Thursday, 25 April, 2024

देश की दो नामी वेंचर कंपनियों ने मेडकॉर्ड्स में किया निवेश

कोटा के दो युवा आंत्रप्रिन्योर द्वारा शुरू किए गए स्टार्टअप मेडकॉर्ड्स हैल्थकेअर को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली

न्यूजवेव कोटा

कोटा के युवाओं द्वारा हैल्थ केअर में शुरू किए गए स्टार्टअप मेडकॉर्ड्स में देश के दो नामी वेंचर फंड्स  Waterbridge  एंड Infoedge ने निवेश किया है। इसके अलावा आईआईएम, अहमदाबाद द्वारा संचालित CIIE (स्टार्टअप ओएसिस) सहित प्रमुख कंपनियों ने इसे डिजिटल इंडिया में महत्वपूर्ण पहल बताया है। इसी माह बीकानेर में हुए डिजीफेस्ट में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजेे ने मेडकॉर्ड्स को भामाशाह टेक्नो फंड से 15 लाख रूपए मंजूर कर स्वास्थ्य क्षेत्र में इस नवाचार को सराहा।

गौरतलब है कि मेडकॉर्ड्स मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्रों में प्रारंभ किया गया है जहां लोगों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी एक जगह सुलभता से मिल सके ताकि डॉक्टर्स या विशेषज्ञ से समय पर इलाज मिल सके। इसका उद्देश्य क्लाउड बेस्ड टेक्नोलॉजी व आर्टिफिशल इंटेलीजेंस के माध्यम से स्वास्थ्य की देखभाल को सुलभ, किफायती और कारगर बनाना है।

2.50 लाख हैल्थ रिकॉर्ड आजीवन सुरक्षित

टीम के निरंतर प्रयासों से आज 1800 गांवों के मरीजों को मेडकॉर्ड्स डिजिटल सुविधा से सस्ता व समय पर इलाज मिल रहा है। अब तक देश के 2.50 लाख नागरिक इससे जुडकर अपने हैल्थ रिकॉर्ड को आजीवन सुरक्षित कर चुके हैं।

इस फंड का उपयोग टीम का गांवों तक विस्तार करने, ई-टेक्नोलॉजी को विकसित करने और राज्य के नए क्षेत्रो में लागू करने के लिए होगा। आज देश के 85 फीसदी से अधिक लोगो के पास मेडिकल रिकार्ड्स व्यवस्थित नही है, जिससे डॉक्टर्स को भी इलाज करने में दिक्कतें आती है।

800 गांवों में सर्वे कर लागू किया


पिछले 4 वर्षों में युवाओं ने राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश व बिहार के 800 से अधिक पायलट गांवो में सर्वे एवं व्यापक शोध के बाद कोटा के युवा आंत्रप्रिन्योर श्रेयांस मेहता, निखिल बाहेती और सईदा मई,2017 में कोटा से भीमगंजमंडी स्थित सरकारी डिस्पेंसरी से मेडकॉर्ड्स की शुरुआत की। कंपनी वर्तमान में कोटा और पुणे से संचालित हो रही है।

कोटा व झालावाड जिले में इसे सुदूर गांवों तक इसे लागू किया जा रहा है। कोटा स्मार्ट सिटी डिजिटल हेल्थ पार्टनर है, जिससे शहर के मेडिकल कॉलेज, एमबीएस हॉस्पिटल, सेटेलाइट हॉस्पिटल, डिस्पेंसरी आदि में हजारों मरीजों को यह सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है।

सीटीओ निखिल बाहेती ने बताया कि मेडकॉर्ड्स एडवांस एवं सुरक्षित टेक्नोलॉजी वाला प्लेटफार्म है, जो पेशेंट, डॉक्टर्स, पैथोलॉजी लैब और केमिस्ट को परस्पर जोड़ता है। इसके अलावा इंटेलीजेंस से पहचान कर व्यक्ति की स्वास्थ्य कुंडली बनाता है और हैल्थ केअर से जुड़ी जानकारियों को सरल व सहज बनाता है।

इसलिए गांवों से की शुरूआत
सीईओ श्रेयांस मेहता ने बताया कि शुरुआत में हमें काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा क्योंकि ज्यादातर एडवांस टेक्नोलॉजी की कंपनियां या सेवायें मेट्रो शहरों से शुरूआत करती है। हमें गांवों व छोटे शहरों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं समय पर उपलब्ध करवाने के लिए टेक्नोलॉजी के प्रयोग शुरू करने होंगे। आज गांवों में 70 प्रतिशत आबादी के पास स्मार्टफोन नहीं है, वे अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में मेडकॉर्ड्स हैल्थकेअर से उन्हें विश्वस्तरीय इलाज की सुविधाएं भी मिल सकेगी।

मेडकॉर्ड्स टीम के युवा टेक्नोप्रिन्योर साइदा ने कहा कि टेक्नोलॉजी इनेबल्ड हैल्थ केअर से ग्रामीण आबादी को सीधे जोड़ना हमारा लक्ष्य रहा, दिन-रात मेडिकल साइंस के नवाचारों पर शोध करते हुए हमने मेडकॉर्ड्स के रूप में एक आसान तकनीक विकसित की। याद दिला दें कि गत वर्ष अमेरिका की टेक्नोलॉजी कॉन्फ्रेंस में मेडकॉर्ड्स को प्रदर्शित किया गया था, जिसे काफी उपयोगी माना गया।

निवेशक कंपनियों वाटर ब्रिज एवं इंफाएज के सीईओ का कहना है कि मेडकॉर्ड्स हेल्थकेअर में युवा आंत्रप्रिन्योर्स ने टेक्नोलॉजी को मरीजों के लिए सुलभ बना दिया है। हमें विश्वास है कि यह मुहिम राज्य सरकार के सहयोग से सुदूर गांवों के लोगों को फायदा पहुंचाकर करोडों देशवासियों को दूरगामी लाभ पहंुचाएगी।

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