धतूरिया में श्रीमद भागवत कथा के पंचम सोपान में भाव विभोर हुये हजारों भक्त
न्यूजवेव @अंता
बारां जिले के धतूरिया में श्रीमद भागवत कथा के पंचम सोपान में गौसेवक संत पं. प्रभुजी नागर ने कहा कि भोजन तपता है तो उसमे स्वाद आ जाता है। कपड़ा तपने से उसमें चमक आ जाती है। लोहा तपकर औजार और सोना तपकर आभूषण बन जाता है। इसी तरह भक्त जब भक्ति की विरह, व्यथा में तपता है तो वह भगवान का कृपा पात्र बन जाता है।
उन्होंने कहा कि जब कोई चीज आग में तपती है तो धोबी, लुहार, सुनार या हलवाई जेसे मध्यस्थ उसे कोई आकार दे देते हैं। इसी तरह, समर्थ गुरू परम चेतना जागृत कर भक्त के विकार व क्लेश को हर लेते हैं। जीवन में जो तपता है, पिघलता है वही ढलकर कुछ बनता है। सुखमय जीवन किसी को नहीं मिलता है, मार्ग में कष्ट सबको आते हैं। भारत में कई महापुरूष कष्ट में चेतना जागृत कर मूर्ति बन गये। भक्ति में इतने प्रबल हो जाओ कि गुरू-गोविंद दोनों आपको याद करते रहें।

मधुर भजन ‘जहां सत्संग होता है, वहां भगवान आते हैं..’ सुनाते हुये संत नागरजी ने कहा कि संगत मनुष्य को गुणातीत बना देती है। अच्छी-बुरी संगत से ही गुण आते-जाते रहते हैं। कथा सत्संग में आने से भक्ति का रंग चढ़ता है। जब कोई व्यथा आये तो बोल देना मैं हरि कथा में यानी द्वारिकाधीश की शरण में हूं। कथा सुनने के लिये बडे़ से बड़ा नियम भी तोड़ा जा सकता है। इसमें भक्त और भगवान का मिलन होता है। जो सजग व सावधान करते रहें, उनके संग रहो। पं.नागरजी ने कहा कि कलियुग में जहां सम्पत्ति बांटी जाती हैं वहा महाभारत होती है। लेकिन जहां प्रेम बंटता हो वहां रामायण होती है। आप भक्ति में डूबकर ईश्वर को हमेशा अपने पास ही मानें।
हेलमेट की तरह है हरि कथा
सिद्ध और संत पुरूष में अंतर को समझाते हुये उन्होंने कहा कि सिद्धि करने वाले सिद्ध पुरूष हजारों वर्ष जिये। लेकिन जो भक्तों को जीना सिखा दे वही सच्चा संत है। हरि कथा में सत्संग आपके लिये हेलमेट जैसा कार्य करता है। हरि कथा के प्रवचन धारण कर लिये तो आपका मन और मस्तिष्क स्वस्थ रहेगा। सीमेंट और ईंट पर खराब मौसम में पानी बरस जाये तो ईंट का कुछ नहीं बिगड़ता है। कथा के श्रोता भी ईंट की तरह हैं। जिन बच्चों को दादा-दादी या माता-पिता ने अच्छे संस्कार दिये तो वे कभी नहीं बिगडेंगे।

राजस्थान में जन्मे नाभाजी प्रसंग पर उन्होंने क़हा कि वे जन्म से दोनों आंख से अंधे थे। वर्षों तक जंगल में निरंतर राम नाम जपते रहे। एक दिन महाराज अग्रदास प्रकट होकर बोले- राम नाम से तुम्हें दिव्य दृष्टि मिलेगी। नाभाजी बडे़ हुये तो दृष्टि आ गई। वे हाथ पंखे से सतगुरू सेवा कर रहे थे, अचानक गुरू का चित्त विचलित हुआ। नाभाजी ने आंखें बंद की तो देखा नदी में जहाज डगमगा रहा है। गुरूदेव मुझे बचा लो, यह सुन उसी पंखें को उंचा कर दिया तो तूफान अचानक शांत हो गया। तब भगवान ने बोला, नाभा तुमने जप करते करते मेरे अंतर्मन को जान लिया है। यही समर्थ चेतना है। आपको बुखार कैसा है यह थर्मामीटर बता देता है, इसी तरह, पडौसी बता देता है कि यह इंसान कैसा है।
शूल से फूल बनकर देखो
उन्होंने कहा कि विदुर ने उद्दव से कहा, आप सदैव द्वारिकाधीश के साथ रहते हैं। क्योंकि वे हमेशा तुम्हे याद करते हैं। सेवा करने वाला सदैव याद आता है। यदि समर्थ महापुरूष ने एक बार भी आपको याद कर लिया तो शूल से फूल बन जाआगे। एक प्रसंग सुनाते हुये उन्होंने कहा कि एक कील की कोई कीमत नहीं होती है लेकिन वही कील नाव में या घोडे़ की नाल में लगा दी जाये तो निकालने पर वह सिद्ध हो जाती है। कील का संग नाव से हुआ तो 5 साल में वह सिद्ध हो गई। सत्संग में आने से आपको नाथ का संग मिल जाये तो कितना काम करेगा। उन्होंने कहा कि दिव्य संतों की तपोस्थली पर जाने से बिगडे़ काम भी बन जाते हैं। धतूरिया गांव में छत्रधारी महाराज का सिद्ध मंदिर होने से यह भूमि पवित्र है।
शहरों में गौ ग्रास वाहन चलायें
गौसेवक संत पं. नागरजी ने कहा कि श्री हाटकेश्वर आश्रम,सेमलीधाम के माध्यम से मध्यप्रदेश की 200 गौशालाओं में से 125 स्थानों पर प्रतिदिन गौ ग्रास वाहन चलाकर घर-घर से रोटी या खाद्य सामग्री ली जाती है। जिससे वहां की गौशाला में गोवंश को भोजन मिल रहा है। बारां में भी गौ ग्रास वाहन चालू करने की योजना है। उन्होंने कहा कि बारां जिले में गौशालाओं के साथ पशु-पक्षी अस्पताल खोल देने से तीन वर्षो में 1.30 लाख जीव-जंतुओं के निशुल्क ऑपरेशन किये जा चुके हैं। जीव दया के लिये विधायक प्रमोद जैन भाया द्वारा किये जा रहे प्रयासों को उन्होंने अनुकरणीय बताया।

सोमवार को कथा में पूर्व मंत्री एवं कोटा उत्तर विधायक श्री शांति धारीवाल, पूर्व मंत्री एवं विधायक श्री प्रमोद जैन भाया, जिला प्रमुख उर्मिला जैन भाया, खानपुर विधायक श्री सुरेश गुर्जर, व कथा आयोजक पटेल श्री हरिशचंद्र नागर परिवार सहित हजारों श्रोताओं ने महाआरती की।
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