Friday, 20 February, 2026

‘नेत्रदान का संकल्प कर मुत्यु के बाद मृत्युंजय बनें’ -डॉ. पांडेय

नेत्रदान पखवाड़ा : भारत में ढाई लाख कॉर्निया की जरूरत, जबकि प्रतिवर्ष नेत्रदान 50 हजार तक सीमित।
न्यूजवेव @कोटा

आँखें जीवनभर हमें रोशनी देती हैं, मृत्यु के बाद वह किसी अन्य जिंदगी से अंधेरा हटा सकती हैं। देशभर में रविवार से नेत्रदान पखवाडा की शुरूआत हुई। इस अवसर पर जागरूकता सेमिनार में मुख्य वक्ता कोटा डिवीजन नेत्र सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ.सुरेश पाण्डेय ने कहा कि भारत में लगभग एक करोड़ 80 लाख व्यक्ति अंधेपन से ग्रस्त हैं। देश में अँधता या दृष्टि बाधिता के पांच प्रमुख कारण मोतियाबिन्द, काला पानी (ग्लूकोमा), दृष्टि दोष, रेटिना (पर्दे) की बीमारियां एवं आँख की पारदर्शी पुतली (कॉर्नियां) में होने वाले रोग आदि है।

Dr Sk Pandey

उन्होंने बताया कि देश में कुल अंधता का 1 प्रतिशत कॉर्नियल ब्लाइंडनेस के कारण है। देश के एक लाख बीस हजार लोगों के दोनों आँखों का कॉर्निया अँधता की स्थिति तक खराब है और लगभग दस लाख लोगों के दोनों आँखों का कॉर्निया प्रभावित है, जिसके कारण उन्हें कम दिखता है। लगभग 68 लाख लोगों का एक कॉर्निया प्रभावित है। हर वर्ष लगभग 25-30 हजार रोगी कॉर्निया खराब होने के कारण अँधता से ग्रसित हो रहे है। इन सब में से लगभग 50 प्रतिशत रोगी कॉर्नियल ट्रांसप्लांट (पारदर्शी पुतली के प्रत्यारोपण) द्वारा रोशनी वापस प्राप्त कर सकते है। हर वर्ष कम से कम दो लाख पचास हजार कॉर्निया की आवश्यकता है, जबकि प्रतिवर्ष 50 हजार के लगभग ही नेत्रदान हो पाते है।
एक कॉर्निया प्रत्यारोपण से तीन को रोशनी
कॉर्निया एक पारदर्शी पुतली का प्रत्यारोपण है। दान की हुई स्वस्थ आँख से कॉर्निया निकालकर मरीज के अपारदर्शी कॉर्निया को बदला जाता है। यह दुर्लभ शल्य क्रिया सर्जिकल माइक्रोस्कोप की सहायता से नेत्र सर्जन द्वारा की जाती है। देश में कॉर्निया की खराबी से अंधता (कॉर्नियल ब्लाइंडनेस) की समस्या बढती जा रही हैै। ऐसे में यह आवश्यक है कि ज्यादा से ज्यादा व्यक्ति नेत्रदान का संकल्प कर देश में अंधता को दूर करने में सहयोग दें। नेत्र चिकित्सक अब 3 अँधे मरीजों को दृष्टि देने के लिए एक कॉर्निया का उपयोग कर सकते है।
मृत्यु के 6 घंटे बाद तक नेत्रदान संभव
डॉ. पांडेय ने बताया कि मृत्यु के तुरन्त बाद ( 6 घंटे तक) मौत की सूचना नजदीकी आई बैंक पहुँचा दें। वहां से नेत्र चिकित्सक या प्रशिक्षित तकनीशियन घर आकर मृतक की आंख का कॉर्निया निकालकर ले जाएगा और निकाली हुई खाली जगह में आर्टिफिशयल कॉन्टेक्ट लैंस (शेल) लगा देगा ताकि नेत्रदान करने वाले चेहरा विकृत न दिखे। मरने के बाद जितनी जल्दी कॉर्निया निकाला जाये उतनी ही प्रत्यारोपण के लिए उत्तम है। यह कार्य निःशुल्क किया जाता है।

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