Sunday, 7 June, 2020

मजदूर पति को देख बीमार गर्भवती पत्नी की आंखें नम हुई

लोकसभा अध्यक्ष के प्रयासों से लॉकडाउन में बीकानेर से 25 दिन बाद गांव पहुंचा श्रमिक
न्यूजवेव @ कोटा
कोटा जिले में सुल्तानपुर के निकट छोटा सा गांव है-तोरण। यहां एक निर्धन परिवार में गर्भवती महिला मैना पति के बाहर होने से बीमारी के दर्द से कराह रही थी। अचानक 16 अप्रैल की मध्यरात्रि को किसी ने घर का दरवाजा खटखटाया तो वह घबरा गई। सहमते हुए उसने दरवाजा खोला तो सामने पति मुकेश बैरवा को देख वह चौंक उठी। लॉकडाउन में एक माह से मजदूर पति को अचानक घर में देख उसकी आंखें नम हो उठी। दरअसल मुकेश बैरवा बीकानेर के पास गंगाशहर में अपने दो साथियों रामलखन व जगदीश के साथ दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का पेट पालता है। वह बीकानेर में अकेला मजदूरी करता। पत्नी मैना व दो बच्चे तोरण गांव में रहते हैं। पत्नी मैना 8 माह से गर्भवती है, इन दिनों उसकी तबीयत ठीक नहीं थी।

विशेष पास व गाड़ी की व्यवस्था की 

कोरोना वायरस के कारण 22 मार्च को लॉकडाउन होने से मुकेश व साथियों का काम बंद हो गया। उसने गांव लौटने के लिये सोचा तभी ट्रेन व बसें बंद हो जाने से वह घर नहीं लौट सका। 14 अप्रैल को उसे सूचना मिली कि पत्नी की तबियत खराब है। यह सुनकर वह विचलित मुकेश ने कोटा पहुंचने के लिए बहुत प्रयास किए लेकिन सफलता नहीं मिली। अगले दिन रात को उसने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कोटा कार्यालय पर फोन कर समस्या बताई। मुकेश ने बताया कि गर्भवती पत्नी की तबियत सही नहीं है और घर में खाने तक के लिए पैसे नहीं बचे हैं। यह सुनकर कार्यालय से सारी जानकारी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को दी गई।
बिरला ने तत्काल अपने निजी सहायक को निर्देश दिये कि मजदूर व उसके दो साथियों को अपने गांव तक पहुंचाने के लिये विशेष पास की व्यवस्था करें। उनको कोटा तक लाने के लिए गाड़ी की व्यवस्था की। इसके बाद मुकेश गुरूवार सुबह बीकानेर से रवाना होकर रात 1.30 बजे तोरण गांव स्थित अपने घर पहुंचा।
उसे दरवाजे पर देख पत्नी की आंखों में आंसू आ गये। मुकेश ने बताया कि 25 दिन कितनी परेशानी में बिताय, यह केवल वही जानता है। जब पत्नी के बीमार होने की सूचना मिली तो कोई साथ देने को तैयार नहीं था। लेकिन मुश्किल की इस घड़ी में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने न सिर्फ उसकी मदद की बल्कि घर तक आने के लिए गाड़ी की व्यवस्था तक कर दी। अब वह घर में बुजुर्ग माता-पिता, बच्चों और गर्भवती पत्नी की देखभाल कर सकेगा। उसके साथी रामलखन एवं जगदीश भी परिवार के बीच पहुंचकर खुश दिखाई दिये। तीनों दिहाड़ी मजदूरों ने संकट की घडी में लोकसभा अध्यक्ष द्वारा तत्काल मदद करने पर हृदय से उनका आभार जताया।

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