Monday, 15 August, 2022

ड्राई स्वाब से कोरोना जांच अब दोगुना रफ्तार से होगी

न्यूजवेव @ नईदिल्ली
भारत में कोरोना की दूसरी लहर की आशंकाओं के बीच इसकी जांच की संख्या बढ़ाने की चुनौती बनी हुई है। ऐसे मे एक अच्छी खबर आ रही है। हैदराबाद स्थित कौंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) की घटक प्रयोगशाला सेंटर फॉर सेलुलर एंड मोलकुलर बायोलॉजी (CCMB) द्वारा विकसित कोरोना जांच की डायरेक्ट ड्राई स्वाब आरटी- पीसीआर विधि को इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की मंजूरी मिल गयी है। यह परीक्षण विधि बिना किसी नए या अतिरिक्त संसाधन के जांच की संख्या को दो से तीन गुना बढ़ा देने मे सक्षम है।
CCMB द्वारा विकसित की गयी यह जांच पद्धति, कोरोना के सबसे सटीक और मानक माने जाने वाली आरटी- पीसीआर परीक्षण विधि का सरल रूपांतरण है।ड्राई स्वाब पद्धति पारम्परिक RT-PCR जांच के मुकाबले कहीं अधिक किफायती और शीघ्रता से परिणाम देने वाली जांच है। उल्लेखनीय है कि CCMB प्रयोगशाला अप्रैल 2020 से ही सार्स-कोव-2 की जांच में जुटी हुई है। PCR परीक्षण की धीमी गति का सबस बड़ा कारण है RNA को अलग करने की लम्बी प्रक्रिया में लगने वाला समय। CCMB के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित डायरेक्ट ड्राई स्वाब RT-PCR विधि आरएनए के निष्कर्षण से मुक्त परीक्षण है।

नाक से शुष्क अवस्था में  स्वाब सैंपल  
इस जांच विधि में नाक से लिए गए स्वाब सैंपल का संचालन शुष्क अवस्था में ही किया जाता है। इससे परीक्षण की पूरी प्रक्रिया मे सैंपल के स्राव की सम्भावना और इन्फेक्शन का खतरा बहुत बड़ी सीमा तक कम हो जाता है। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि ड्राई स्वाब विधि में आरएनए को अलग करने के चरण की आवश्यकता समाप्त हो जाने के कारण सैंपल का सामान्य प्रसंस्करण सीधे ICMR द्वारा अनुमोदित आरटी- पीसीआर किट के प्रयोग से कर लिया जाता है। ड्राई स्वाब विधि द्वारा उपलब्ध संसाधनों से ही बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के कही अधिक सैम्पल्स की जांच की जा सकती है और जांच की संख्या को तत्काल प्रभाव से दोगुने से भी अधिक बढ़ाया जा सकता है।
उल्लेखनीय है किसी सीएमबी के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित इस परीक्षण पद्धति का अनुमोदन सेंटर फॉर डीएनए फिंगर प्रिंटिंग एंड डायग्नॉस्टिक्स (CDFD), IISER बरहामपुर, CSIR-NIRI, GMCH-नागपुर, जेनपेथ पुणे, IGG MSH और MAFSU, नागपुर और अपोलो अस्पताल, हैदराबाद जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा स्वतंत्र रूप से किया जा चुका है।
(इंडिया साइंस वायर)

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