत्यु की खबर ‘सरकार की जिद, रात में ही बिजली, तीन किसानों की मौत‘ तथ्यात्मक नहीं है। इस खबर में लिखा गया कि रात में थ्री फेज बिजली मिलने की वजह से सिंचाई करते वक्त तीन किसानों रामलाल धोबी, पूरणमल मीणा और हरीश धाकड़ की मृत्यु हो गई है। जांच में पाया गया है कि इन तीनों किसानों के पास कोई कृषि कनेक्शन नहीं है। रामलाल धोबी और पूरणमल मीणा के खेतों की सिंचाई नहर से होती है। साथ ही, रामलाल धोबी और पूरणमल मीणा के गांव बूंदी और हरीश धाकड़ का गांव झालावाड़ जिले में है। ये दोनों जिले वो हैं जहां अक्टूबर, 2020 से ही रात की बजाय दिन में थ्री फेज बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। अतः ये खबर पूर्णतः तथ्यात्मक नहीं है। मीडिया मुद्दों की तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करें जिससे लोगों का विश्वास कायम रहे।

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