Thursday, 30 April, 2026

तिरूपति धाम की प्रसाद में मिलावट आस्था पर आघात – स्वामी श्री घनश्यामाचार्य महाराज

तिरूपति धाम में साक्षात् श्रीहरि नारायण अर्चा विग्रह में विराजमान

न्यूजवेव@ कोटा
श्री झालरिया पीठ के पीठाधीश्वर जगतगुरू स्वामी श्री घनश्यामाचार्य जी महाराज ने कहा कि भारत में जनआस्था के सबसे बडे तीर्थ तिरूपति देवस्थानम से वितरित प्रसाद में मिलावट व अशुद्धता से लाखों भक्तों की भावनायें आहत हुई हैं। हमारे राम को यह जानकर गहरा आघात लगा। इससे मन व्यथित है। तिरूपति धाम में साक्षात् श्रीहरि नारायण अर्चा विग्रह में विराजमान हैं। उनकी सेवा में शुद्ध भाव, आचरण और सामग्री की पवित्रता होना आवश्यक है।


उन्होंने कहा कि भारत के असंख्य सनातन धर्म प्रेमियों के आस्था केन्द्र पर जिसने भी यह कृत्य किया है, वो अक्षम्य है। भक्तों की भावनाओं से खिलवाड़ किया गया है। ये हिन्दू विरोधी तत्व हैं जिन्होंने सनातन धर्म प्रेमियों की पवित्रता को ठेस पहुंचाई है। हमारे राम आहत हैं और जिस किसी ने भी इस कृत्य को करने का दुस्साहस किया है तथा इसके लिए जो भी जिम्मेदार हैं, सरकार उसे उचित दण्ड देवें ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं हो।
महाराज ने कहा कि यह समूचे सनातन धर्म पर हमले जैसा कृत्य है। इससे हमें सावधान होने की आवश्यकता है। देश के अन्य मंदिर और धर्म क्षेत्रों में भी वितरित किए जाने वाले प्रसाद के निर्माण में उपयोग में ली जाने वाली सामग्री की शुद्धता सुनिश्चित की जाए। सामग्री की शुद्धता को लेकर सरकार द्वारा ऐसी प्रक्रिया अपनाई जाए कि देश के असंख्य धर्म प्रेमियों के मन में प्रसाद को लेकर जो शंका इस घटना से आई है वो दूर हो सके। देश के मंदिरों में बिना किसी डर और झिझक के श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करें। साथ ही सनातन धर्म प्रेमियों को अपने घर पर भगवान के भोग एवं स्वयं के प्रसाद के लिए उपयोग में ली जाने वाली सामग्रियों की शुद्धता और पवित्रता को लेकर भी सावधान रहने की आवश्यकता है।
हिन्दू के लिए गाय पूज्य है और माता समान है। गाय के दूध का घी हमारे लिए अमृत तुल्य है, शुद्धता का परिचायक है। इसमें किसी भी तरह के अन्य उत्पाद की मिलावट स्वीकार्य नहीं है। सरकार को चाहिए कि खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए ताकि समाज के स्वास्थ्य और पवित्रता सुनिश्चित रह सके।

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