Thursday, 4 March, 2021

इंजीनियरिंग में सभी संकायों को दाखिले मिले

मंथन : नई शिक्षा नीति पर आरटीयू, कोटा में राज्यस्तरीय वर्कशॉप
न्यूस्वेव@कोटा
राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय में टेक्यूप (ए.टी.यू.) के सौजन्य से तृतीय राज्य स्तरीय कार्यशाला वर्चुअल मोड में आयोजित की गई । कार्यशाला का आयोजन राष्ट्र की नई शिक्षा नीति को राज्य के तकनीकी शिक्षण संस्थानों में प्रभावी रूप से लागू किए जाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई ।
कार्यशाला में प्रमुख वक्ता के तौर पर अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद नई दिल्ली के सदस्य सचिव प्रो. राजीव कुमार एवं एन.पी.आई.यू. के सलाहकार प्रो. पी.एम. खोडके व प्रो. बी.पी.सुनेजा डीन फेकल्टी आफ इंजी. एण्ड टेक्नोलोजी उपस्थित रहे ।


कार्यशाला की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. ए. गुप्ता ने की । कार्यशाला में विश्वविद्यालय से सम्बद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्यगण, चेयरमेन, कुलसचिव एवं महाविद्यालयों की नई शिक्षा नीति की वर्कफोर्स के समस्त सदस्य भी उपस्थित रहे । इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय के समस्त डीन, विभागाध्यक्ष एवं शिक्षकों ने भी भाग लिया ।
कार्यशाला के आरम्भ में प्रो. अनिल के माथुर ने मुख्य वक्ताओं का परिचय करवाते हुए स्वागत व अभिनन्दन किया । प्रो. आर. ए. गुप्ता ने अपने स्वागत उद्बोधन में नई शिक्षा नीति के सन्दर्भ में विश्वविद्यालय द्वारा किए गए प्रयासों को प्रस्तुत किया और विशेष रूप से विश्वविद्यालय के समस्त पाठ्यक्रमो में नई शिक्षा नीति के अनुरूप परिवर्ततन करते हुए पाठ्यक्रमों को मल्टी डिसिप्लनरी व इन्टर डिसीप्लनरी बनाने का प्रयास किया गया । विद्यार्थियों का उद्योगों से समन्वय बढाने हेतु इण्डस्ट्रियल ट्रेनिंग की अवधि में वृद्धि की गई । नई शिक्षा नीति में वर्णित सतत् मूल्यांकन को बढावा देने हेतु आन्तरिक मूल्यांकन के अंकों में 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई ताकि महाविद्यालयों को अकादमिक स्वायत्ता प्रदान करने की दिशा में कदम बढाया जा सके । कुलपति प्रो. गुप्ता ने इस कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए प्रो. बी.पी.सुनेजा, प्रो. अनिल के माथुर, प्रो. धीरेन्द्र माथुर व डा. दीपक भाटिया के प्रयासों की सराहना की । कुलपति ने अपने उद्बोधन में राज्य सरकार द्वारा राजस्थान राज्य की शिक्षा नीति की प्रगति के बारे में भी अवगत करवाया और बताया कि राजस्थान सरकार ने पहल लेते हुए राज्य की शिक्षा नीति के प्रारूप को अंतिम रूप प्रदान कर दिया है तथा शीर्ध ही उसमें वर्णित बिन्दुओं को एक समयबद्ध कार्यक्रम के तहत पालना की जावेगी । इस हेतु राजस्थान तकनीकी शिक्षा की प्रमुख शासन सचिव श्रीमति शुचि शर्मा के प्रयासों के प्रति आभार जताया।
