Monday, 15 August, 2022

गांव के सरकारी स्कूल में पढे़, पहले डॉक्टर फिर कलक्टर बने

डॉ.विक्रांत पांडे, आईएएस
जिला कलक्टर, राजकोट (गुजरात)

जिंदगी में कलक्टर बनने का सपना अक्सर कई युवा देखते हैं। लेकिन चुनींदा ऐसे हैं जिन्होंने गांव के सरकारी स्कूल में पढ़कर यह सपना सच कर दिखाया। ऐसे ही जुझारू जिला कलक्टर हैं डॉ विक्रांत पांडे। राजस्थान के झालावाड जिले में छोटा सा गांव – उन्हेल। पापा स्व.पुरूषोत्तम शर्मा लेक्चरर रहे। विक्रांत पास के बकानी कस्बे केे सरकारी स्कूल में 12वीं तक पढे़ और डॉक्टर बनकर पापा की इच्छा पूरी करना चाहते थे। इसलिए 1995 में प्री-मेडिकल की तैयारी करने मां लीलावती के साथ एलन, कोटा में आ गए। गांव से शहर में आकर खूब मेहनत की और पहले प्रयास में ही आरपीएमटी में सलेक्ट हो गए।

उम्र महज 17 साल थी। मेडिकल कॉलेज, जोधपुर में सबसे जूनियर स्टूडेंट रहे। वहां एमबीबीएस सेकंड ईयर में 2 और फाइनल में 4 गोल्ड मैडल अर्जित किए। कॉलेज में कुछ सीनियर्स सिविल सर्विसेस की तैयारी कर रहे थे, उन्हें देख मन हुआ कि आईएएस बनकर गांव वालों की बडे़ स्तर पर सेवा कर सकते हैं। 2002 से तैयारी करने दिल्ली आ गए। 2005 में ज्योग्राफी और संस्कृत जैसे यूनिक सब्जेक्ट लिए और पहले प्रयास में ही आईएएस में सलेक्ट होकर सबको चौंका दिया। मसूरी में आईएएस टेनिंग के दौरान भी उन्हें गोल्ड मैडल मिला।

गुजरात कैडर में सबसे लोकप्रिय कलक्टर

गुजरात कैडर मिलने पर वे खुश दिखे। 2007 में बालीताना (भावनगर) में असिस्टेंट कलक्टर से कॅरिअर की शुरूआत की। 2009 से 2011 तक धर्मदा में और 2011 से 2013 तक दाउद में बेस्ट डीडीओ रहे। इसके बाद 2013 से 2015 में बलसाड के सर्वश्रेष्ठ जिला कलेक्टर के रूप में सेवाएं देते रहे। गांव वाले गरीबों के संघर्ष और दर्द को उन्होंने बचपन से देखा है। सोचा जहां रहेंगे वहां लीक से हटकर कुछ करके दिखांएगे।
प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी के हाथों से बलसाड जिले में 5 हजार हैक्टेयर जमीन 17 हजार लोगों को वितरित कर गरीबों को सक्षम बनाया। वर्तमान में भरूच के जिला कलक्टर के रूप में गरीबों में खासे लोकप्रिय हैं। उनका कहना है कि पीएम श्री नरेंद्र मोदी से सादगी और गरीबों के लिए सेवा का भाव सीखा, उनसे प्रेरित होकर गुजरात में कुछ नए प्रयोग कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव,2014 के दौरान असाधारण सेवाओं के लिए उन्हें चुनाव आयोग ने 26 जनवरी,2015 को राष्ट्रपति अवार्ड से नवाजा।

डॉ. विक्रांत कहते हैं, मैं चुनौतियों का सामना करते हुए आगे बढत़ा रहा। एलन से जो संस्कार सीखे उन्हीं की बदौलत आज इस मुकाम पर खड़ा हूं। 1995 में गांव से निकलकर डॉक्टर बनने के लिए एलन के सिवाय दूसरा नाम नहीं सुना था। हम वीकली टेस्ट में अव्वल रहते थे। टीचर्स खूब पढ़ाते, हम भी उतनी ही मेहनत करते थे। नतीजन कम उम्र में मेडिकल कॉलेज पहुंच गए।

विजयी मंत्र– मैने एक स्टूडेंट के रूप में बहुत कठिन दौर देखा है।गांव में हिंदी माध्यम से पढ़ा। मेरा मानना है कि आप किसी भी ग्राउंड से हों, संस्कार अगर आपके साथ हैं तो सफलता आगे बढ़ने से रोक नहीं सकती। चुनौतियां हर पल स्वीकार करो। एक कलक्टर के रूप में भी हर दिन नई चुनौती सामने होती है, लेकिन लक्ष्य यही है कि गरीबों के लिए प्रशासनिक स्तर पर कुछ काम करते रहें।

आगे अच्छे काम, पीछे बडे़ सम्मान
– मात्र 17 साल की उम्र में मेडिकल कॉलेज में। कम उम्र में आईएएस की तैयारी शुरू।
– पहले डॉक्टर बने लेकिन संस्कृत लेकर भारतीय सिविल सेवा में चयनित।
– मार्च-अप्रैल,2014 में ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ और ‘लिम्का वर्ल्ड रिकार्ड’ बनाया। मतदान जागरूकता के लिए एक जिले में 11 लाख पोस्टकार्ड लिखवाए।
– नेशनल ई-गवर्नेंस अवार्ड,2014 से सम्मानित।
-चुनाव आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव के लिए 26 जनवरी,2015 को राष्ट्रपति पुरस्कार।
-2017 में ‘प्रधानमंत्री एक्सीलेंस अवार्ड’ से सम्मानित।।
– पहले राजस्थान में स्काउटिंग में राज्यपाल पुरस्कार।
– बलसाड में ‘बेस्ट कलक्टर’ अवार्ड से सम्मानित।
– बलसाड में 5 हजार हेक्टेयर जमीन 17 हजार लोगों को वितरित कर देश में नया इतिहास रचा।

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