Thursday, 21 May, 2026
Jyoti Gupta

एक हाथ से अपाहिज ज्योति ने सपने को जिद में बदला

नारी तू नारायणी: एक हाथ के सहारे अपनी मेहनत से आईआईटी रूडकी से बीटेक कर रही कोटा की दिव्यांग छात्रा ज्योति।

कोटा। ‘सभी शक्ति तुम्हारे भीतर है, अपनी मेहनत से आप कुछ भी और सब कुछ कर सकते हो।’ इस पर अमल करते हुए शहर की एक दिव्यांग छात्रा ज्योति (21) ने अपनी शारीरिक कमजोरी को चुनौती मानकर आईआईटी से बीटेक करने का सपना सच कर दिखाया। भविष्य में वह आईएएस बनने के लिए सिविल सर्विसेस की तैयारी करेगी।

बचपन से ही वह अपने बायें हाथ से काम नहीं कर पाती थी। सामान्य नहीं होने से उंगलियों में तकलीफ रही। ऑपरेशन के बावजूद उसका बायां हाथ ठीक न हो सका। लेकिन उसने कुदरत की इस चुनौती को स्वीकार किया। अपने सपने को जिद में बदलकर निरंतर कड़ी मेहनत करती रही। अंधकार से संघर्ष करते हुए आईआईटी में एडमिशन लेकर ज्योति ने अपने परिवार का गौरव बढ़ाया।

पिता श्री एमआर गुप्ता कोटा के रेलवे वर्कशॉप में चीफ डिपो मेटेरियल अधीक्षक हैं। उन्हांेने बताया कि बेटी बचपन से बायां हाथ में लोकोमोटिव डिसआर्डर से ग्रसित रही। लेकिन हमने उसे कभी अपाहिज होने का अहसास नहीं होने दिया। पढ़ाई में उसकी बहुत लगन थी। वह साइलेंट स्टडी करती रही।

10वीं तक कोई ट्यूशन या कोचिंग नहीं ली। घर के एक कोने में बैठकर अपने बूते पर पढ़़ाई करने वाली ज्योति गुप्ता क्लास-10 में मैथ्स में 100 मार्क्स लाकर उसने खुद अपनी प्रतिभा दिखाई। इसके बाद आईआईटी का ख्वाब पूरा करने के लिए कोचिंग की जरूरत महसूस हुई।

उसने दो वर्ष बंसल क्लासेस में जेईई की कोचिंग ली, जिससे लेवल बहुत इम्प्रूव हुआ। 12वीं में उसे 84 प्रतिशत मार्क्स मिले। आईआईटी-जेईई 2013 में उसे दिव्यांग केटेगरी में एआईआर-79 मिलने से आईआईटी रूड़की में इलेक्ट्रीकल कोर ब्रांच मिली। उसने बीटेक के बाद किसी गवर्नमेंट कम्पनी में जाने की इच्छा जताई ताकि साथ में सिविल सर्विसेस की तैयारी भी कर सके। मां लोमा गुप्ता ने बताया कि हमें दोनों बेटियों पर गर्व है। छोटी बेटी दिध्या को ज्योति से बहुत प्रेरणा मिली। वह भी बीटेक इंटीग्रेटेड कोर्स कर रही है।

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