Friday, 1 May, 2026

राजस्थान में डॉक्टर्स के खिलाफ मुकदमें दर्ज करवाना आसान नहीं

चिकित्सकों के हित में राज्य के गृह मंत्रालय द्वारा मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी
न्यूजवेव @ जयपुर

राजस्थान में सेवारत चिकित्सकों पर उपचार के दौरान रोगियों के परिजनों द्वारा आपराधिक प्रकरण दर्ज करवाने की घटनायें सामने आने पर गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार ने उच्चतम न्यायालय के निर्णयों के आधार पर 29 मई,2022 को मानक संचालन प्रक्रिया जारी कर दी है।
इसमें कहा गया कि इंटरनेट से आधी-अधूरी सूचना लेकिन रोगी के परिजन चिकित्सकों व कार्मिकों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करवा देते हैं, जिससे चिकित्सकों को मानसिक उत्पीडन होता है और उनकी कार्यक्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसी घटनाओं पर नियंत्रण के लिये राज्य सरकार ने एसओपी जारी की है।
रोगी की मृत्यु होने पर धारा-174 में मुकदमा
एसओपी के अनुसार, किसी डॉक्टर या चिकित्साकर्मी के कार्य निष्पादन के दौरान उपेक्षा के अभियोग की सूचना पुलिस थाने को मिलने पर उसे रोजनामचे में दर्ज किया जायेगा। तथा लापरवाही से रोगी की मृत्य हो जाने पर आईपीसी की धारा-174 के तहत मामला दर्ज होगा। साथ ही पोस्टमार्टम की विडियोग्राफी करवाना अनिवार्य होगा।
मेडिकल बोर्ड 3 दिन में रिपोर्ट देगा
शिकायत मिलने पर थानाधिकारी चिकित्सकीय उपेक्षा की निष्पक्ष प्राथमिक जांच करेंगे। आवश्यक होने पर वे मेडिकल बोर्ड गठित कर तीन दिन में उसकी रिपोर्ट लेंगे। बोर्ड के विशेषज्ञ निष्पक्ष राय देंगे कि चिकित्सक की उपेक्षा साधारण है अथवा गंभीर है। यदि गंभीर लापरवाही का प्रकरण है तो उसमें एफआईआर दर्ज की जायेगी।
एसपी की आज्ञा बिना डॉक्टर की गिरफ्तारी नहीं
एसओपी में निर्देश दिये गये कि किसी चिकित्सक या चिकित्सा कर्मी को गंभीर उपेक्षा के मामले में बिना एसपी या डीआईजी की आज्ञा के बिना गिरफ्तार नहीं किया जाये। यदि वह मामले के अनुसंधान में सहयोग नहीं कर रहे हैं तो गिरफ्तार करने के आदेश दिये जा सकते हैं।
कार्य का बहिष्कार नहीं करेंगे डॉक्टर
एक अन्य शर्त के अनुसार, चिकित्सक रोगी के उपचार की डिटेल रिपोर्ट तैयार करेंगे। चिकित्सकों से यह अपेक्षा की जाती है कि किसी अप्रिय घटना होने या अपनी मांग को मंनवाने के लिये कार्य का बहिष्कार नहीं करेंगे और अपनी मांग को विधि सम्मत ढंग से राज्य सरकार के सामने रखेंगे।

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