Monday, 15 August, 2022

डॉक्टर्स-मरीज के बीच टूटता विश्वास का रिश्ता

न्यूजवेव @ कोटा

देश के 1000 से अधिक डॉक्टर्स एवं चिकित्साकर्मी गत डेढ वर्ष में कोविड-19 से संक्रमित होकर प्राणों की आहूति दे चुके है। एक अदृश्य विषाणु से दुनिया के 220 से अधिक देश लाचार दिखाई दे रहे है। इसके बावजूद डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टाफ फ्रंटलाइन कोरोना वॉरियर्स के रूप में निरंतर अपनी सेवाएं जारी रखे हुये हैं।
डॉक्टर्स-डे (1 जुलाई) को वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. सुरेश पाण्डेय एवं डॉ. विदुषी पाण्डेय ने कहा आज देश में डॉक्टर्स और मरीजों के बीच विश्वास का रिश्ता कमजोर होता जा रहा है। गलतफहमी के चलते आये दिन अस्पतालों में चिकित्सकों के साथ मारपीट व हिंसा के समाचार सामने आ रहे हैं। डॉक्टर- रोगी के विश्वास को फिर से बहाल करने के लिये हमें कुछ बातों पर गौर करना होगा।
मरीजों के परिजन यह भी सोचें

  • एक विशेषज्ञ डॉक्टर अपने रोगी की तकलीफ कम कर सकता है, लेकिन जीवन व मृत्यु का फैसला करना उसके हाथ में नहीं होता है। वे कड़ी मेहनत से असंख्य मरीजों को इलाज देकर स्वस्थ भी कर रहे हैं।
  • एक गंभीर रोगी के उपचार या ऑपरेशन में तुरंत राहत नहीं मिलने पर उत्तेजित परिजन डॉक्टर्स के साथ दुर्व्यवहार पर उतारू हो जाते हैं।
    डॉक्टर्स के लिये कहा जाता है कि वे इलाज या आपरेशन के लिये मोटी राशि लेते हैं। दुर्भाग्यवश महंगे होते इलाज के कारण गरीब व मध्यमवर्गीय जनता निजी चिकित्सकों से उपचार नहीं करवा पाती है।
  • जो टेक्नॉलोजी, मशीनें या जीवनरक्षक दवाईयां विदेश में आयात होती है, वे बहुत मंहगी होती है। इसके लिए देश में स्वास्थ्य बीमा एवं आयुर्वेद, होम्योपैथी आदि को विकसित करना होगा।
  • दुख को सहन नहीं कर पाने से अस्पताल में भर्ती रोगी की मौत होने पर अस्पतालों में तोड़फोड़ या डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार की घटनायें सामने आती हैं।
  • ICU में मरीज तभी भर्ती होता है जब उसकी हालत नाजुक हो। यदि इसी तरह सरकारी चिकित्सक भी दुर्व्यवहार, मारपीट के डर से गंभीर मरीजों का इलाज करने से कतराने लगे तो इन रोगियों का क्या होगा?
  • सरकारी अस्पतालों में चरमराती व्यवस्था, गंदगी, खराब पड़ी मशीनें, मरीजों की बढती संख्या, निजी चिकित्सालयों से रैफर गंभीर रोगी, राजनीतिक दखल, सीमित संसाधन आदि के लिए क्या सिर्फ डॉक्टर ही जिम्मेदार हैं। ऐसे में बेहतर सेवायें देने वालों की प्रशंसा क्यों नहीं हो पाती है।

डॉक्टर्स भी यह ध्यान दें

  • चिकित्सा केवल दवा लिखना या आपरेशन करना नहीं, बल्कि इंसान को उसकी तकलीफ से राहत देना है। इसलिए संवेदनशील होकर मरीज से उसके दर्द को सुनें।
  • सरकारी चिकित्सक व्यवस्था की कमियों से परेशान हो सकते हैं, लेकिन जो गरीब रोगी आर्थिक अभाव में आपके पास आ रहा है, उसकी हिम्मत बढाना भी आपका दायित्व है।
  • स्वयं को श्रेष्ठ साबित करने के लिए डॉक्टर दूसरे डॉक्टरों द्वारा किये गये उपचार या ऑपरेशन में कमियाँ निकालते हैं। जिससे रोगियों में अविश्वास पैदा होता है। इस प्रतिस्पर्धा से बचें।
  • डॉक्टर आत्म विश्लेषण करें और स्वयं को मरीज की जगह रख कर देखें। अच्छा डॉक्टर वह है जिससे बातचीत कर मरीज की आधी बीमारी से दूर हो जाए।

इसलिये मनाते हैं डॉक्टर्स-डे


1 जुलाई, 1882 को पटना में जन्मे डॉक्टर बी.सी.राय ने पहले कलकत्ता और फिर लंदन (इंग्लैंड) में मेडिकल साइंस की उपाधि ली और भारत लौटकर एक बेहतरीन डॉक्टर के साथ ही गाँधीजी के साथ आजादी के आंदोलन में भी भाग लिया। 1 जुलाई, 1962 को उनका निधन हो गया था।

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