Thursday, 25 April, 2024

उत्तरी भारत का पहला हाई-टेक सेंट जोसेफ ई-गुरूकुल

रानपुर में सेंट जोसेफ ई-गुरूकुल का वर्ल्ड क्लास ग्रीन कैंपस

कोटा। शहर से मात्र 7 किमी दूर रानपुर एजुकेशन हब में सेंट जोसेफ ग्रूप ऑफ एजुकेशनल इंस्टीटयूट का हाई-टेक ई-गुरूकुल संपूर्ण उत्तर भारत में अपनी तरह का पहला वर्ल्ड क्लास ई-स्कूल है। ऐसा ई-स्कूल जिसे 21वीं सदी की एजुकेशन पॉलिसी के अनुसार डिजाइन किया गया है। शिक्षाविदों का कहना है कि अमेरिका, आस्टेªलिया, इंग्लैड के बाद अब भारत में भी वर्ल्ड क्लास ई-स्कूलों की आवश्यकता महसूस की जाने लगी है। हमारे समाज में लर्निंग के तौर-तरीके बदल रहे हैं।

मोबाइल यूजर्स बढ़ने से घर-घर में 3-4 साल की उम्र से नन्हे बच्चे तेजी से हाई-टेक हो रहे हैं। वे किताबों के पुराने सिलेबस से बाहर निकलकर दुनिया की नई चीजों और जानकारियों से जुडना चाहते हैं। हर जगह ऑनलाइन लर्निंग सोसायटी विकसित हो रही है, जिससे भविष्य में ग्लोबल लीडर्स तैयार होंगे।

बच्चों के इसी मनोविज्ञान पर गहन रिसर्च करते हुए सेंट जोसेफ ग्रुप ऑफ एजुकेशनल इंस्टीटयूट के प्रबंधन ने अपने 30 वर्षों के अनुभव से विशेषज्ञों व शिक्षाविदों की सहायता से हाई-टेक ई-स्कूल का अत्याधुनिक मॉडल तैयार कर वर्ष 2014 से शैक्षणिक नगरी कोटा में इसका आगाज किया।

शिक्षा नगरी में ब्रांड ई-स्कूल की कमी होने से कोटा में कार्यरत प्रोफेशनल्स, प्रशासनिक अधिकारी, बैंक अधिकारी, इंजीनियर्स, डॉक्टर्स, यूनिवर्सिटी व कॉलेजों के लेक्चरर-प्रोफेसर, कोचिंग फैकल्टी-आईआईटीयन, उद्यमी, व्यवसायी आदि उच्च स्तरीय शैक्षणिक वातावरण के लिए अपने बच्चों को ग्लोबल एक्सपोजर दिलाने के लिए मेट्रो शहरों के ब्रांड स्कूलों में पढने के लिए भेजते थे।

लेकिन अब उन्हें कोटा में ही वर्ल्ड क्लास ई-स्कूल का प्लेटफॉर्म मिल रहा है। प्रत्येक क्लास में 25 सीटें होने से कोटा के कई प्रोफेशनल्स ने अपने बच्चों के लिए एडवांस सीट बुक करा ली। ई-गुरूकुल में पढने वाले बच्चे 12वीं के बाद दुनिया की किसी भी यूनिवर्सिटी या इंस्टीटयूट से अच्छा कोर्स कर सकते हैं। वे किसी भी तरह के एंट्रेंस एग्जाम को क्वालिफाई करने में सक्षम होंगे।

21वीं सदी के वाई-फाई कैंपस में लर्निंग की सभी अत्याधुनिक सुविधाएं

. सीबीएसई से 12वीं तक साइंस एवं कॉमर्स की मान्यता
. एनटीएसई सिलेबस पर आधारित कोर्स कॅरिकुलम
. नो बुक्स, स्मार्ट क्लास रूम में टेबलेट पर पढाई
. क्लाउड बेस्ड टेक्नोलॉजी से दुनियाभर से किसी भी किताब या कोर्स मैटेरियल को ऑनलाइन पढने की सुविधा।
. वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर, वाई-फाई कैंपस, हाई-टेक बिल्डिंग
. रोज सुबह 1 घंटा गुरूकुल परंपरा के अनुसार योग, प्राणायाम, मेडिटेशन और मोरल एजुकेशन।
. कैंपस में ही स्विमिंग पुल, स्केटिंग रिंग, ग्रीन व फ्रेश एन्वायरन्मेंट
. शहर के सभी हिस्सों से बच्चों को लाने-ले जाने के लिए ट्रªांसपोर्टेशन सुविधा
. वातानुकूलित स्मार्ट क्लासरूम
. इन्डोर गेम्स और आउटडोर स्पोटर्स के लिए प्ले ग्राउंड
. ई-लाइब्रेरी व लेबोरेट्री सुविधा
. एनटीएसई, केवीपीवाय, आईजेएसओ, इंटरनेशनल ओलिंपियाड आदि की तैयारी भी।
. फॉरन लैंग्वेज फ्रेंच व रसियन आदि भी स्कूल में ही सीखने का अवसर।
. स्टूडेंट काउंसलिंग व वेलफेअर सेल
. मिनरल वाटर व पावर बेकअप सुविधा।
. ग्रीन कैंपस, प्रदूषण व तनाव रहित खुला शैक्षणिक वातावरण
. 24 घंटे सिक्योरिटी एवं वन-टू-वन लर्निंग व केअरिंग

आज के बच्चे टेक्नोलॉजी फ्रेंडली
आज गूगल जनरेशन का दौर है, जिसमें 3-4 साल के बच्चे मोबाइल, आईपैड, टेबलेट, लैपटॉप पर टेक्नोलॉजी का उपयोग करने लगे हैं। वक्त की डिमांड को देखते हुए अपने शहर में भी एक न्यू एरा स्कूल की जरूरत महसूस हुई। ई-गुरूकुल के मॉडल पर सीबीएसई चेयरमैन, श्रीराम कॉमर्स कॉलेज, दिल्ली के प्रिंसिपल सहित देश के कई शिक्षाविदों से चर्चा कर सुझाव लिए गए। हम अपने आसपास की दुनिया को बच्चों की नजर से देखें। आज टेक्नोलॉजी की मदद से नॉलेज को एक क्लिक पर दुनिया के किसी भी कोने से हासिल किया जा सकता है। फिर हम बच्चों को किताबी ज्ञान तक ही सीमित क्यों रखें। उन्हें कुछ नया जानने-सीखने और देखने का अवसर दें ताकि वे आगे चलकर किसी भी क्षेत्र में सफलता की बुलंदियों तक पहुंच सकें। याद रखें इमारत वही बुलंद होगी जिसकी बुनियाद मजबूत होगी। 21वीं सदी के बच्चों को उनकी रूचि के अनुसार सीखने का अवसर देना होगा तभी वे आपके और सपने सच कर करके दिखा सकेंगे।

– डॉ अजय शर्मा, चेयरमैन,
सेंट जोसेफ ग्र्रुप ऑफ एजुकेशनल इंस्टीटयूट

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