Wednesday, 28 February, 2024

तम्बाकू खाने से मौत का कैंसर सबसे ज्यादा

विश्व कैंसर दिवस परिचर्चा: प्रतिवर्ष 7 लाख नए कैंसर रोगी, 30 वर्ष से कैंसर की शुरूआत

न्यूजवेव@ कोटा

सुवि नेत्र चिकित्सालय एवं लेसिक लेज़र सेन्टर ने रेजोनेन्स कोचिंग इंस्टीट्यूट में विश्व केंसर दिवस पर परिचर्चा एवं नेत्र शिविर आयोजित किया। जांच शिविर में 600 से अधिक कोचिंग स्टूडेंट्स की आँखों की जांच हुई।

कोटा डिवीजन नेत्र सोसायटी के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. सुरेश पाण्डेय ने कहा कि आज देश में करीब 25 लाख लोग कैंसर की चपेट में हैं। हर साल 7 लाख नये कैंसर रोगी बढ़ रहे हैं। प्रतिवर्ष करीब 5.50 लाख मौते अकेले कैंसर से होती है जिसमें 71 प्रतिशत रोगी 30-69 उम्र के हैं।
उन्होंने बताया कि देश में प्रत्येक 8 मिनट में 1 महिला कैंसर के कारण मौत को गले लगाती है। हर दो महिलाओं में एक नयी महिला कैंसर रोगी का पता चलता है। रोजाना करीब 2500 लोगों की तंबाकू से जुडे़ मुंह के कैंसर से मौत होती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में पुरूषों में मुख (ओरल केविटी) एवं महिलाओं में स्तन कैंसर, सर्विक्स कैंसर के कारण 50 प्रतिशत से अधिक मौतें होती हैं। पुरूषों में कैंसर पांच प्रमुख अंगों मुंह, फेफडे, पेट, बडी आंत व गले को प्रभावित करता है, जबकि महिलाओं में यह जानलेवा रोग 5 प्रमुख अंगों स्तन, सर्विक्स, बडी आंत, ओवरी, मुंह को प्रभावित करता है। कैंसर से बचाव के लिए शरीर के किसी हिस्से में दर्दरहित गांठ, रक्तस्त्राव (ब्लीडिंग), डिस्चार्ज अथवा अन्य किसी लक्षण की तुरन्त जांच कराये एवं सही ट्रीटमंेट लें।

छोटे बच्चों में रेटिनोब्लास्टोमा नेत्र कैन्सर


नेत्र विशेषज्ञ डॉ. विदुषी पाण्डेय ने कहा कि बच्चों में आँख के कैन्सर रेटिना की कोशिकाओं में शुरू होता है, जिसे रेटिनोब्लास्टोमा कहते हैं। डॉ. निपुण बागरेचा ने बताया कि आँखों का कैन्सर शिशुओं से लेकर वयस्कों में हो सकता है। इसके 90 प्रतिशत कैसेज 3 वर्ष तक के बच्चों में भी पाए जाते हैं। ये बच्चें के जन्म के 5-6 महीने में पकड़ में आ जाता है। इसके लक्षणो में आँखों में रोशनी पड़ने पर सफेद झलक सी दिखाई देती है। आँखों की पलकों में होने वाले कैन्सर सूरज की पराबैंगनी किरणों के लम्बे दुष्प्रभाव से हो सकते है। त्वचा में पाया जाने वाला मेलेनोमा प्रिगमेन्ट सूर्य से आने वाली पराबैंगनी के दुष्प्रभाव से उत्पन्न होता है। छोटे बच्चों में रेटिनोब्लास्टोमा नेत्र कैन्सर होता है। ऐसे व्यक्ति जिन्हें नेत्र कैन्सर की फेमिली हिस्ट्री है, वे भी आंखों के कैन्सर का शिकार हो सकते है।

आंखों के कैंसर से कैसे बचें
डॉ एस.के. गुप्ता ने बताया कि समय रहते पता चलने पर नेत्र कैन्सर का उपचार संभव है। इसका उपचार ऑपरेशन, किमोथैरेपी, रेडियोथैरेपी द्वारा किया जाता है। आंख की पलकों के कैन्सर से बचने के लिए धूप से बचें, धूप में जाते समय छाता, टोपी, काला चश्मा आदि का प्रयोग करें। यदि आंख में गहरे काले रंग का धब्बा दिखाई दें, तो नेत्र चिकित्सक से सम्पर्क करें। छोटे बच्चों की आंखों की पुतली के बीचों-बीच यदि सफेद निशान दिखाई दें, तो यह रेेटिनोब्लास्टोमा हो सकता है। ऐसे बच्चों को तुरन्त चिकित्सक को दिखायें। रेेटिनोब्लास्टोमा से पीड़ित बच्चों के भाई-बहनों की आंखों के पर्दो की जांच दवा डालकर करवायें। मेलानोमा, रेटिनोब्लास्टोमा नामक आँखों के कैन्सर का अगर समय पर इलाज नहीं हुआ तो यह मौत की वजह बन सकता है। परिचर्चा के दौरान विद्यार्थियों ने डॉक्टर्स से सवाल भी पूछे। छात्रों को धूम्रपान एवं तंबाकू के दुष्परिणामों से अवगत कराया। इस मौके पर रेजोनेन्स के विकास कौशिक, निशांत पाराशर एवं अमित भिड़े मौजूद रहे।

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