Tuesday, 22 June, 2021

देश के सभी न्यायालयों में 4.4 करोड़ मामले लम्बित

– ट्रिब्यूनल संशोधन अध्यादेश-2021 लागू करने से बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड खत्म
– पेटेंट सम्बन्धी सुनवाई अब हाईकोर्ट में होगी
न्यूजवेव @ नईदिल्ली

केंद्र सरकार ने अप्रैल माह से ट्रिब्यूनल संशोधन (युक्तिसंगत व सेवा शर्तें) अध्यादेश,2021 लागू कर दिया है। इस अध्यादेश के जरिये कुछ ट्रिब्यूनलों को समाप्त करके उनकी न्यायिक शक्तियों को देश के 25 उच्च न्यायालयों में स्थानांतरित किया गया है।
केंद्र सरकार ने इस अध्यादेश में बौद्धिक संपदा से जुड़े महत्वपूर्ण संशोधन भी किये हैं,जिसमें सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, व्यापार चिन्ह अधिनियम, कॉपीराइट अधिनियम, पेटेंट अधिनियम और भौगोलिक संकेत अधिनियम शामिल हैं। नये संशोधन से देश में अपीलीय अधिकारों का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। किसी विवाद में स्थगन आदेश जारी करने की शक्ति अब हाईकोर्ट या सिविल कोर्ट को दे दी गई है।
नये संशोधन से देश के बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड (IPAB) को समाप्त कर दिया गया है। जिससे अब पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, भौगोलिक संकेत, पौधे की किस्मों आदि के बारे में अपील उनसे संबंधित न्यायालयों के आधार पर उच्च न्यायालयों द्वारा सुनी जाएगी। आईपीएबी में विषयवार विशेषज्ञों की कमी के कारण यह बदलाव किया गया है।
पेंडिंग केस 20.4% बढ़े
आईपी मोमेंट की लॉ इंटर्न सोनाली सिंह ने भारतीय न्यायालयों में लम्बित मामलों पर ताजा शोध किया है। उनके अनुसार, सभी प्रदेशों के हाईकोर्ट में विचाराधीन मामलों की संख्या पहले की तुलना में तेजी से बढ़ रही है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, कोरोना महामारी के दौरान सुनवाई नहीं हो पाने से देश के सभी न्यायलयों में लंम्बित मामलों की संख्या इस वर्ष 4.4 करोड़ तक पंहुच गई है, जिसमें से देश के 25 हाईकोर्ट में 60 लाख केस अभी पेंडिंग चल रहे हैं। नये संशोधन से लंबित मामलों की संख्या और बढ़ जायेगी।
राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड के अनुसार, देश के उच्च न्यायालयों में लम्बित मामलों की संख्या में 20.4 प्रतिशत वृद्धि हुई है। हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की कमी और वर्चुअल सुनवाई मामलों का नियमित सुचारू संचालन करने से कई चुनौतियो सामने आ रही हैं।


एक वेबिनार में आईपी मोमेंट,नईदिल्ली के संस्थापक प्रबंध निदेशक डॉ. परेश कुमार सी. दवे ने कहा कि देश मे बौद्धिक संपदा अधिकार की जागरूकता बढ़ी है। नवाचार या स्टार्टअप को सुरक्षित रखने के लिये हमें ट्रिब्यूनल की आवश्यकता होगी। जबकि नये अध्यादेश से पेटेंट करने वालों को किसी भी विवादित मामले में हाईकोर्ट की शरण लेनी होगी। इससे सबसे ज्यादा मुश्किल स्टार्टअप एवं लघु व माध्यम वर्ग के उद्यमियों को होगी क्योकि हाइकोर्ट में सुनवाई होने पर खर्च बहुत अधिक बढ़ जायेगा।
पेटेंट आवंटन की मुश्किलें बढ़ेंगी
वेबिनार में कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि आमतौर पर परिवादी प्रस्तावना के रूप में तत्काल निषेधाज्ञा की मांग करते हैं। पश्चिम के अधिकांश देश विवादों को दूर करने के लिए विशेष न्यायिक अधिकारी रखते हैं। सरकार मामलों के समय पर समाधान के लिए अपीलीय अधिकारियों में तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल करने के लिए सिफारिशें कर सकती थी। इसके विपरीत सरकार ने उच्च न्यायालयों में आईपी मुकदमों का बोझ बढ़ा दिया है, जिससे निर्णय तक पहुंचने के लिए न्यायाधीशों का अनुसंधान पर लगने वाला समय ओर बढ़ जाएगा।
दुनिया के अन्य देशों की तुलना में भारत मे पेटेंट प्रक्रिया फिलहाल बहुत लंबी है, यदि सरकार पेटेंट को भी ट्रिब्यूनल से हटाकर हाईकोर्ट को सौंपती है तो इससे देश मे पेटेंट आवंटन में और अधिक समय लगेगा, जिससे देश मे अनुसंधान करने वालों को निराशा हाथ लगेगी।

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