Sunday, 7 March, 2021

झालावाड जिले से अनुराज गुप्ता सिविल सेवा में चयनित

मिसाल : कोटा से कोचिंग लेकर अनुराज ने आईआईटी बॉम्बे से बीटेक किया, कैट में दो बार सफल
न्यूजवेव @ कोटा

राजस्थान के झालावाड जिले में छोटे से गांव कनवाड़ी से पढ़ाई के लिये बाहर निकले 25 वर्षीय अनुराज गुप्ता ने आईआईटी, मुंबई से बीटेक कर इस वर्ष सिविल सेवा मुख्य परीक्षा-2019 में चयनित होने का दोहरा कीर्तिमान रच दिया। यूपीएससी में उन्हें 2020 में से 957 अंक मिले हैं, जिससे सिविल सेवा की संशोधित सूची के 89 अभ्यर्थियों में क्रमांक-38 पर सफलता मिली है। उन्होंने एच्छिक विषय में मैथ्स को चुना।
अनुराज ने बताया कि उन्होंने कक्षा-11वीं व 12वीं की पढ़ाई कोटा में की। वायब्रेंट एकेडमी से कोचिंग लेकर जेईई-एडवांस्ड में एआईआर-359 मिली। आईआईटी बॉम्बे से 2017 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। 2018 में उसने 9 माह वोडाफोन, अहमदाबाद में असिस्टेंट मैनेजर के रूप में जॉब किया। लेकिन उसने निर्णय लिया कि एक कंपनी का प्रोफिट बढ़ाने से बेहतर है कि लोगों के बीच रहकर उनकी जिंदगी बदलने का प्रयास करूं। इसके लिये आईएएस बनने का निश्चय किया और एक साल घर पर सेल्फ स्टडी से यूपीएससी एग्जाम की तैयारी की। 2019 में पहले प्रयास में ही अनुराज सिविल सेवा परीक्षा प्री व मेन पास करके इंटरव्यू में भी सफल रहे।

IAS Anuraj with Parents

रिजल्ट घोषित होने में देरी होने से उन्होने कैट परीक्षा दी, जिसमें 2019 व 2020 में लगातार दो वर्ष एक समान 96.76 परसेंटाइल स्कोर कर आईआईएम अहमदाबाद के लिये भी चयनित हो गये। पिता राजेश गुप्ता भवानीमंडी में रहे, वे इन दिनों एसबीआई, राजकोट में प्रबंधक हैं व मां अनिता गुप्ता गृहिणी हैं। अनुराज लघु उद्योग भारती के अ.भा. संगठन मंत्री प्रकाशचंद्र गुप्ता के भाई के बेटे हैं।
हर खबर में कई एंगल छिपे होते हैं

अनुराज ने आईएएस में अपनी सफलता का श्रेय दैनिक अखबारों की प्रमुख खबरों को दिया। उन्होंने बताया कि रोज अखबार की राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय खबरों का विश्लेषण करता हूं। एक न्यूज को हर एंगल से समझने की कोशिश करता रहा। समस्या की मूल जड़ क्या है, उसे कैसे हल किया जा सकता है। जैसे- इन दिनों किसान आंदोलन चल रहा है। इसकी खबरों को इकोनॉमी, ज्योग्राफी, इंटरनेशनल रिलेशन व सुरक्षा के दृष्टिकोण से पढ़ा। उसने कहा कि जो भी पढें़ खुद की तैयारी के लिये पढें़।
जॉब में पैसा फिर सिविल सेवा क्यों

अनुराज ने बताया कि उससे इंटरव्यू में पूछा गया कि आपको कंपनी में अच्छा वेतन मिल रहा है, आप वहां सीईओ तक बन सकते हैं। जबकि सिविल सेवा में इतना पैसा नहीं मिलेगा, कई तरह के दबाव भी रहेंगे फिर इसमें क्यों आना चाहते हो? उसने कहा कि किसी कंपनी का प्रोफिट बढ़ाने से सच्ची खुशी नहीं मिलती है। मैं गांव से शहर तक का माहौल देखकर लोगों के बीच रहकर काम करना चाहता था। यदि सिविल सेवा में रहते हुये मैं किसी एक जिंदगी को भी सुधार सका तो वह खुशी अनमोल होगी। सिविल सर्विस आम लोगों व देश सेवा के लिये पॉजिटिव प्लेटफॉर्म है। इंटरव्यू में 50 फीसदी सवाल जॉब से जुडे क्षेत्र से पूछे गये। 5-जी नेटवर्क लागू करने में क्या बाधायें आ रही हैं? आधार नंबर से जुडे़ इश्यू में डाटा सिक्योरिटी कैसे और कितनी महत्वपूर्ण है?
विशेषज्ञता का लाभ देश को मिलेगा
आईआईटीयन या डॉक्टर आईएएस क्यों बनना चाहते हैं? इस सवाल पर अनुराज ने बताया कि कुछ साल पहले तक सिविल सेवा में स्पेशलाइजेशन का डोमेन नहीं था। आज आईआईटीयन, डॉक्टर या एमबीए डिग्री के बाद जो सिविल सेवा में जा रहे हैं, उनकी विशेषज्ञता का लाभ देश व समाज को अवश्य मिलेगा। उनकी डायवर्सिटी बहुत उपयोगी है। राजस्थान में आईएएस डॉ. समित शर्मा स्वयं चिकित्सक होने से जेनेरिक मेडिसिन का प्रकल्प आम जनता तक पहुंचा सके।

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