Friday, 23 February, 2024

घर में खडी कार के नंबर से तीन टोल प्लाजा ने वसूली राशि

टोल प्लाजा पर बढ़ रही है डिजिटल धोखाधडी की शिकायतें, वाहन चालक परेशान
न्यूजवेव@कोटा 

इन दिनों राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा से डिजिटल धोखाधडी की घटनायें बढती जा रही हैं। महावीर नगर निवासी एके गुप्ता ने बताया कि मंगलवार को मोबाइल पर मेसेज मिले कि कोटा से जयपुर एनएच मार्ग पर स्थित तीन टोल प्लाजा पर उनकी कार के नम्बर से टोल राशि फास्टेग के माध्यम से काट ली गई है। जबकि उनकी गाडी घर पर खडी थी।
उन्होंने फास्टेग जारी करने वाले पेटीएम बैंक को शिकायत दर्ज करवाई कि बरखेडा टोल प्लाजा, जयपुर पर प्रातः 7ः25 बजे 120रू, सोनवा टोल, टोंक पर प्रातः 8ः24 बजे 100रू एवं किशोरपुरा टोल प्लाजा, देवली पर प्रातः 9 बजे 165 रू उनकी गाडी के नंबर से फास्टेग द्वारा लिये गये। शाम को उक्त तीनों टोल प्लाजा से आधी राशि दोबारा काट ली गई। इस तरह एक दिन में तीन टोल प्लाजा पर कुल 570 रू की राशि उनके फास्टेग नंबर से काट ली गई जबकि उनकी कार नंबर RJ-20 CH 7744 घर पर ही खडी थी।
फास्टेग के हेल्पलाइन नबर-1033 से संपर्क किया तो जवाब मिला कि हम सिर्फ सडक पर होने वाली दुर्घटना में ही मदद कर सकते हैं। टोल प्लाजा पर गलत भुगतान होने पर पेटीएम से बात करें। उन्होंने पेटीएम बैंक के नंबर हेल्प नंबर 1800-120-4210 पर संपर्क किया तो उन्होने एक मैसेज के माध्यम से लिखित डिजिटल शिकायत दर्ज कर ली लेकिन कोई भी अधिकारी यह जानकारी नहीं दे सके कि टोल प्लाजा पर ऐसी डिजिटल धोखाधडी के लिये कौन जिम्मेदार है। उन्होंने पिछले 6 माह में कोटा-जयपुर मार्ग पर कार से कोई यात्रा नहीं की है।
उन्होंने बताया कि फास्टेग जारी करने वाले पेटीएम बैंक के हेल्पलाइन नंबर पर कोई बात नहीं की जाती है। शिकायतकर्ता को डिजिटल माध्यम से मोबाइल पर मेसेज सुनकर फास्टेग आईडी नंबर, उसका फोटो अपलोड करना पडता है जो सामान्य वाहन चालक के लिये बहुत मुश्किल कार्य है। शिकायतकर्ता से कोई बात नहीं की जाती है।
वित्तीय धोखाधडी की जांच हो
शिकायतकर्ता ने केंद्रीय सडक परिहवन मंत्री नितिन गडकरी को ईमेल भेजकर अपील की कि केंद्र सरकार द्वारा फास्टेग से वसूली अनिवार्य करने के बाद राजस्थान के राष्ट्रीय राजमार्गो पर स्थित कई टोल प्लाजा अवैध वसूली और वित्तीय धोखाधडी कर रहे हैं। जिसे रोकने के लिये एक आईटी टीम गठित कर उच्चस्तरीय जांच की जाये। फास्टेग जारी करने वाले बैंकों के लिये हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत सुनना अनिवार्य किया जाये। कई वाहन चालक पूरी जानकारी नहीं होने से स्वयं को ठगा सा महसूस करते हैं। एनएच पर प्रत्येक टोल की औचक जांच की जाये जिससे इस डिजिटल भ्रष्टाचार का खुलासा हो सके।

 

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