Sunday, 27 September, 2020

मरने के बाद भी आंखें रहेंगी जिंदा

मां पन्नाधाय शाखा की 13 सदस्यों ने नेत्रदान, अंगदान व देहदान का संकल्प लिया,जरूरतमंदों को मिलेेंगे शरीर के अंग
न्यूजवेव @ कोटा
आपकी जिंदगी को रोशनी देने अनमोल आंखें या शरीर का कोई अंग मृत्यपरांत किसी जरूरतमंद की जिंदगी को खुशहाली बना जाये तो इससे बडा परोपकार कुछ ओर नहीं हो सकता है। दूसरों को बेहतर जिंदगी जीने का अवसर देने के लिए भारत विकास परिषद की मां पन्नाधाय शाखा की सदस्य प्रीति जैन एवं उनके परिजनों ने इस अनूठी पहल की शुरूआत की है।
मां पन्नाधाय शाखा की अध्यक्ष सुनीता गोयल जौली ने बताया कि इस शाखा द्वारा सामाजिक सरोकार सु जुडे़ ऐसे अभियान की शुरूआत की गई है, जिसमें शाखा सदस्यांे के परिवार सहित एक देहदान, एक अंगदान व 11 नेत्रदान के संकल्प पत्र भरे गए। इस नेक कार्य के लिए शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ.कुलवंत गौड़ के सहयोग से प्रीति जैन ने देहदान, पति मुकेश जैन ने नेत्रदान, पुत्री डॉ.आक्षी जैन ने अंगदान का संकल्प लिया। शाखा की सचिव श्रद्धा गहलोत, नुपूर सक्सेना, संस्कार सक्सेना, पायल सक्सेना, प्रीति कचोलिया, मुस्कान कचोलिया, शोभा सक्सेना, ख्याति सक्सेना, विवेक कुदेशिया, कविता शर्मा आदि ने कुल 11 नेत्रदान संकल्प पत्र भर।
शाखा सचिव श्रद्धा गहलोत ने बताया कि देहदान करने वाले ऐसे चिकित्सक को गढ़ने में भागीदार होते हैं, जो वर्षों तक चिकित्सा सेवा करते हुये हजारों लोगों की मदद करते हैं। देहदान का संकल्प लेने वाली प्रीति जैन ने कहा कि मरने के बाद हमारा शरीर नष्ट हो जाता है, क्यों न मरने के बाद भी हम किसी जरूरतमंद के काम आ सकें। इसीलिये उन्होंने और उनके परिवारजनों ने अंगदान और नेत्रदान का फैसला लिया है।

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