Sunday, 16 June, 2024

राज्य में कृषि विश्वविद्यालय जैविक खेती को बढावा दें- कलराज मिश्र

कृषि विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह में भारतीय वेशभूषा पहने विद्यार्थियों को कुल 527 उपाधियां प्रदान की गई।
न्यूजवेव @कोटा

कृषि विश्वविद्यालय कोटा के छठे दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने कहा कि प्रदेश में रासायनिक खेती से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कमजोर हो रही है, इसके लिये पैदावार में गौ आधारित जैविक खेती को बढावा दिया जाये। ताकि हमें भोजन में गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न मिल सके और पर्यावरण की सुरक्षा भी हो सके।
मिश्र ने कहा कि जैविक खेती में भारत दुनिया में सबसे आगे है। एक सर्वेक्षण के अनुसार, 2021-22 में 59.1 लाख रकबा में जैविक खेती की गई है। आजकल किसानों द्वारा खेती में अंधाधुंध कीटनाशक व रसायनों को प्रयोग करने से मिट्टी की उर्वरक क्षमता को बहुत नुकसान हो रहा है। कीटनाशक से तैयार पैदावार के निर्यात में भी बाधायें आ रही हैं। इसके लिये प्राकृतिक खेती की ओर लौटना होगा।
कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति द्वारा कुल 527 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गई, जिसमें 434 यूजी एवं 86 पीजी उपाधियां शामिल हैं।
‘मोटा अनाज वर्ष’ मनायें–
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की पहल पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 2023 को ‘मोटा अनाज’ वर्ष मनाने की घोषणा की है। भारत में मोटा अनाज उत्पादन सर्वाधिक होता है, हम गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न पैदा कर किसानों की आय को बढा सकते हैं। कृषि विवि अपने अनुसंधान कार्यों से उन्नत बीज, पौध सामग्री, पैदावार की नई तकनीक जैसे क्षेत्रो में युवाओं को प्रशिक्षित कर कृषि को रोजगारान्मुखी बनाने का प्रयास करें।
चना व उडद पर कोटा में दो नई किस्में तैयार-
कुलपति डॉ.अभय कुमार व्यास ने कहा कि कृषि विवि कोटा के वैज्ञानिकों द्वारा वर्ष 2021-22 में कोटा कबूली चना-3 एवं कोटा उडद-5 जैसी नई उन्नत किस्में विकसित की गई हैं। साथ ही फसल सुधार, उत्पादन,पौध संरक्षण, एवं उद्यानिकी के लिये 30 नई तकनीकें विकसित कर अनुंसधान सिफारिशें जारी की गई है। जैविक खेती को बढावा देने के लिये विवि ने महर्षि पाराशर शोध पीठ की स्थापना कर विभिन्न केंद्रों पर जैविक खेती के लिये 40 समूह प्रदर्शनी आयोजित की गई। विवि ने एक वर्ष में 14 रिसर्च प्रोजेक्ट तैयार किये हैं। किसानों को कौशल विकास के लिये फूड प्रोसेसिंग, मधुमक्खी पालन, डेयरी व पशुपालन, वर्मी कम्पोस्ट, नर्सरी प्रबंधन, मशल उत्पादन आदि के प्रशिक्षण भी दिये गये।

धनिया व लहसुन प्रोसेसिंग के लिये इनक्यूबेशन सेंटर-
कुलपति डॉ. व्यास ने बताया कि भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र कोटा पर धनिया व लहसुन प्रोसेसिंग व बेकरी उत्पाद पर इनक्यूबेशन सेंटर खोलने के लिये 3.39 करोड़ की राशि मंजूर की है। इससे हाडौती में कृषि उद्यमिता को बढावा मिलेगा।

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