Tuesday, 16 July, 2024

कूडा बीनने वाले राजेश कालिया बने चंडीगढ़ के प्रथम नागरिक

न्यूजवेव @ चंडीगढ़
चंडीगढ़ में 46 वर्षीय राजेश कालिया भाजपा के नए मेयर बने हैं।  राजेश बेहद गरीब परिवार से हैं। वाल्मीकि समुदाय से ताल्लुक रखने वाले राजेश अब चंडीगढ़ के प्रथम नागरिक बन गए हैं।
उनके पिता कुंदनलाल एक सफाईकर्मी के तौर पर सेवानिवृत्त हुए। उनका भाई आज भी सफाई कर्मी के रूप में कार्य कर रहा है। राजेश ने बचपन से अपने समुदाय और परिवार को दो रोटी के लिए संघर्ष करते देखा है। इसी जीजिविषा ने उन्हें अपने वंचित समुदाय को सम्मान दिलाने के लिए राजनीति में कदम रखने के लिए प्रेरित किया।

बहुत कम लोग जानते हैं कि राजेश एक गरीब परिवार में 6 भाई-बहनों के साथ कूड़ा-करकट बीन कर परिवार की आय में सहयोग करते थे। अपने घर के सामने बने कचरे के पहाड़ की ओर इशारा करते हुए वे कहते हैं कि यह वही कचरे का पहाड़ है जहां बचपन में कभी वह कूड़ा-कचरा बीन कर रोज 20-30 रुपये कमाते थे।
छुआछूत से स्कूल में दाखिला नहीं मिला था
अब वह चंडीगढ़ के मेयर बनकर इस कचरे के पहाड़ को हटाना चाहते हैं। पिता कुंदनलाल ने बताया कि वे 1977 में हरियाणा से चंडीगढ़ में आकर बस गए। रहने का घर नहीं होने से कई साल एक झोपड़ी में रहे। खुद स्कूल नहीं जा सके क्योंकि छुआछूत के कारण उनको स्कूल में एडमिशन नहीं मिला था। उनको  बेटे राजेश पर गर्व है जिसने कभी हार नहीं मानी। बचपन में कचरा उठाया तो जवानी में ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार चलाया।
तीनों बेटियों को पिता पर है नाज

दिन-रात कडी मेहनत करने वाले राजेश की तीन बेटियों को अपने पिता पर नाज है। सबसे बड़ी बेटी निशा बीबीए सेकंड ईयर में है। अपने पिता को अपना आदर्श मानने वाली निशा कहती है कि उसे अच्छी तरह याद है कि पिता रात को बहुत कम सोते थे। उन्होंने तरह-तरह के काम करके हमारा गुजर-बसर किया है।
राजेश चंडीगढ़ के वार्ड नंबर 7 के पार्षद हैं। इससे पहले वह एक चुनाव हार चुके हैं। राजेश खुद आगे नहीं पढ़ पाए। लेकिन वह अपनी तीनों बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाना चाहते हैं। उनको नहीं मालूम कि बतौर मेयर उनको कितना वेतन मिलेगा। सफाई कर्मचारियों की रक्षा के लिए लड़ने वाले राजेश ने चंडीगढ़ में कूड़ा उठाने वालों के आंदोलन में आगे आकर हिस्सा लिया था। उनकी पहली चुनौती है चंडीगढ़ को भारत के स्वच्छ शहरों की सूची में पहले पायदान पर लाना, फिलहाल चंडीगढ़ तीसरे नंबर पर है।

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