प्रमुख वक्ता प्रो. राजीव कुमार ने अपने उद्बोधन में तकनीकी विश्वविद्यालयों के सन्दर्भ में नई शिक्षा नीति के प्रमुख बिन्दुओं को रेखांकित करते हुए बताया कि विश्वविद्यालयों को अपने पाठ्यक्रमों में इस तरह बदलाव करना होगा कि आने वाले समय में किसी भी संकाय (कला, विज्ञान एवं काॅमर्स) का छात्र इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले सके । इन छात्रों के लिए विश्वविद्यालय विशेष ब्रिज कोर्सेज की व्यवस्था करे । प्रो. राजीव कुमार ने तकनीकी विश्वविद्यालय कोटा द्वारा नई शिक्षा नीति को लागू किए जाने के प्रयासों की सराहना की । प्रो. राजीव ने इस बात पर भी जोर दिया कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप विश्वविद्यालयों में विद्यार्थी द्वारा अर्जित क्रेडिट को ट्रान्सफर करने के लिए एम.ओ.यू. करना होगा और इस सम्बन्ध में नियम बनाने होगें ताकि देश में क्रेडिट बैंक की स्थापना के उद्धेश्य को सार्थकता प्रदान की जा सके । विश्वविद्यालयों को नई शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप परीक्षा प्रश्नपत्रों का प्रारूप भी ब्लूम टेक्सोनाॅमी पर आधारित करना होगा ताकि विद्यार्थियों को याद करने की प्रवृति से हटाकर सीखने की प्रवृति की ओर उन्मुख किया जा सके ।
कार्यशाला के दूसरे प्रमुख वक्ता प्रो. खोडके ने राष्ट्र की नई शिक्षा नीति की मूल आत्मा की व्याख्या की तथा उन प्रमुख बिन्दुओं को अंकित किया जिन पर विश्वविद्यालय, महाविद्यालय व इसके शिक्षकों को पूर्ण समर्पण भाव से कार्य करना होगा । उन्होनें विश्वविद्यालयों को आगाह करते हुए बताया कि नई शिक्षा नीति में सभी महाविद्यालयों को स्वायत्ता देने का प्रावधान है । इस अवस्था में विश्वविद्यालयों छठे वेतनमान छठे वेतनमान को अपने आर्थिक संसाधन के स्त्रोत बढाने होगें ताकि वे आत्मनिर्भर बन सके । प्रो. खोडके ने कहा कि विश्वविद्यालयों को ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए शोध कार्या को बढावा देना होगा । विश्वविद्यालयों में होने वाली शोध की धरातल पर परिणीति हो, इस प्रकार के प्रयास करने होगें ।
प्रो. खोडके ने होलिस्टिक एजुकेशन को बढावा देने हेतु शिक्षकों के प्रशिक्षण करवाए जाने पर भी जोर दिया तथा अध्यापक-छात्रों के परस्पर संवाद की महत्ता पर प्रकाश डाला ।
कार्यक्रम के तीसरे चरण में विश्वविद्यालय की नई शिक्षा नीति की कोर कमेटी के समन्वयक प्रो. बी.पी. सुनेजा ने पावर प्वाइंट प्रजेन्टेशन के माध्यम से नई शिक्षा नीति के मुख्य बिन्दुओं की व्याख्या की एवं इस हेतु राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों का चरणबद्ध प्रस्तुतीकरण किया ।
कार्यक्रम के अन्तिम चरण में प्रतिभागियों से संवाद किया गया । सत्र का संचालन प्रो. बी.पी.सुनेजा एवं प्रो. अनिल के माथुर ने किया । प्रतिभागियों की विभिन्न शंकाओं का प्रो. खोडके ने सहजता एवं विस्तार से समाधान किया। कार्यक्रम को तकनीकी सपोर्ट डा. दीपक भाटिया ने प्रदान किया । अन्त में प्रो. धीरेन्द्र माथुर ने धन्यवाद ज्ञापित किया तथा विश्वविद्यालय द्वारा नई शिक्षा नीति पर आयोजित इस तीसरी राज्य स्तरीय कार्यशाला को सफल प्रयास बताया ।

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